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आईएएस फार्महाउस जुआकांड: पुलिस पर हाईकोर्ट सख्त; आईएएस के बयान पर क्या कहा, किन आरोपों को बताया गंभीर

KHULASA FIRST

संवाददाता

27 अप्रैल 2026, 6:16 pm
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आईएएस फार्महाउस जुआकांड

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मानपुर स्थित एक महिला आईएएस के फार्महाउस पर पकड़े गए जुआकांड मामले में इंदौर हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने साफ तौर पर पूछा कि मामले की जांच के दौरान संबंधित आईएएस के बयान क्यों नहीं लिए गए। साथ ही, तत्कालीन थाना प्रभारी द्वारा लगाए गए दबाव के आरोपों को भी अदालत ने गंभीर माना है।

क्या है पूरा मामला?
10-11 मार्च की दरमियानी रात मानपुर क्षेत्र में एक महिला आईएएस के फार्महाउस पर पुलिस ने जुआ पकड़ा था। इस कार्रवाई के अगले ही दिन TI लोकेंद्र सिंह हिहोरे सहित अन्य पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया। इसके बाद TI ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए निलंबन और विभागीय कार्रवाई को चुनौती दी।

हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणियां
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने करीब दो घंटे तक मामले की विस्तार से पड़ताल की और कई अहम सवाल उठाए। अदालत ने पूछा कि जब शुरुआती जांच की गई, तो आईएएस के बयान क्यों नहीं लिए गए? मौके के सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों का क्या हुआ?

इस पर भी हैरानी
शासन की ओर से जब यह कहा गया कि फार्महाउस पर सीसीटीवी नहीं थे, तो कोर्ट ने इस पर भी हैरानी जताई और टिप्पणी की कि आज के समय में छोटे घरों में भी सीसीटीवी लगे होते हैं, ऐसे में एक वरिष्ठ अधिकारी के फार्महाउस पर उनका न होना सवाल खड़े करता है।

टीआई के आरोपों ने बढ़ाई गंभीरता
याचिकाकर्ता टीआई लोकेंद्र सिंह हिहोरे ने आरोप लगाया है कि जुआकांड पकड़ने के बाद उन पर दबाव बनाया गया कि आईएएस का नाम सामने न आए और एफआईआर में घटना स्थल बदल दिया जाए। उन्होंने जब ऐसा करने से इनकार किया, तो उसी दिन उन्हें निलंबित कर दिया गया।

आरोपों को माना गंभीर
हाईकोर्ट ने इन आरोपों को बेहद गंभीर मानते हुए कहा कि शासन की ओर से इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि ऐसे आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह पूरी जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है।

अन्य मामलों से तुलना पर भी सवाल
सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी उठा कि 15 मार्च को सिमरोल क्षेत्र में भी जुआ पकड़ा गया था, लेकिन वहां के थाना प्रभारी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस पर कोर्ट ने पूछा कि यदि कार्रवाई के पीछे कोई सिद्धांत या आदेश था, तो वह सभी पर समान रूप से लागू क्यों नहीं हुआ?

“क्या संदेश देना चाहते हैं अधिकारी?”
हाईकोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि कोई पुलिस अधिकारी सूचना मिलने पर कार्रवाई करता है और उसे ही सस्पेंड कर दिया जाता है, तो इससे गलत संदेश जाता है। इससे पुलिसकर्मी भविष्य में कार्रवाई करने से हिचक सकते हैं।

दो याचिकाओं पर सुनवाई जारी
टीआई हिहोरे ने इस मामले में दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं। एक निलंबन के खिलाफ और दूसरी विभागीय जांच में जारी चार्जशीट को चुनौती देने के लिए। फिलहाल निलंबन से जुड़े मामले पर सुनवाई जारी है, जबकि चार्जशीट के मुद्दे पर आगे सुनवाई होना बाकी है।


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