किले की शान पर अवैध गतिविधियों का दाग: दुकानें-गुमटियां, वसूली और जुआ-सट्टे के आरोप; विधानसभा से सरकारी पत्रों तक मामला, फिर भी कार्रवाई का इंतजार
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, ग्वालियर।
देश-दुनिया में अपनी ऐतिहासिक पहचान के लिए मशहूर ग्वालियर किला इन दिनों केवल इतिहास और पर्यटन का केंद्र नहीं, बल्कि कथित अवैध गतिविधियों और बदहाल व्यवस्थाओं को लेकर भी चर्चा में है। किले के आसपास और परिसर से जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर अवैध दुकानें और गुमटियां, बिजली के कथित अवैध इस्तेमाल, पार्किंग के नाम पर वसूली, गंदगी और कचरे के ढेर, शराबखोरी, जुआ-सट्टे तथा पर्यटकों से कथित दुर्व्यवहार और वसूली जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं।
मामले की गंभीरता इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि यह मुद्दा केवल स्थानीय शिकायतों तक सीमित नहीं रहा। विधानसभा में सवाल उठ चुका है, कलेक्टर की ओर से जवाब दिया जा चुका है, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की ओर से संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजे गए हैं और पर्यटन विभाग की ओर से भी कार्रवाई की मांग किए जाने की बात सामने आई है। इसके बावजूद शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जमीनी स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं हुआ है और कई कथित अवैध गतिविधियां अब भी जारी हैं।
विधानसभा में विधायक ने उठाया था किले का मामला
ग्वालियर किले की व्यवस्थाओं और कथित अवैध गतिविधियों का मामला विधानसभा तक पहुंच चुका है। विधायक हेमंत सत्यदेव कटारे ने विधानसभा में किले के परिसर में संचालित अवैध दुकानों और गतिविधियों को लेकर सवाल उठाया था।
विधानसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में कलेक्टर की ओर से किले परिसर में अवैध गतिविधियों और दुकानों के संचालित होने की बात सामने आने का दावा किया गया। इससे यह स्पष्ट हुआ कि किले से जुड़ी शिकायतें प्रशासन के संज्ञान में पहले से थीं।
विधानसभा में मामला उठने के बाद उम्मीद थी कि ऐतिहासिक धरोहर की सुरक्षा और परिसर में व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए संबंधित विभाग संयुक्त रूप से प्रभावी कार्रवाई करेंगे। हालांकि स्थानीय स्तर पर शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कार्रवाई की अपेक्षा के बावजूद स्थिति पूरी तरह नहीं बदली।
एएसआई के सरकारी पत्र में अवैध दुकानों और गुमटियों का जिक्र
किले से जुड़े मामले में सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, ग्वालियर उपमंडल की ओर से जारी पत्र भी शामिल है। उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार 28 अगस्त 2024 को जारी पत्र का विषय राष्ट्रीय संरक्षित स्मारक मान सिंह महल एवं सास-बहू मंदिर, ग्वालियर के निषिद्ध/विनियमित क्षेत्र में लगी अवैध दुकानों और गुमटियों को हटाने से संबंधित है।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि केंद्रीय संरक्षित स्मारक के निषिद्ध/विनियमित क्षेत्र में मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा संचालित फोर्ट व्यू कैफे के सामने कुछ व्यक्तियों द्वारा शासकीय भूमि पर कथित रूप से दुकानें और गुमटियां लगाई गई हैं। पत्र में यह भी बताया गया है कि इन जगहों पर चाय, नाश्ता, गुटखा, बीड़ी-सिगरेट आदि की बिक्री किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
एएसआई के पत्र में ऐसी गतिविधियों से स्मारक की छवि प्रभावित होने और पर्यटकों के सामने असुविधा पैदा होने की बात कही गई है। साथ ही पत्र में संबंधित नियमों का उल्लेख करते हुए इन दुकानों और गुमटियों को हटाने के लिए आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया गया।
पर्यटन विभाग ने भी कार्रवाई की मांग की
मामले में पर्यटन विभाग की ओर से भी कलेक्टर और नगर निगम को अवैध दुकानों और कथित अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पत्राचार किए जाने की बात सामने आई है। यदि कोई दुकान या गतिविधि नियमों के विपरीत है तो उसे हटाना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी बनती है।
चोरी की बिजली से दुकानें चलाने का भी आरोप
किले से जुड़ी शिकायतों में कुछ दुकानों और गुमटियों में बिजली के कथित अवैध इस्तेमाल का आरोप भी लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कुछ स्थानों पर बिजली के तारों और कनेक्शनों की स्थिति भी सवाल खड़े करती है।
यदि जांच में बिजली चोरी या अवैध कनेक्शन की पुष्टि होती है तो संबंधित विभाग को कार्रवाई करनी होगी। साथ ही यह भी देखना होगा कि संरक्षित स्मारक के आसपास इस तरह के अस्थायी कनेक्शन किसकी अनुमति से संचालित हो रहे हैं।
पार्किंग के नाम पर वसूली की शिकायतें
ग्वालियर किले में आने वाले पर्यटकों के सामने पार्किंग व्यवस्था भी एक बड़ा सवाल बनती रही है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि पार्किंग के नाम पर कुछ लोगों द्वारा कथित रूप से अवैध वसूली की जाती है।
पर्यटन स्थल पर पार्किंग शुल्क की स्पष्ट जानकारी, निर्धारित दर और रसीद की व्यवस्था होना जरूरी है। यदि पर्यटकों से मनमाने तरीके से शुल्क लिया जाता है तो इससे न केवल पर्यटकों में नाराजगी पैदा होती है, बल्कि शहर की पर्यटन छवि भी प्रभावित होती है।
गंदगी और कचरे के ढेर भी चिंता का विषय
किले और उसके आसपास के क्षेत्रों में गंदगी तथा कचरे के ढेर होने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। पर्यटक स्थल होने के कारण यहां साफ-सफाई और कचरा प्रबंधन की विशेष व्यवस्था जरूरी है।
शराबखोरी और जुआ-सट्टे के आरोप
किले परिसर और आसपास के कुछ हिस्सों में शराबखोरी तथा जुआ-सट्टे जैसी गतिविधियां संचालित होने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा असामाजिक तत्वों के जमावड़े की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।
यदि इन शिकायतों में तथ्य पाए जाते हैं तो यह केवल अव्यवस्था का मामला नहीं रहेगा, बल्कि कानून-व्यवस्था और पर्यटकों की सुरक्षा से भी जुड़ जाएगा। ऐसे में पुलिस और प्रशासन को संवेदनशील स्थानों पर नियमित निगरानी बढ़ाने की जरूरत है।
विदेशी पर्यटकों से दुर्व्यवहार और वसूली की शिकायतें
ग्वालियर किला देश के साथ-साथ विदेशी पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का बड़ा केंद्र है। ऐसे में विदेशी पर्यटकों से कथित मारपीट, दुर्व्यवहार या अवैध वसूली की शिकायतें बेहद गंभीर हैं।
सोशल मीडिया में भी उठता रहा मामला
किले की कथित अव्यवस्थाओं को लेकर समय-समय पर समाचार पत्रों में खबरें प्रकाशित होती रही हैं। सोशल मीडिया पर भी स्थानीय लोगों और पर्यटकों ने तस्वीरों और पोस्ट के माध्यम से सवाल उठाए हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि उन्होंने अलग-अलग जिम्मेदार विभागों और अधिकारियों को पत्र लिखे तथा शिकायतें दर्ज कराईं। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने का आरोप है।
अब सवाल कार्रवाई का, जिम्मेदारी किसकी?
ग्वालियर किले से जुड़ा मामला अब केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है। विधानसभा में सवाल उठ चुका है, कलेक्टर का जवाब सामने आ चुका है, एएसआई ने अवैध दुकानों और गुमटियों को लेकर सरकारी पत्र जारी किया, संबंधित अधिकारियों को प्रतियां भेजी गईं और पर्यटन विभाग की ओर से भी कार्रवाई की मांग की गई।
ग्वालियर किला शहर की ऐतिहासिक पहचान और देश की महत्वपूर्ण धरोहरों में शामिल है। ऐसे में उसकी शान पर किसी भी तरह की अवैध गतिविधि या अव्यवस्था का दाग लंबे समय तक नहीं रहना चाहिए। अब देखना यह है कि विधानसभा में मामला उठने, सरकारी पत्राचार होने और लगातार शिकायतों के बाद जिम्मेदार विभाग कब ठोस कार्रवाई करते हैं।
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