सराफा बाजार में बन रहा अवैध बहुमंजिला मार्केट: भैरव मंदिर-थाना चौराहे पर रास्ता बंद, निगम की चुप्पी पर सवाल
खुलासा फर्स्ट, इंदौर । सराफा बाजार में विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे। चौपाटी और अवैध कारीगरों के बाद अब स्वर्ण बाजार क्षेत्र में अवैध निर्माण को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है नियमों को दरकिना
Khulasa First
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
सराफा बाजार में विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे। चौपाटी और अवैध कारीगरों के बाद अब स्वर्ण बाजार क्षेत्र में अवैध निर्माण को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है नियमों को दरकिनार कर बहुमंजिला व्यावसायिक इमारत का निर्माण किया जा रहा है, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सराफा बाजार क्षेत्र में अवैध निर्माण को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। भैरव मंदिर और थाने के ठीक सामने मुख्य चौराहे पर बहुमंजिला इमारत का निर्माण जारी है। रविवार को छत भरी गई, जिसके चलते शक्कर बाजार, बड़ा सराफा, बोहरा बाजार और शीतला बाजार कपड़ा मार्केट की ओर जाने वाले मार्ग बंद कर दिए गए।
छत भरने के लिए सीमेंट, रेत और गिट्टी का मिश्रण चौराहे के बीचोबीच तैयार किया गया, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। वहीं मोरसली गली में भी एक अन्य निर्माण के कारण रास्ता बंद रहा। इससे रहवासियों और बाजार आने-जाने वाले लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। लोगों का आरोप है सड़क और रास्ता बंद करने से पहले नगर निगम और पुलिस को सूचना नहीं दी गई थी। इससे प्रशासनिक लापरवाही पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
रहवासी बोले: कई शिकायतें नगर निगम में की जा चुकी हैं
सूत्रों के अनुसार, बड़े रावले वाले द्वारा यह जमीन पुजारी परिवार को दान में दी गई थी, जो वर्तमान में 44 बड़ा सराफा, जगदीश भवन के नाम से जानी जाती है। भूमि मूल रूप से पूजा-पाठ के उद्देश्य से थी, जिस पर पहले एक मार्केट बनाया गया था।
उसे तोड़कर नया बहुमंजिला व्यावसायिक मार्केट बनाया जा रहा है। लगभग 50 से अधिक दुकानें बनाई जा रही हैं, जिनका साइज अलग-अलग है। कीमत करीब तीन लाख रुपए प्रति वर्गफुट तक बताई जा रही है। रहवासियों का कहना है पूरा निर्माण अवैध है, जिसकी कई शिकायत नगर निगम में की जा चुकी है।
निगम ने निर्माण रुकवाया था, लेकिन कुछ ही दिनों में दोबारा काम शुरू कर दिया गया। यह जमीन अविनाश शास्त्री, आदित्य शास्त्री, अमित शास्त्री और उनके परिवार की बताई जा रही है, जिसका खसरा नंबर 663 है। आरोप है आसपास के पुराने मकानों को दबाव बनाकर खरीदा जा रहा है ताकि बड़े अवैध व्यावसायिक भवन का निर्माण किया जा सके।
निर्माणाधीन इमारत पूरी तरह व्यावसायिक बताई जा रही है, जहां एक-एक दुकान की कीमत करोड़ों तक पहुंच सकती है। राजमोहल्ला जोन-2 के बिल्डिंग ऑफिसर प्रशांत तिवारी से निर्माणाधीन व्यावसायिक बिल्डिंग की परमिशन के बारे में सवाल किया तो उन्होंने कहा कुछ दिन पहले बीओ का दायित्व संभाला है।
सराफा बाजार में उक्त की बिल्डिंग परमिशन की जानकारी नहीं है। बीआई को मौके पर भेजकर संपूर्ण जानकारी लेने के बाद ही बिल्डिंग निर्माण के संबंध में कुछ कह सकता हूं। रास्ता रोकने के सवाल पर कहा जानकारी लेकर कार्रवाई करेंगे।
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