पेयजल संकट पर गहराई शहर की राजनीति: भाजपा विधायक ने किसके घर धरने की दी चेतावनी; क्या कहना है महापौर और अपर आयुक्त का
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भीषण गर्मी के बीच शहर में गहराते जलसंकट ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। पानी की किल्लत को लेकर भारतीय जनता पार्टी के ही जनप्रतिनिधि आमने-सामने आ गए हैं। हालात ऐसे हैं कि विधायक, पार्षद और नगर निगम प्रशासन एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आ रहे हैं। इसी बीच महेंद्र हार्डिया ने नाराजगी जाहिर करते हुए महापौर के घर जाकर बैठने तक की चेतावनी दे दी है।
कार्यक्रम बीच में छोड़कर निकले विधायक
रविवार को विधानसभा इंदौर-5 के वार्ड 41 और 37 में पानी की समस्या को लेकर हंगामा हुआ। वार्ड 41 में आयोजित एक भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान विधायक महेंद्र हार्डिया अचानक नाराज होकर कार्यक्रम छोड़कर चले गए। उन्होंने कहा कि जलसंकट से लोग इस कदर परेशान हैं कि रोज उनके घर शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। ऐसे में भूमिपूजन-वूमिपूजन नहीं करना है, कहकर वे कार्यक्रम से निकल गए।
महापौर को दी सीधी चेतावनी
हार्डिया ने कहा कि वे 20 साल से विधायक हैं, लेकिन ऐसा जलसंकट पहले कभी नहीं देखा। उन्होंने आरोप लगाया कि टंकियां नहीं भर पा रहीं और टैंकर व्यवस्था भी कमजोर है। उन्होंने साफ कहा कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे रोज सुबह पुष्यमित्र भार्गव के घर जाकर बैठेंगे।
पार्षदों के बीच टकराव, कार्यकर्ताओं में भी आक्रोश
जल संकट को लेकर भाजपा के भीतर ही खींचतान बढ़ गई है। विधायक गोलू शुक्ला द्वारा बुलाई गई बैठक में पार्षदों के बीच तीखी बहस हो गई। पार्षद मृदुल अग्रवाल और रूपा पाण्डेय के वार्डों में एक ही वाल्व से पानी सप्लाई होने पर विवाद बढ़ गया।
दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर भेदभाव के आरोप लगाए और चेतावनी दी कि समस्या नहीं सुलझी तो धरना देंगे। इधर हालात इतने बिगड़ गए हैं कि निगम कर्मचारियों, वाल्वमैन और टैंकर चालकों पर हमले तक होने लगे हैं। कई जगह पानी नहीं मिलने पर टैंकरों पर पथराव की घटनाएं सामने आई हैं।
कांग्रेस भी मैदान में, सड़क पर उतरे पार्षद
विपक्ष ने भी इस मुद्दे को लेकर मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस पार्षद सोनिला मिमरोट ने क्षेत्र में पानी की सप्लाई शुरू कराने के लिए खुद हस्तक्षेप किया। वहीं पार्षद यशस्वी अमित पटेल धरने पर बैठ गईं। इससे पहले कांग्रेस द्वारा विभिन्न जोन कार्यालयों पर प्रदर्शन और मटके फोड़कर विरोध भी दर्ज कराया जा चुका है।
क्या कहता है प्रशासन
नगर निगम के अपर आयुक्त आशीष पाठक के मुताबिक, शहर को फिलहाल 337 एमएलडी पानी मिल रहा है और नर्मदा से सप्लाई नियमित है। असली समस्या भूजल स्रोतों के सूखने से पैदा हुई है। शहर की करीब 6500 सरकारी बोरिंग सूख चुकी हैं और लगभग 20 फीसदी इलाके ऐसे हैं जहां नर्मदा लाइन नहीं पहुंची है। इन क्षेत्रों में रोजाना करीब 650 टैंकरों के जरिए पानी सप्लाई किया जा रहा है।
महापौर ने कही ये बात
महापौर पुष्यमित्र भार्गव का कहना है कि इस साल बोरिंग समय से पहले सूख गए, जिससे संकट गहरा गया है। उन्होंने बताया कि टैंकरों की संख्या बढ़ाई गई है और टंकियों को ज्यादा भरने के निर्देश दिए गए हैं।
जलकर बढ़ा, फिर भी संकट बरकरार
गौरतलब है कि नगर निगम ने जुलाई 2024 में जलकर में 50 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी थी। 200 रुपए मासिक से बढ़ाकर 300 रुपए किया गया, बावजूद इसके शहर में एक दिन छोड़कर एक दिन पानी सप्लाई हो रही है। यानी महीने में औसतन 15 दिन ही पानी मिल रहा है।
इंदौर में नर्मदा का पानी करीब 70 किलोमीटर दूर से लिफ्ट कर लाया जाता है, जिस पर हर महीने 20 से 25 करोड़ रुपए तक बिजली खर्च होती है। इसके बावजूद मौजूदा हालात ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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