हनीट्रैप की रेस में वीडियों नहीं कैश था: रेशू का असली खेल
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट…इंदौर।
हाईप्रोफाइल हनीट्रैप कांड अब सिर्फ अश्लील वीडियो और ब्लैकमेलिंग की कहानी नहीं रह गया है। क्राइम ब्रांच की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है वैसे-वैसे इस पूरे सिंडिकेट के पीछे छिपे करोड़ों के हवाला नेटवर्क, कैश रिकवरी सिस्टम और सत्ता से जुड़े कनेक्शनों की परतें खुलती जा रही हैं। जांच एजेंसियों को ऐसे संकेत मिले हैं कि वीडियो और निजी क्लिप्स सिर्फ शिकार को डराने का जरिया थे, जबकि असली खेल हवाला और कैश कलेक्शन का था।
क्राइम ब्रांच दफ्तर में देर रात तक चली पूछताछ और लगातार पहुंच रहे संदिग्ध लोगों की गतिविधियों ने जांच एजेंसियों को भी चौंका दिया है। जांच एजेंसियों के सामने अब एक ऐसा संगठित सिंडिकेट उभर रहा है, जहां खूबसूरत चेहरे सिर्फ जाल बिछाने के लिए थे और असली खेल करोड़ों की उगाही, सेटिंग और हवाला चैन का था।
सूत्रों के मुताबिक गैंग पूरी तरह कैश आधारित मॉडल पर काम करता था। बैंक ट्रांजेक्शन से बचने के लिए रकम हाथोहाथ ली जाती थी। सौदों के लिए होटल लॉबी, लग्जरी फार्म हाउस, खाली फ्लैट और बंद कमरों का इस्तेमाल किया जाता था। कई बार रकम तय करने वाले और कैश लेने वाले अलग-अलग लोग होते थे, ताकि जांच एजेंसियों तक सीधी लिंक न पहुंचे।
जांच में सामने आया है कि सागर से हिरासत में ली गई भाजपा नेत्री रेशू उर्फ अभिलाषा चौधरी इस पूरे नेटवर्क की सबसे मजबूत कड़ी बन चुकी थी। वह बड़े कारोबारियों, नेताओं, शराब कारोबारियों और रसूखदार लोगों से संपर्क बढ़ाती थी। पहले दोस्ती और भरोसे का माहौल बनाया जाता था, फिर निजी मुलाकातों के दौरान कथित वीडियो और फोटो रिकॉर्ड किए जाते थे। इसके बाद शुरू होता था दबाव और सेटिंग का खेल।
सीधी धमकी देने से बचता था गैंग
सूत्रों का दावा है कि गैंग सीधे धमकी देने से बचता था। सामने वाले को सिर्फ इतना कहा जाता था कि मामला बाहर गया तो परिवार, राजनीति और कारोबार सब खत्म हो जाएगा। इसके बाद रकम की बातचीत शुरू होती थी। कई मामलों में कथित तौर पर वीडियो की छोटी क्लिप दिखाकर ही करोड़ों की डील फाइनल की गई। क्राइम ब्रांच को ऐसे इनपुट भी मिले हैं कि इस नेटवर्क में महिलाएं सिर्फ चेहरा नहीं थीं, बल्कि पूरा कैश रिकवरी सिस्टम संभालती थीं। रेशू, श्वेता विजय जैन और अलका दीक्षित कथित तौर पर उन लोगों में शामिल थीं, जो टारगेट को मानसिक दबाव में लाकर सौदे तक पहुंचाती थीं।
वीडियो सिर्फ डराने का हथियार थे, असली खेल करोड़ों की कैश रिकवरी और हवाला चैनल का था
खुल रही हवाला, ब्लैकमेल और सत्ता कनेक्शन की खौफनाक परतें
मेकअप से ज्यादा खर्च हिडन कैमरे, रिकॉर्डिंग डिवाइस और निगरानी गैजेट्स पर होता था
राजनीतिक पकड़ का हवाला दिया, फिर भी गैंग नहीं मानी
सूत्र बताते हैं कि जब चिंटू ठाकुर ने अपनी राजनीतिक पहुंच का हवाला दिया, तब उसे कथित तौर पर दूसरे बड़े नेताओं और प्रभावशाली लोगों के वीडियो होने की बात कहकर चुप रहने का संदेश दिया गया। जांच एजेंसियों को शक है कि गैंग अपने शिकारों को यह एहसास दिलाती थी कि उनके खिलाफ कार्रवाई कराने की क्षमता भी उसके पास है। अब जांच एजेंसियों का सबसे बड़ा फोकस कैश ट्रेल और हवाला नेटवर्क पर है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि करोड़ों की वसूली गई रकम आखिर कहां गई। क्या पैसा सीधे नकद रखा गया या फिर उसे प्रॉपर्टी, लग्जरी गाड़ियों, शराब कारोबार और दूसरे निवेशों में खपाया गया।
रेशू, श्वेता और अलका ‘कैश रिकवरी मॉड्यूल’ की तरह करती थीं काम
कथित तौर पर चिंटू ठाकुर से एक करोड़ रुपए की मांग की गई थी
जांच अधिकारियों के मुताबिक इन महिलाओं पर मेकअप से ज्यादा खर्च हिडन कैमरों, रिकॉर्डिंग डिवाइस, माइक्रो ऑडियो सिस्टम और निगरानी गैजेट्स पर किया जाता था। सूत्रों के अनुसार कई मुलाकातों के दौरान सामने वाले व्यक्ति से मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक सामान दूर रखवा दिया जाता था, ताकि उसे किसी रिकॉर्डिंग का शक न हो, लेकिन असली रिकॉर्डिंग महिलाओं के पर्स, कपड़ों, बटन कैमरा और दूसरी वस्तुओं में छिपे गैजेट्स से होती थी। पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह उर्फ चिंटू ठाकुर की शिकायत के बाद आया। जांच में सामने आया कि उससे कथित तौर पर एक करोड़ रुपए की मांग की गई थी। उसे कथित वीडियो और फोटो दिखाकर डराने की कोशिश हुई। इतना ही नहीं, शराब कारोबार और जमीन सौदों में हिस्सेदारी को लेकर भी दबाव बनाए जाने की बात सामने आई है।
आर्थिक लेन-देन की फाइनेंशियल मैपिंग कर रही क्राइम
क्राइम ब्रांच अब आरोपियों की संपत्तियों, निवेश, बैंक खातों और करीबी लोगों के आर्थिक लेन-देन की फाइनेंशियल मैपिंग कर रही है। सूत्रों के मुताबिक कुछ ऐसे नाम भी सामने आए हैं जो सीधे इस नेटवर्क में शामिल नहीं थे, लेकिन कथित तौर पर कैश ट्रांसफर और ठिकाने बदलने में मदद करते थे। पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब श्वेता विजय जैन ने खुद को सरकारी गवाह बनाने की इच्छा जताई।
सूत्रों का दावा है कि पूछताछ में उसने कई ऐसे नाम और जानकारियां दी हैं, जिनसे जांच एजेंसियों की नजर अब राजनीतिक और कारोबारी नेटवर्क पर टिक गई है। अधिकारियों का मानना है कि अगर नकद लेन-देन और हवाला चैन की पूरी कड़ी सामने आ गई तो यह मामला सिर्फ हनीट्रैप या ब्लैकमेलिंग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग, हवाला और संगठित अपराध की बड़ी कार्रवाई तक पहुंच सकता है।
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