क्या कुछ बड़ा होने वाला है: पीएम बोले- सोना न खरीदें; विदेश न जाएं, तेल बचाएं
KHULASA FIRST
संवाददाता

चुनावी बेला खत्म, होर्मुज संकट का ‘सरकार’ पर अब दिखने लगा असर
ईरान-अमेरिका युद्ध के असर पर प्रधानमंत्री मोदी की देशवासियों से गंभीर अपील से चौंका देश
पीएम की गुहार- एक बरस सोना न खरीदें, विदेश में छुट्टी न मनाएं, पेट्रोल-डीजल का कम करें उपयोग
खाने के तेल पर भी पीएम की अपील- कम खाएं, देश के साथ अपनी देह भी बचाएं
खाद की बोरी के असल दाम बताते हुए किसानों से भी फर्टिलाइजर का उपयोग कम करने की गुहार
कोरोनाकाल की तरह वर्क फ्रॉम होम पर पीएम ने दिया जोर, कार नहीं, पब्लिक ट्रांसपोर्ट से सफर का आग्रह
पीएम की अपील के बाद सरकार ने आज बुलाई अहम बैठक, मिडिल ईस्ट के संकट पर बनेगी रणनीति
राहुल गांधी बोले- ये उपदेश नहीं, नाकामियों का है सबूत, जनता पर डाल रहे हैं स्वयं की जिम्मेदारी
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
क्या वाकई कुछ बड़ा होने वाला है? न सिर्फ भारत के नजरिये से, बल्कि वैश्विक परिदृश्य पर? देश के अंदर भी सरकार कुछ बड़ा करने जा रही है? क्या ईरान-अमेरिका युद्ध बेहद बुरे दौर में प्रवेश करने वाला है?
दो देशों के बीच चल रहा युद्ध क्या महायुद्ध में तब्दील होने जा रहा है? क्या भारत भी इस वैश्विक युद्ध आपदा में कोई अवसर तलाश रहा है, जो देश को आतंक से स्थायी समाधान दिलाए? सकल जगत क्या परमाणु हमले का शिकार होने जा रहा है?
जब युद्ध उफान पर था, तब तो देश को आश्वस्त किया जा रहा था कि देश में हर वस्तु के भंडार भरे हुए हैं। न डरें, न घबराएं, न पैनिक क्रिएट करें। अब ऐसा एकाएक क्या हो गया कि सरकार के मुखिया को देशवासियों से देशहित में ‘बलिदान’ करने और देशभक्ति दिखाने की गुहार लगाना पड़ रही है।
वैश्विक संकट का भारत पर हो रहा संभावित असर क्या चुनावों के कारण नजर नहीं आ रहा था, जो चुनावों की समाप्ति के बाद यकायक दिखने लगा है?
ये तमाम सवाल व अंदेशे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देशवासियों से की गई उस सबसे बड़ी अपील के बाद उपजे हैं, जो उन्होंने रविवार को सुदूर दक्षिण के तेलंगाना से देश के समक्ष की।
अमेरिका, ईरान व इजराइल के बीच छिड़ी जंग और उसके भारत पर पड़ रहे असर के मामले में पहली बार खुलकर सामने आए प्रधानमंत्री मोदी ने जब देशवासियों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की तो न सिर्फ तेलंगाना के सभास्थल पर मौजूद जनसमुदाय चौंका, बल्कि समूचा देश चौकन्ना हो गया कि आखिर पीएम को ऐसा क्यों कहना पड़ रहा है।
देश के पंतप्रधान ने युद्ध को वैश्विक संकट बताते हुए दो-टूक कहा कि संकटकाल में हमारी देशभक्ति हमें ललकार रही है। लिहाजा ऐसे समय हमें कुछ संकल्प लेना होंगे।
प्रधानमंत्री ने देशवासियों से सोना न खरीदने, विदेश यात्रा से बचने, पेट्रोल-डीजल के संयमित उपयोग करने, स्वदेशी उत्पादकों की खरीदी करने, फर्टिलाइजर का कम से कम उपयोग करने, खेती में सोलर पंप का उपयोग करने, लोक परिवहन के साधनों व इलेक्ट्रिक वाहन का ज्यादा उपयोग करने और कोरोनाकाल की तरह वर्क फ्रॉम होम, यानी घर से ही कामकाज करने की अपील की।
प्रधानमंत्री की इस अपील ने देश के समक्ष एक साथ कई सवाल खड़े कर दिए कि आखिर ऐसा अब क्या होने जा रहा है, जिसके कारण प्रधानमंत्री को ये सब कहना पड़ रहा है। मध्य पूर्व युद्ध को तो दो माह से ज्यादा हो गए।
दो-दो मर्तबा युद्धविराम भी हो गया। अब भी युद्ध थमा हुआ ही है। बातचीत के दौर व समाधान के प्रयास युद्धस्तर पर चल रहे हैं और ऐसा लग रहा है कि ये संकट अब खत्म होने वाला है।
ऐसे समय प्रधानमंत्री का वक्तव्य व अपील इशारा कर रही है कि असल युद्ध अभी शेष है।
देशवासियों के इस संशय के पीछे की वजह भी साफ है कि जब युद्ध उफान पर था, तब ऐसी अपील होती तो समझ आता कि ये सब जरूरी है, लेकिन जब युद्ध एक तरह से थमा हुआ है, तब इस तरह की अपील किसी बड़े संकट की तरफ इशारा कर रही है।
विपक्ष ने पीएम की इस अपील को सरकार व प्रधानमंत्री की नाकामी से जोड़ दिया, लेकिन केंद्र सरकार इस मुद्दे पर एक्शन मोड में आ गई। रविवार को प्रधानमंत्री की कही बात के मद्देनजर सोमवार को राजनाथ सिंह की अगुआई में मंत्री समूह की एक अहम बैठक भी आहूत कर ली गई है। इस बैठक में मिडिल ईस्ट युद्ध के देश पर हो रहे असर पर चर्चा व रणनीति तैयार होगी।
ये उपदेश नहीं, नाकामी के सबूत- राहुल गांधी
वैश्विक परिदृश्य के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देशवासियों से अपील पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी मुखर हुए। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर प्रधानमंत्री को आड़े हाथों लिया।
उन्होंने कहा कि मोदीजी ने कल जनता से त्याग मांगे- सोना मत खरीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाद और खाने का तेल कम करो, मेट्रो में चलो, घर से काम करो।
ये उपदेश नहीं, ये नाकामी के सबूत हैं। 12 साल में देश को इस मुकाम पर ला दिया है कि जनता को बताना पड़ रहा है क्या खरीदे, क्या न खरीदे, कहां जाए, कहां न जाए।
हर बार जिम्मेदारी जनता पर डाल देते हैं, ताकि खुद जवाबदेही से बच निकलें। देश चलाना अब ‘कॉम्प्रोमाइज पीएम’ के बस की बात नहीं।
पीएम मोदी मध्य पूर्व युद्ध के असर पर पहली बार हुए मुखर
तेलंगाना के सिकंदराबाद में जनसभा में पीएम मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का वैश्विक आर्थिक असर भारत पर भी हो रहा है। इसलिए देशवासियों से 3 बड़ी अपील कर रहा हूं-
1. पेट्रोल-डीजल का उपयोग कम करें... अनावश्यक वाहन उपयोग से बचें। पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करें। कार शेयरिंग करें।
कारण : भारत को कच्चे तेल के आयात के लिए बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है। हमारे पास कोई तेल के कुएं नहीं हैं।
2. इलेक्ट्रॉनिक वाहन/बैटरी वाहन बढ़ाएं... युद्ध के समय ईंधन के दाम वैश्विक स्तर पर बढ़ रहे हैं, इसलिए बैटरी से चलने वाले वाहनों का उपयोग बढ़ाने की सलाह दी जा रही है।
3. एक साल तक सोना न खरीदें... पीएम ने कहा- "देशहित में हमें यह तय करना होगा कि सालभर देश में कोई कार्यक्रम हो, हम सोना नहीं खरीदेंगे। हम सोना नहीं दान करेंगे।’
कारण : सोने की खरीद में विदेशी मुद्रा बहुत अधिक खर्च होती है।
साथ में 2 और अपील
1. खाद्य तेल कम इस्तेमाल करें। हर परिवार अगर थोड़ा कम करे तो विदेशी मुद्रा भंडार की सेहत सुधरेगी। साथ ही परिवार का स्वास्थ्य भी सुधरेगा।
2. रासायनिक उर्वरक आधे करें। प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ें। खाद की एक बोरी 3 हजार की आती है, जो सरकार किसानों को 300 रुपए में देती है। ये उर्वरक भी हमें विदेशी मुद्रा में अन्य देशों से लेना पड़ता है।
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