जनता पर महंगाई की मार: ये प्रोडक्ट होंगे महंगे; FMCG कंपनियों ने दिए संकेत
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, नई दिल्ली।
आम उपभोक्ताओं के लिए आने वाले दिनों में रोजमर्रा की चीजें महंगी होने जा रही हैं। देश की बड़ी एफएमसीजी कंपनियां बढ़ती लागत के दबाव के चलते साबुन, डिटर्जेंट, बिस्किट और पैकेट बंद खाद्य उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी की तैयारी कर रही हैं।
क्यों बढ़ रहे हैं दाम?
कंपनियों के मुताबिक, कई वैश्विक और घरेलू कारण उत्पादन लागत को तेजी से बढ़ा रहे हैं।
सप्लाई चेन पर असर: पश्चिम एशिया में जारी तनाव से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे कच्चा माल और परिवहन महंगा हुआ है।
कमजोर रुपया: डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने आयातित कच्चे माल की लागत बढ़ा दी है।
ईंधन और पैकेजिंग महंगी: एलपीजी, पीएनजी और पैकेजिंग मटेरियल (लैमिनेट्स) की कीमतों में करीब 20% तक उछाल आया है।
कंपनियों की नई रणनीति
सीधे दाम बढ़ाने के अलावा कंपनियां कुछ “सॉफ्ट” तरीके भी अपना रही हैं।
छोटा पैक, वही कीमत: ₹5, ₹10, ₹15 वाले पैक का वजन कम किया जा रहा है ताकि कीमत स्थिर दिखे।
डिस्काउंट में कटौती: प्रमोशनल ऑफर और छूट घटाई जा रही है।
सप्लाई चेन सुधार: लॉजिस्टिक्स और डिस्ट्रीब्यूशन को ज्यादा कुशल बनाकर लागत कम करने की कोशिश।
बड़ी कंपनियों ने क्या कहा?
डाबर इंडिया के सीईओ मोहित मल्होत्रा के अनुसार कंपनी करीब 10% महंगाई झेल रही है और औसतन 4% तक कीमतें बढ़ा चुकी है।
ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज़ के एमडी रक्षित हरगेव ने बताया कि ईंधन और पैकेजिंग महंगी होने से बड़े पैक महंगे होंगे।
हिंदुस्तान यूनिलीवर के सीएफओ निरंजन गुप्ता के मुताबिक कंपनी पर 8–10% लागत का दबाव है और अलग-अलग प्रोडक्ट्स में 2 से 5% तक कीमतें बढ़ाई गई हैं।
उपभोक्ताओं पर पड़ेगा असर
रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजों की कीमत बढ़ने से घर का बजट प्रभावित होगा, खासकर मध्यम और निम्न आय वर्ग पर इसका ज्यादा असर पड़ेगा। आने वाले महीनों में यह साफ हो जाएगा कि कंपनियां सीधे दाम बढ़ाती हैं या “कम मात्रा, वही कीमत” के जरिए महंगाई का असर उपभोक्ताओं तक पहुंचाती हैं।
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