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अमेरिका-इजराइल हमले में ईरानी सुप्रीम लीडर की मौत का दावा: बेटी-दामाद, बहू-पोती की भी जान गई; क्या अब पलटवार करेगा यह देश

KHULASA FIRST

संवाददाता

01 मार्च 2026, 11:09 am
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अमेरिका-इजराइल हमले में ईरानी सुप्रीम लीडर की मौत का दावा

खुलासा फर्स्ट, तेल अवीव/तेहरान।
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमले में मौत का दावा किया गया है। ईरान की तसनीम और फार्स समाचार एजेंसियों के मुताबिक हमले में उनके परिवार के कुछ सदस्य भी मारे गए। सरकार ने देश में 40 दिन के राजकीय शोक और सात दिन की सार्वजनिक छुट्टियों की घोषणा की है।

ईरानी इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने शोक जताते हुए बयान जारी किया कि देश ने “एक महान नेता” खो दिया है। साथ ही ईरानी सेना ने “कड़े और निर्णायक जवाब” की चेतावनी दी है। सेना के अनुसार, जवाबी कार्रवाई में क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और इजराइली लक्ष्यों को निशाना बनाया जाएगा।

इससे पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर खामेनेई की मौत का दावा किया था और इसे “न्याय” बताया था। शनिवार को इजराइल और अमेरिका ने तेहरान सहित कई ईरानी शहरों में हमले किए। इसके बाद ईरान ने भी इजराइल पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर जवाबी कार्रवाई की।

अयातुल्ला अली खामेनेई: एक नजर में
जन्म: 19 अप्रैल 1939, मशहद (ईरान) 1963 में शाह विरोधी भाषण के बाद गिरफ्तार। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद सत्ता संरचना में अहम भूमिका। 1981 में बम हमले में घायल, उसी वर्ष राष्ट्रपति निर्वाचित। 1989 में रूहोल्लाह खोमैनी के निधन के बाद देश के सर्वोच्च नेता (रहबर) बने। समर्थक उन्हें इस्लामी शासन व्यवस्था का मजबूत संरक्षक मानते हैं, जबकि आलोचक उन पर कठोर और केंद्रीकृत शासन चलाने का आरोप लगाते रहे हैं।

ईरान में हताहतों का आंकड़ा
ईरान की रेड क्रिसेंट सोसाइटी के अनुसार, हालिया हमलों में 200 से अधिक लोगों की मौत और 740 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। राजधानी तेहरान और अन्य प्रमुख शहरों में भारी नुकसान की खबर है। एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से बड़ी संख्या में छात्राओं के हताहत होने की सूचना है।

ईरान का पलटवार
जवाबी कार्रवाई में ईरान ने इजराइल समेत मिडिल-ईस्ट के कई देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। रिपोर्टों के अनुसार, इजराइल पर सैकड़ों मिसाइलें दागी गईं, जबकि कतर, कुवैत, जॉर्डन, बहरीन, सऊदी अरब और UAE में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को भी टारगेट किया गया। दुबई में ड्रोन हमले की भी खबर है।

ईरान-इजराइल तनाव की मुख्य वजहें
न्यूक्लियर प्रोग्राम – अमेरिका और इजराइल को आशंका है कि ईरान परमाणु हथियार क्षमता विकसित कर सकता है, जबकि ईरान इसे शांतिपूर्ण कार्यक्रम बताता है।

बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम – ईरान इसे अपनी सुरक्षा की “रेड लाइन” मानता है।

इजराइल विरोध – ईरान खुलकर इजराइल का विरोध करता है, जबकि अमेरिका इजराइल का प्रमुख समर्थक है।

मिडिल ईस्ट में प्रभाव – इराक, सीरिया, लेबनान और यमन में प्रभाव को लेकर आरोप-प्रत्यारोप।

आर्थिक प्रतिबंध – अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव, जिसके जवाब में तेहरान सख्त रुख अपनाता रहा है।

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