युवती की लाज बचाई तो मैं दुश्मन बन गया: गंभीर आरोप...पुलिस ने मुझ पर ही ठोंक दिया केस
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
सिमरोल थाना क्षेत्र में एक डेयरी संचालक ने गांव के भाभर परिवार और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उसका दावा है कि उसने नवंबर 2025 में एक युवती को कथित बदसलूकी से बचाया था, तभी से आरोपी परिवार उससे रंजिश रखने लगा।
अब आगजनी, धमकी और मारपीट के मामले में कार्रवाई करने के बजाय पुलिस ने उलटा उसके व उसके परिवार पर केस दर्ज कर दिया। पीड़ित ने कल परिवार के साथ आला अफसरों से मिलकर शिकायत करने की बात कही है।
पीड़ित उदित पटेल पिता राजेश निवासी बेरछा के मुताबिक 25 नवंबर 2025 की रात वह दोपहिया वाहन से अपने फार्म से इंदौर जा रहा था, तभी एक ऑटो रिक्शा उसके पास आया। ऑटो चालक सहित उसमें बैठी युवती घबराई हुई थी।
युवती ने रोते हुए मदद मांगी। इसी दौरान बेरछा गांव के बंटी चौहान, श्याम भाभर, अर्पित भाभर और शेखर भाभर वहां आ गए। उदित का कहना है मूसाखेड़ी की युवती कहीं से इंदौर लौट रही थी। इस दौरान उसने लघुशंका के लिए ऑटो तिंछा गांव से लगे जंगल के पास अंधेरे में रुकवाया।
तभी उक्त आरोपियों ने उसे घेर लिया और गलत आरोप लगाते हुए छेड़छाड़ करने लगे। उदित का दावा है कि आरोपी हाल ही बड़गोंदा क्षेत्र में गैंगरेप जैसी वारदात करना चाहते थे, लेकिन उसने बीच-बचाव कर युवती को वहां से रवाना करा दिया था।
आए दिन धमकी, फिर डेयरी पाइप लाइन में लगा दी आग- उदित पटेल का आरोप है कि उक्त घटना के बाद से भाभर परिवार उससे रंजिश रखने लगा। लगातार धमकियां दी जाने लगीं।
10 मई को आरोपियों ने उसकी डेयरी की पाइप लाइन में आग लगा दी। अर्पित और शेखर भाभर ने गालियां देते हुए उसे ललकारा। इस पर उसने एक युवक को थप्पड़ मार दिया, जिसका वीडियो बनाकर वायरल कर दिया गया।
पुलिस ने दबाव में हमारे खिलाफ की कार्रवाई- पीड़ित उदित पटेल ने आरोप लगाया कि सिमरोल पुलिस ने उसके द्वारा आगजनी की शिकायत किए जाने के बावजूद बजाय आरोपियों के, उसी के खिलाफ मारपीट और एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया।
उसका कहना है कि भाभर परिवार ने समाज के लोगों को उकसाकर थाना परिसर का घेराव कर दबाव बनाकर उसके परिवार समेत गांव के सरपंच सहित उनके परिवार के लोगों के नाम की भी शिकायत की।
उदित ने दावा किया कि उसके पिता, गांव के सरपंच हरनामसिंह पटेल, अजय पटेल, अमन पटेल, अंकित पटेल, मुकेश पटेल, मुकुल पटेल और राजेश पटेल घटनास्थल पर थे ही नहीं, फिर भी उन पर गंभीर आरोप लगा दिए गए।
उधार लिए 1.75 लाख रुपए लौटाने से बचने रची कहानी!- उदित का कहना है उसके पिता ने 17 साल पहले अर्पित के बड़े भाई पप्पू भाभर को 1.25 लाख उधार दिए थे। इसके बाद 13 साल पहले 50 हजार रुपए और दिए थे।
इस तरह 1.75 लाख रुपए पप्पू से लेना हैं। इसी विवाद को छिपाने के लिए आरोपी पक्ष ने पुलिस को गुमराह कर केवल 96 हजार के लेनदेन का दर्शाया गया। 11 मई की रात उसके पिता को भाभर परिवार के 10-12 लोगों ने रास्ते में रोककर धमकाया। जब वे शिकायत करने थाने पहुंचे तो पुलिस ने अदम चेक काटकर चलता कर दिया। सिमरोल पुलिस के दोहरे रवैये के खिलाफ अधिकारियों से शिकायत कर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग करेंगे।
युवकों की मंशा समझते ही युवती ने रिकॉर्ड कर ली थी बातें
पहला युवक- ऐ, दरवाजा खोल।
दूसरा- अरे, ये तो कंवारी है, कंवारी है।
युवती- काईके लिए खोलें। क्या है?
तीसरा- हम कुछ गलत बोल रहे हैं क्या?
युवती- नहीं भैया, नहीं भैया, आपने कुछ गलत नहीं बोला।
पहला- आप बताइए ना क्या हुआ? मैंने कोई गलत बोला क्या?
युवती- अरे, हुआ क्या भैया, क्या हुआ, आप बोलो ना?
दूसरा- हमने कुछ गलत नहीं बोला है।
युवती- भैया, जाने दीजिए। भैया जाने दो, मैको सुबह ऑफिस जाना है।
पहला- सर्विस वाले हो क्या?
युवती- हां, सर्विस वाले हैं, फैक्ट्री में काम करते हैं।
दूसरा- कौन-सी सर्विस?
पहला- अरे, मुझे बात करने दो।
युवती- भैया, भैया प्लीज! हमको जाने दीजिए।
पहला- दो मिनट, मैं कोई गलत नहीं बोल रहा हूं तुमको। बताओ, सर्विस वाले हो क्या?
युवती- हां भैया।
तीसरा- अरे, ‘वो’ सर्विस वाले हो क्या?
युवती- अरे भैया नहीं, राम-राम भैया, कैसी बात कर रहे हो। पागल हो क्या आप, नौकरी करती हूं।
पहला- अगर ‘वो’ सर्विस वाले हो तो कोई दिक्कत नहीं। अच्छा जाओ।
युवती ड्राइवर से- चलो भैया। अरे, ये जो आगे बुलट पर जो भैया (उदित पटेल) जा रहे हैं, उनके पास ले चलो। भैया-भैया, सुनो ना, हमारे साथ-साथ चलो। भैया प्लीज! चलो ना भैया, प्लीज! (रोते हुए बोली)। तभी पीछे से वापस कुछ युवक आ गए।
पहला- ऐ शुभम, तू गाड़ी रुकवा रे। (गाड़ी रुकवाते ही)
दूसरा- अरे, रोओ मत, हमने आपको गलत बोला क्या?
युवती- भैया, जाने दो, मेरी पूरी फैमिली है।
उदित- क्या बात है भाई। क्यों परेशान कर रहे हो?
उदित- आपको यहां गाड़ी रोकना ही नहीं थी।
तीसरा- (युवती से) रोओ मत, ये भैया (उदित) हमको गलत समझेंगे। हमारा यहां रात-दिन का आना-जाना है। अरे भैया, गलत मत बोलना।
दूसरा- भैया हमको गलत समझ रहे हैं। इस बीच युवती लगातार रोती रही।
उदित- (युवती से) अरे, चुप हो जाओ, कुछ नहीं होगा। मैं हूं ना। अब चले गए वो लोग।
युवती- (रोते हुए) ये लोगबाग कितनी नीची सोच के हैं ना भैया। आप नहीं आते तो पता नहीं ये लोग क्या गलत करते मेरे साथ। इनके इरादे ठीक नहीं थे।
उदित- अब मत रोओ। मेरे साथ चलो, यहां से निकलो। (रास्ते में उदित)- मेरी दिलेरी थी, मैं तुम्हारे साथ यहां तक आ गया। अब तुम्हें कुछ नहीं होगा। लगता है वो हमारा पीछा कर रहे हैं अभी भी। अब बिना डर के आगे निकल जाओ।
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