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जांच अब पैसों के नेटवर्क पर केंद्रित: संपर्कों के जरिए बनाया जाता था दबाव; छोटे शहर से बड़े नेटवर्क तक पहुंची रेशु उर्फ अभिलाषा, अब हो सकते हैं कई खुलासे

KHULASA FIRST

संवाददाता

22 मई 2026, 3:08 pm
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जांच अब पैसों के नेटवर्क पर केंद्रित

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
चर्चित हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग केस में गिरफ्तार की गई रेशु उर्फ अभिलाषा चौधरी को लेकर हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। शराब कारोबारी हितेंद्रसिंह ठाकुर उर्फ चिंटू ठाकुर को धमकाकर करोड़ों रुपए की उगाही के इस मामले में अब पुलिस की जांच सिर्फ ब्लैकमेलिंग तक सीमित नहीं, बल्कि इसके तार राजनीति, अफसरशाही और बड़े कारोबारी नेटवर्क तक पहुंचते दिखाई दे रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक सागर निवासी रेशु उर्फ अभिलाषा की भूमिका इस पूरे नेटवर्क में बेहद अहम मानी जा रही है। जांच एजेंसियों को शक है कि वह केवल एक मोहरा नहीं, बल्कि प्रभावशाली लोगों तक पहुंच बनाने वाली कनेक्ट चेन का हिस्सा थी।

पुलिस अब उसके मोबाइल फोन, सोशल मीडिया चैट, कॉल डिटेल और बैंक ट्रांजेक्शन खंगाल रही है। माना जा रहा है कि इन डिजिटल सबूतों से कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं। अब जांच केवल ब्लैकमेलिंग या निजी वीडियो तक सीमित नहीं, बल्कि पुलिस और जांच एजेंसियों की नजर अब उस आर्थिक नेटवर्क पर टिकी है, जिसके जरिये कथित तौर पर करोड़ों रुपए का लेन-देन, राजनीतिक पहुंच और कारोबारी दबाव का खेल संचालित किया जा रहा था।

एक क्राइम रिपोर्टर की नजर से देखें तो आने वाले दिनों में यह मामला हनीट्रैप से ज्यादा फंडिंग और प्रभाव के नेटवर्क के रूप में सामने आ सकता है। बताया जा रहा है गिरफ्तार रेशु उर्फ अभिलाषा चौधरी लंबे समय से राजनीतिक गलियारों में सक्रिय थी।

वह केवल सामाजिक गतिविधियों तक सीमित नहीं थी, बल्कि विधानसभा टिकट की दावेदारी, नेताओं के संपर्क और बड़े कारोबारियों से नजदीकियों के जरिये खुद को एक प्रभावशाली चेहरा बनाने की कोशिश कर रही थी।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर इतनी तेजी से बढ़ती उसकी पहुंच के पीछे आर्थिक ताकत कौन दे रहा था।

कारोबारी संपर्कों के जरिये बना दबाव तंत्र?
क्राइम ब्रांच सूत्रों के अनुसार इस नेटवर्क का मुख्य टारगेट ऐसे कारोबारी और प्रभावशाली लोग थे, जिनकी सामाजिक और राजनीतिक साख दांव पर लग सकती थी। पुलिस को शंका है कि निजी संबंध बनाकर पहले भरोसा हासिल किया जाता, फिर वीडियो, फोटो या बातचीत के आधार पर दबाव बनाया जाता था।

अब जांच इस दिशा में भी बढ़ रही है कि क्या इस नेटवर्क के जरिये कुछ कारोबारियों से सेटिंग, सुरक्षा या राजनीतिक पहुंच के नाम पर रकम ली जाती थी। यदि ऐसा साबित होता है, तो मामला सीधे तौर पर कारोबारी फंडिंग और अवैध वसूली के बड़े रैकेट में बदल सकता है।

चुनावी फंडिंग की जांच क्यों अहम मानी जा रही?
सूत्र बताते हैं कि रेशु की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं थीं। भोपाल और सागर के राजनीतिक हलकों में उसकी सक्रियता लगातार बढ़ रही थी। उसने क्षेत्र में होर्डिंग्स, प्रचार गतिविधियों और नेताओं के संपर्क के जरिये अपनी पहचान बनाने की कोशिश की थी।

यही कारण है कि जांच एजेंसियां अब यह भी खंगाल रही हैं कि क्या किसी राजनीतिक गतिविधि के लिए फंड जुटाया जा रहा था? क्या कारोबारी संपर्कों का इस्तेमाल चुनावी खर्च या राजनीतिक पहुंच बढ़ाने में हुआ? क्या ब्लैकमेलिंग से मिली रकम को किसी राजनीतिक गतिविधि में लगाया गया?

हालांकि अभी तक पुलिस ने आधिकारिक रूप से चुनावी फंडिंग के लिंक की पुष्टि नहीं की है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि बैंक खातों, नकद लेन-देन और प्रॉपर्टी निवेश की जांच शुरू हो चुकी है।

कम समय में बड़े सपनों को पूरा करने की चाहत
सूत्र बताते हैं कि रेशु कम समय में बड़ी पहचान और राजनीतिक प्रभाव हासिल करना चाहती थी। सागर के मकरोनिया क्षेत्र से निकलकर उसने पहले खुद को शिक्षित और प्रशासनिक परीक्षा की तैयारी करने वाली युवती के रूप में प्रस्तुत किया।

सोशल मीडिया प्रोफाइल में उसने खुद को कभी यूपीएससी प्री-क्वालिफाइड, तो कभी एमपीपीएससी चयनित बताकर प्रभाव जमाने की कोशिश की। इसके बाद उसने आईएएस अकादमी के नाम से कोचिंग संस्थान भी शुरू किया, लेकिन वह ज्यादा समय तक नहीं चल सका।

इसी दौरान उसकी सक्रियता राजनीतिक गलियारों में बढ़ने लगी। सूत्रों के अनुसार भोपाल में कई नेताओं के आसपास उसकी मौजूदगी लगातार देखी जाने लगी थी। वह खुद को सामाजिक कार्यकर्ता और राजनीतिक चेहरा स्थापित करने की कोशिश कर रही थी।

विधानसभा टिकट की चाह और राजनीतिक संपर्क
सूत्रों का दावा है कि रेशु की नजर सागर की नरयावली विधानसभा सीट पर थी। वह भाजपा नेताओं के संपर्क में रहकर राजनीतिक जमीन तैयार करने की कोशिश कर रही थी। बताया जाता है कि उसने क्षेत्र में होर्डिंग्स और प्रचार गतिविधियों के जरिये अपनी मौजूदगी भी दर्ज कराई थी।

हालांकि पार्टी ने उसे कोई मौका नहीं दिया, लेकिन इसी दौरान उसकी पहचान कई प्रभावशाली लोगों से हो गई। जांच में यह भी सामने आया है कि रेशु की नजदीकियां कुछ नेताओं और कारोबारियों से बढ़ीं।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या इन संपर्कों का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग नेटवर्क खड़ा करने में किया गया था। सूत्रों के मुताबिक कई लोगों के निजी वीडियो, फोटो और बातचीत रिकॉर्ड कर उन्हें दबाव में लेने की कोशिश की जाती थी।

अधिकारियों द्वारा जानकारी जुटाना भी इस बात का संकेत माना जा रहा है कि मामला केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है। यदि डिजिटल डाटा और चैट रिकवरी में बड़े नाम सामने आते हैं, तो राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में बड़ा भूचाल आ सकता है। फिलहाल पुलिस आधिकारिक रूप से ज्यादा खुलासा करने से बच रही है, लेकिन रेशु उर्फ अभिलाषा की गिरफ्तारी ने यह साफ कर दिया है।

कई बड़े नामों का हो सकता है खुलासा
सूत्रों का दावा है कि यदि डिजिटल डेटा और बैंक ट्रेल पूरी तरह खुलते हैं, तो कुछ बड़े कारोबारी, राजनीतिक चेहरे और मध्यस्थ जांच के दायरे में आ सकते हैं। यही वजह है कि मामले में दिल्ली स्तर तक रुचि दिखाई जा रही है।

फिलहाल पुलिस पूरी सतर्कता बरतते हुए आगे बढ़ रही है, लेकिन यह साफ है कि हनीट्रैप अब केवल एक आपराधिक केस नहीं, बल्कि सत्ता, पैसा और प्रभाव के गठजोड़ की जांच बन चुका है।

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