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लाल है या काल है: बाज नहीं आ रहे मिलावटखोर; तरबूज को भी नहीं बख्श रहे

KHULASA FIRST

संवाददाता

29 अप्रैल 2026, 2:23 pm
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लाल है या काल है

तरबूज खाया, मुंबई में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत ने देशभर को चौंकाया

मुंबई की घटना के बाद बाजार में दहशत, तरबूज का बाजार व खरीदार सदमे में

मुंबई की घटना के बाद सोशल मीडिया पर कुछ दिन तरबूज खाने से परहेज के दौड़ रहे संदेश

तरबूज का रंग लाल करने व मिठास के लिए केमिकल के इंजेक्शन लगाने की चर्चा आम

तरबूज ही नहीं, आम व केले में भी हो रहा केमिकल का खेल, कार्बाइड से झटपट पका रहे फल

केमिकल से पक रहे फलों से स्वास्थ्य को भारी नुकसान, जिला प्रशासन चलाए मुहिम

इंदौर में महाराष्ट्र से ही आ रहा टनों तरबूज, चोइथराम मंडी में भी हड़कंप, भाव गिरे

नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
ये लालम लाल है या काल है? ये मिठास की पहचान है या मौत का सामान? ये गर्मी का दुश्मन है या आपके-हमारे शरीर का शत्रु? ये ग्रीष्मकाल में देह को ठंडक पहुंचा रहा है या जीते-जागते इंसान को हमेशा के लिए ठंडा कर रहा है? ये वाकई लाल रंग का है या लाल के नाम पर ‘रंगा सियार’ है? इसमें कुदरती मिठास है या कृत्रिम संसाधनों से इसमें मिठास बाहर से उंड़ेली जा रही है?

ये तमाम सवाल तरबूज को लेकर खड़े हुए हैं। वही तरबूज, जिसे गर्मी का काल कहा जाता है। अब यह तरबूज काल के गाल में असमय इंसान को समा देने का सामान माना जा रहा है। कारण बनी है दो दिन पूर्व हुई मुंबई की एक दर्दनाक घटना।

वहां एक परिवार ने पारिवारिक पार्टी के बाद देर रात तरबूज खाया और उसके बाद एक-एक कर परिवार के 4 लोगों की मौत हो गई। इनमें 2 बच्चियां भी हैं। मुंबई पुलिस ने फिलहाल फूड पॉयजनिंग की शंका जताई है। विस्तृत रिपोर्ट आना शेष है।

मामला मुंबई निवासी अब्दुल्ला अब्दुल कादर व उनके हंसते-खेलते छोटे-से परिवार का है। अब्दुल्ला 40 साल, पत्नी नसरीन 35 साल, बेटियां आयशा 16 साल व जैनब 13 साल की मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक शनिवार रात करीब 10.30 बजे अब्दुल्ला के घर पर पांच रिश्तेदार डिनर के लिए एकत्रित हुए थे। खाने में चिकन-पुलाव था। डिनर के बाद रिश्तेदार अपने घर लौट गए।

मेहमानों के जाने के बाद अब्दुल्ला के परिवार ने रात करीब 1 बजे तरबूज खाया। सुबह 5 बजे उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। स्थानीय डॉक्टर ने इलाज किया, लेकिन हालात बिगड़ने पर उन्हें जेजे अस्पताल ले जाया गया। मौत की शुरुआत छोटी बेटी से हुई और उसके बाद 10 घंटे के अंतराल में एक-एक कर चारों की जान चली गई। जबकि पुलाव खाने वाले तमाम रिश्तेदार-मेहमानों को कोई दिक्कत नहीं हुई।

इस घटना ने न सिर्फ मुंबई, बल्कि देशभर को झकझोर दिया। कारण है तरबूज का सीजन। गर्मियों में तरबूज का चलन बहुतायत में रहता है। जनसामान्य इस फल के सेवन में गर्मी से राहत तलाशता है। लिहाजा मुंबई से इंदौर तक पहुंची मौत की खबर ने यहां भी दहशत का माहौल बना दिया। सोशल मीडिया पर मुंबई की तरबूज वाली घटना के मैसेज जमकर दौड़े। इन संदेशों में कुछ दिन तरबूज से परहेज रखने के साथ उसमें केमिकल की मिलावट के प्रति भी आगाह किया जा रहा है।

सावधान! इंदौर में भी महाराष्ट्र से ही आ रहा हर दिन टनों तरबूज
इसमें कोई दो राय नहीं कि मिलावट की हरकतों से अब फलों का बाजार भी अछूता नहीं रहा। अब तक केले में ही केमिकल का खेल जोरों पर था। कार्बाइड के जरिये केले पकाने के खेल ने इस स्वादिष्ट फल की मूल पहचान व स्वाद को ही खत्म कर दिया, लेकिन केलों का कार्बाइड से पकना जिम्मेदार बंद नहीं करा पाए।

न ऐसे मिलावटी केले की बिक्री पर कोई रोक लग पाई। अब ये खेल आम में भी शुरू हो गया है। कभी घास की पाल में आम तैयार होता था और वह प्राकृतिक रूप से पकता व मिठास देता था। अब आम में भी केमिकल के जरिये मिठास बढ़ाई जा रही है।

खतरनाक केमिकल से मिलावट का ताजा खेल अब तरबूज में शुरू हुआ है। बाजार से आई खबरों को सही मानें तो तरबूज में बाहर से रासायनिक इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं। इन्हीं इंजेक्शन के जरिये तरबूज की मिठास व लालिमा झटपट तैयार की जा रही है।

वक्त रहते अगर जिला प्रशासन के खाद्य विभाग का अमला इस पर नकेल नहीं कसता है, तो मुंबई जैसी दर्दनाक घटना इंदौर में भी घट सकती है, क्योंकि इंदौर में तरबूज की 90 प्रतिशत से ज्यादा आवक महाराष्ट्र से ही होती है।

इंदौर की चोइथराम स्थित मंडी मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी फल मंडी है और यहीं से न सिर्फ मालवा-निमाड़ अंचल, बल्कि मध्यभारत प्रांत तक तरबूज पहुंचता है। अभी सीजन में प्रतिदिन इंदौर मंडी में 30-40 टन तरबूज की आवक हो रही है।

मुंबई की घटना ने बाजार पर असर किया है। बाजार में तरबूज की आवक और बिकवाली दोनों घट गई। थोक भाव भी दो दिन में नीचे आए हैं।

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