खुलासा फर्स्ट की खबर का असर: विधानसभा बजट सत्र में गूंजा नीमच के सरोवर होटल का मुद्दा
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संवाददाता

विधायक दिलीप सिंह परिहार ने घेरा, मंत्री विजयवर्गीय ने दिए दोषियों पर कार्रवाई के आदेश
खुलासा फर्स्ट, नीमच।
खुलासा फर्स्ट द्वारा जनहित में किए गए खुलासे पर मुहर लगाते हुए मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने भू-माफिया और अवैध शराब सिंडीकेट के विरुद्ध कड़ा रुख अपना लिया है। विधानसभा के वर्तमान बजट सत्र के दौरान नीमच के तरणताल क्षेत्र स्थित सरोवर होटल की बेशकीमती सरकारी भूमि पर हुए अवैध कब्जे और नियमों को ताक पर रखकर किए गए पट्टा हस्तांतरण का मामला गूंजा। इस गंभीर मुद्दे पर नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सदन में दो टूक शब्दों में दोषियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज करने और पट्टा निरस्त करने की घोषणा की है।
यह पूरा मामला नीमच विधायक दिलीप सिंह परिहार द्वारा विधानसभा में तारांकित प्रश्न के माध्यम से उठाए जाने के बाद चर्चा में आया। विधायक परिहार ने सदन को प्रमाणों के साथ अवगत कराया कि जिस भूमि को वर्ष 1986 में नगर सुधार न्यास द्वारा महज तीन वर्षों के लिए होटल संचालन के लिए आवंटित किया गया था, उसे वर्ष 2012 में तत्कालीन अधिकारियों की मिलीभगत से नियम विरुद्ध तरीके से दूसरे पक्ष को तीस वर्षों के लिए सौंप दिया गया। भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा यहीं नहीं रुकी, बल्कि होटल के उद्देश्य के लिए ली गई इस भूमि का उपयोग अवैध रूप से शराब दुकान संचालित करने के लिए किया जाने लगा।
विधायक परिहार ने सदन में इस पांच करोड़ रुपये की शासकीय भूमि के बंदरबांट का मुद्दा उठाते हुए तत्कालीन मुख्य नगरपालिका अधिकारी सहित अन्य दोषी अधिकारियों और पट्टाधारक के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि यह मोहन सरकार है, यहाँ माफियाओं को संरक्षण नहीं, बल्कि उनके अवैध साम्राज्य पर प्रहार किया जाता है।
सदन में सरकार का पक्ष रखते हुए कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने माना कि पट्टा आवंटन में प्रथम दृष्टया भारी अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार इस मामले में विधि सम्मत कार्रवाई करते हुए न केवल पट्टा निरस्त करेगी, बल्कि उन तमाम अधिकारियों को भी नहीं बख्शेगी जिन्होंने सरकारी संपत्ति को निजी लाभ के लिए खुर्द-बुर्द किया।
मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि प्रदेश में भू-माफिया और शराब माफिया के लिए कोई स्थान नहीं है और रसूखदारों का दौर अब समाप्त हो चुका है। विधानसभा में इस घोषणा के बाद नीमच जिला प्रशासन ने जांच की गति तेज कर दी है और पट्टा निरस्तीकरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है।
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