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आवासीय प्लॉटों पर होटल-होस्टलों का अवैध जाल: विधायक के तेवर के बाद जागा निगम

KHULASA FIRST

संवाददाता

16 मई 2026, 7:16 pm
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आवासीय प्लॉटों पर होटल-होस्टलों का अवैध जाल

महालक्ष्मी व चिकित्सक नगर में सिर्फ 3 और होटल सील कर अधिकारियों ने लूटी वाहवाही

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
रिहायशी इलाकों को अपनी नाक के नीचे व्यावसायिक अड्डों में तब्दील होते देखने वाले नगर निगम के भ्रष्ट तंत्र का खुलासा एक बार फिर हो गया है। महालक्ष्मी नगर और चिकित्सक नगर जैसे वीआईपी रिहायशी क्षेत्रों में नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाकर संचालित हो रहे अवैध होटलों पर निगम ने कल 3 और जगह ताला डालकर इतिश्री कर ली।

शहर के रसूखदारों और भू-माफियाओं के आगे घुटने टेकने वाले निगम प्रशासन ने वैसे तो इस पूरे क्षेत्र में महज 25 होटलों को नोटिस देने का दिखावा किया था, जिनमें से अब तक 19 को सील किया, जबकि 6 अब भी अधिकारियों की सरपरस्ती में धड़ल्ले से खुले हैं।

खास बात यह कि आवासीय प्लॉटों पर नियमों को ताक में रखकर बने अवैध होस्टलों के खिलाफ कोई भी कार्रवाई करने में निगम के आला अधिकारियों की कोई रुचि नहीं। इससे साफ जाहिर होता है कि इस पूरे अवैध खेल को निगम में बैठे अफसरों का खुला संरक्षण प्राप्त है।

पूरी कॉलोनी के अमन-चैन को बर्बाद कर चुके इस अवैध कारोबार के खिलाफ जब त्रस्त रहवासियों की आवाज जिम्मेदार अधिकारियों के कानों तक नहीं पहुंची, तब जाकर क्षेत्र के विधायक महेंद्र हार्डिया को इस मुद्दे को सीधे विधानसभा के पटल पर उठाना पड़ा।

सदन में विधायक के कड़े तेवरों और सरकार के रुख के बाद ही जोन-8 और 9 के पदों पर बैठे अधिकारियों की नींद टूटी। विधायक हार्डिया और स्थानीय पार्षद संगीता महेश जोशी ने आनन-फानन में निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल से मुलाकात कर उन्हें अवगत कराया।

कमिश्नर द्वारा पूरे शहर में ऐसी अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई करने के वादे के बाद निगम की टीम ने महालक्ष्मी नगर स्थित होटल न्यू आरके (35 ए), चिकित्सक नगर स्थित होटल एकोदिया (85) और होटल गोल्डन स्टाफ (121, चिकित्सक नगर) को सील कर दिया।

इसके पहले भी इसी इलाके के स्कीम-94 में 16 होटलों को सील कर निगम अपनी पीठ थपथपा चुका है, लेकिन यह पूरी कार्रवाई महज एक छलावा साबित हो रही है।

इस दिखावटी कार्रवाई पर खुद स्थानीय पार्षद जोशी ने निगम की नीयत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस कागजी कार्रवाई से रहवासियों को केवल तात्कालिक राहत मिली है, जबकि मुख्य और बड़ी कार्रवाई को अधिकारी जानबूझकर ठंडे बस्ते में डाल रहे हैं।

पार्षद जोशी ने सीधे आरोप लगाया कि रिहायशी इलाकों के बीचोबीच चल रही इन होटलों में खुलेआम अनैतिक और संदिग्ध काम होते हैं, जिसने पूरे क्षेत्र के सामाजिक और पारिवारिक वातावरण को खराब कर दिया है। इसके बावजूद निगम प्रशासन ने जिन अवैध होस्टलों को नोटिस थमाए थे, वे आज भी वैसे ही खड़े हैं।

रहवासियों का कहना है विधानसभा में मुद्दा गूंजने के बाद अधिकारियों ने आनन-फानन में 16 होटलों को सील कर 64 जगहों पर नोटिस थमाने का ड्रामा रचकर सिर्फ अपनी खाल बचाने और वाहवाही लूटने का काम किया है।

हकीकत यह है कि जहां जनता की सुरक्षा के लिए सबसे पहले ताला लगाया जाना अनिवार्य था, वहां तो निगम के अधिकारी पहुंचे तक नहीं, बल्कि सेटिंग के खेल में दूसरी जगहों पर आसान कार्रवाई निपटा दी गई।

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