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अवैध निर्माण कार्य धड़ल्ले से जारी सीएम हेल्पलाइन बेअसर साबित!: जोन-11 में 2400 वर्गफीट प्लॉट पर 7500 वर्गफीट निर्माण

KHULASA FIRST

संवाददाता

26 अप्रैल 2026, 7:46 pm
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अवैध निर्माण कार्य धड़ल्ले से जारी सीएम हेल्पलाइन बेअसर साबित!

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
सीएम हेल्पलाइन 181 के जरिए त्वरित न्याय का दावा किया जाता है, लेकिन एक मामला इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। नेहरू स्टेडियम स्थित जोन-11 में निगम अधिकारियों और स्थानीय नेताओं की कथित मिलीभगत से अवैध निर्माण बेखौफ जारी है, जबकि शिकायतों पर ‘कागजी कार्रवाई’ दिखाकर मामले को बंद किया जा रहा है।

सिस्टम से चल रहा अवैध निर्माण का खेल
उक्त मामले में भवन अधिकारियों और रसूखदारों की साठगांठ से अवैध निर्माण खुलेआम किए जाने का आरोप हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार न सिर्फ नियमों को ताक पर रखा जा रहा है, बल्कि राजस्व की भारी चोरी भी हो रही है। आरोप यह भी है अधिकारी रिश्वत लेकर नियमों की अनदेखी कर रहे हैं, जिससे नगर निगम को लाखों रुपए का राजस्व नुकसान हो रहा है।

चौथी मंजिल का भी चल रहा निर्माण
शीतल शाह द्वारा की गई शिकायत में कैलाश पार्क कॉलोनी, गीताभवन रोड स्थित भूखंड क्रमांक 2बी पर निर्माण को लेकर गंभीर अनियमितताओं का जिक्र है। इसके अनुसार 2400 वर्गफीट प्लॉट पर लगभग 7500 वर्गफीट निर्माण किया गया है, ग्राउंड फ्लोर+3 मंजिल के अलावा चौथी मंजिल का भी निर्माण चल रहा है, न तो पर्याप्त एमओएस (मार्जिन ओपन स्पेस) छोड़ा गया, न पार्किंग की व्यवस्था है, आसपास के मकानों के वेंटिलेशन पर खतरा बताया जा रहा है, शिकायतकर्ता ने निगम आयुक्त से जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है।

लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू पर भी उठे सवाल
सीएम हेल्पलाइन पोर्टल के अनुसार 18 अप्रैल 2026 को शिकायत का निराकरण कर बताया गया मौके का निरीक्षण कर निर्माण रुकवाया और संबंधित को सूचना पत्र जारी किया गया है। इसके आधार पर शिकायत को बंद कर दिया गया। हालांकि वास्तविक स्थिति अलग है और निर्माण गतिविधि पूरी तरह थमी नहीं हैं। ऐसे मामलों में बार-बार खुलासों के बावजूद लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू जैसी जांच एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है बड़े स्तर पर हो रहे भ्रष्टाचार के बावजूद ठोस कार्रवाई नजर नहीं आती।

जनता का भरोसा टूटने का खतरा...
लगातार अवैध निर्माण और शिकायतों के फर्जी निराकरण से नागरिकों में असंतोष बढ़ रहा है। सवाल यह है कि जब नियम तोड़कर निर्माण करना आसान हो और शिकायतें भी दबा दी जाएं, तो लोग वैध प्रक्रिया अपनाकर भारी शुल्क क्यों चुकाएं?

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