नगर निगम में ‘इनोवा बिल’ विवाद: ईमानदारी पर सियासी संग्राम तेज; भ्रष्टाचार में घिरा एमआईसी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नगर निगम एक बार फिर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के घेरे में है। मेयर इन काउंसिल (MIC) सदस्यों पर निजी गाड़ियों को ‘इनोवा’ बताकर टैक्सी बिल पास कराने का आरोप लगा है। इस मुद्दे ने न सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि सियासत में भी तीखा घमासान शुरू हो गया है।
कांग्रेस का तीखा हमला: ईमानदारी अब मज़ाक बन चुकी
कांग्रेस प्रवक्ता अमीनुल सूरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर महापौर पुष्यमित्र भार्गव पर सीधा हमला बोला। उन्होंने लिखा कि जब प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने ईमानदारी पर सवाल उठाए थे, तब सामने आने वालों की सच्चाई अब उजागर हो चुकी है।
सूरी ने आरोप लगाया कि एमआईसी सदस्य प्रिया डांगी का कथित “कबूलनामा” पूरे मामले की पोल खोल रहा है। “गाड़ी किसी और की, नाम किसी और का, नोटिस किसी और को और खर्च जनता के पैसों पर!”
क्या है पूरा ‘फर्जी इनोवा बिल’ मामला?
आरोपों के मुताबिक
* एमआईसी सदस्य अपनी निजी गाड़ियों का उपयोग कर रहे हैं।
* लेकिन बिलों में उन्हें महंगी टैक्सी, खासकर ‘इनोवा’, दिखाया जा रहा है।
* इसके आधार पर नगर निगम से भुगतान लिया जा रहा है।
यानी निजी संसाधनों को सरकारी खर्च के रूप में दिखाकर खजाने पर बोझ डाला जा रहा है। इस खुलासे के बाद इसे “भ्रष्टाचार का नया मॉडल” बताया जा रहा है।
सियासी बयानबाजी तेज: 420 का प्रीमियम पैकेज
अमीनुल सूरी ने तंज कसते हुए कहा-“खजाना खाली है… पर फर्जीवाड़ा हाई-टेक है!”
उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ निगम आर्थिक तंगी की बात करता है, वहीं दूसरी ओर फर्जी बिलों के जरिए पैसा निकाला जा रहा है। सूरी ने इस पूरे मामले को “420 का प्रीमियम पैकेज” करार दिया।
महापौर से सीधे सवाल
कांग्रेस ने महापौर पुष्यमित्र भार्गव के सामने कई सीधे सवाल रखे हैं।
* क्या यही उनकी बताई गई “ईमानदारी” है?
* क्या मेयर इन काउंसिल भ्रष्टाचार की प्रयोगशाला बन चुकी है?
* क्या प्रिया डांगी इस्तीफा देंगी या उन्हें हटाया जाएगा?
* या पूरे मामले पर पर्दा डाल दिया जाएगा?
सूरी ने यह भी कहा कि जब पूरा “मंत्रीमंडल” सवालों में हो, तो जिम्मेदारी नेतृत्व की भी बनती है।
विपक्ष भी घेरे में: मामला हुआ पेचीदा
इस विवाद में नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे का नाम भी कथित तौर पर सामने आने से मामला और उलझ गया है। इससे सियासत में “दोनों पक्षों की मिलीभगत” जैसी चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।
स्वच्छ शहर की छवि पर दाग?
इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर माना जाता है, लेकिन अब सवाल सिस्टम की “सफाई” पर उठ रहे हैं। जनता पूछ रही है, जब अंदर ही भ्रष्टाचार पनप रहा है, तो इस गंदगी को साफ कौन करेगा?
जवाब नहीं, कार्रवाई चाहिए
यह मामला अब केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा। यह एक बड़े पैटर्न की ओर इशारा कर रहा है। जनता का साफ संदेश है। अब सिर्फ दावे नहीं, बल्कि ठोस जांच और सख्त कार्रवाई जरूरी है।
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