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आम आदमी पर महंगाई की फिर मार: और इतना महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल, अब बढ़ सकता है इन सबका किराया

KHULASA FIRST

संवाददाता

19 मई 2026, 12:18 pm
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आम आदमी पर महंगाई की फिर मार

खुलासा फर्स्ट, दिल्ली।
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी गई है। मंगलवार 19 मई से दोनों ईंधनों के दाम औसतन 90 पैसे प्रति लीटर बढ़ गए हैं। इससे पहले 15 मई को ही तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दामों में 3-3 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि की थी। यानी महज पांच दिनों के भीतर ईंधन कीमतों में दूसरी बार इजाफा हुआ है। नई दरों के बाद New Delhi में पेट्रोल 98.64 रुपए और डीजल 91.58 रुपए प्रति लीटर पहुंच गया है।

लगातार बढ़ती कीमतों का असर अब राज्यों में भी दिखाई देने लगा है। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग रही हैं। महराजगंज में लोग रात से ही पंपों के बाहर मच्छरदानियां लगाकर इंतजार करते नजर आए, जबकि बस्ती में बाइक चालकों को सिर्फ 200 रुपए और कार चालकों को 1000 रुपए तक का ही ईंधन दिया जा रहा है। वहीं बिहार के जमुई सहित कई इलाकों में पेट्रोल की कैपिंग शुरू कर दी गई है, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

राजस्थान के पाली में ड्रम में डीजल देने से मना करने पर पेट्रोल पंप संचालक और ग्राहकों के बीच विवाद हो गया। घटना के बाद कई पंप संचालकों ने विरोध स्वरूप हड़ताल कर दी, जिससे मंगलवार सुबह शहर के अधिकांश पेट्रोल पंप बंद रहे। बढ़ती कीमतों और संभावित कमी ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।

सरकार और तेल कंपनियों के अनुसार इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल है। पश्चिम एशिया में ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ने के बाद क्रूड ऑयल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। इससे सरकारी तेल कंपनियों पर भारी आर्थिक दबाव बना हुआ था। पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियों को हर महीने लगभग 30 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा था।

ईंधन महंगा होने का असर अब सिर्फ पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहेगा। ट्रकों और मालवाहक वाहनों का किराया बढ़ने से सब्जियां, फल, राशन और दूसरी जरूरी वस्तुएं महंगी हो सकती हैं। खेती में ट्रैक्टर और पंपिंग सेट चलाने की लागत बढ़ेगी, जबकि बस, ऑटो और स्कूल वाहनों के किराए में भी इजाफा होने की संभावना है। यानी पेट्रोल-डीजल की यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर आम आदमी की जेब पर असर डालने वाली है।

दरअसल, भारत अपनी जरूरत का करीब 90 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय कीमतों के साथ-साथ रिफाइनिंग लागत, केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और राज्यों के वैट को जोड़ने के बाद उपभोक्ताओं तक ईंधन की अंतिम कीमत पहुंचती है। अलग-अलग राज्यों में वैट की दरें अलग होने के कारण शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम भी अलग-अलग रहते हैं।

गौरतलब है कि मार्च 2024 से देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई थीं। लोकसभा चुनाव से पहले सरकार ने 2 रुपए प्रति लीटर की कटौती कर राहत दी थी। हालांकि अब अंतरराष्ट्रीय हालात और बढ़ते आयात खर्च के चलते तेल कंपनियों ने कीमतें बढ़ाने का फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में पेट्रोलियम उत्पादों के संयमित उपयोग की अपील करते हुए कहा था कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में ईंधन की बचत देशहित में जरूरी है।

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