होली आई रे कन्हाई: सबके जीवन में खुशियों के रंग लेकर आया रंग-रंगीला होली का त्योहार
KHULASA FIRST
संवाददाता

जगह-जगह होंगे होलिका दहन के आयोजन, सुबह से सजने लगी होलिका
सबसे पहले होलकरयुगीन ‘सरकारी होली’ का राजवाड़ा चौक पर होगा दहन, फिर शहरभर में जलेगी होली
मल्हारगंज-छावनी से निकलेगा रंगारंग बाना, जगह-जगह सजेंगी हंसी-ठिठोली की महफिलें
फिजा में घुल गए फाल्गुनी रंग, कल धुलेंडी पर उड़ेंगे रंग, फिर रंगारंग गेर की बारी
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
आज न छोड़ेंगे... खेलेंगे होली के शोर के संग होली आई रे कन्हाई। रंग बरसेंगे। उड़ेंगे रंग-गुलाल। तन-मन तरबतर होंगे। ऐसी रंगना रंगीले मेरी चुनरिया कि रंग जीवनभर न धुले। चाहे भीगे मेरी चुनरिया, चाहे भीगे चोली... लेकिन खेलना न भूलना होली। रंगीला रंगीला मौसम जो आ गया है, रंग-रंगीले पर्व के संग।
बस तो फिर क्या, हर गाल गुलाबी होना है। हर भाल पर गुलाल लगना है। कोमल कपोल भी रंगना है और देह भी तरबतर होना है। होलिका का पूजन भी होना है और होलिका का ‘प्रदीपन’ भी होना है। गोधूलि बेला के छाते ही चौक-चौबारों, गली-मोहल्लों, बस्ती-कॉलोनियों में सजी-संवरी मातृशक्तियां होली का पूजन करेंगी। पूजन का थाल लिए मातृशक्ति का घर से होलिका तक सफर देखने लायक होगा। बाल-गोपालों के कुर्राटे भी पिचकारी-गुब्बारों संग गूंजने लगे हैं। होली जो आ गई है।
सृष्टि के सबसे सुंदर पर्व का वंदन...अभिनंदन! ऐसा पर्व, जिसमें सिर्फ रंग हैं। रंगों की उमंग है, तरंग है। सामाजिक ताना-बाना है। सांस्कृतिक एकता व समरसता का प्रतीक है ये पर्व। मन के नैराश्य और देह के आलस्य के नाश का है ये रंग पर्व। रंगोत्सव के साथ ये रंग अब बस, बरसने वाले ही हैं।
नीला, पीला, हरा, गुलाबी, कच्चा-पक्का रंग... सब के सब रंग फिजाओं में घुल गए हैं। ये सब रंग आपके मन-आंगन, हृदय-आंगन में भी आ गए हैं। कल घर-आंगन में बिखर जाएंगे। दरो-दहलीज पर चिपक जाएंगे। ओटले-अटारी पर विराज जाएंगे। चौक-चौबारों पर छा जाएंगे।
तन तो रंगों से सराबोर होगा ही, मन भी रंगीन हो जाएगा। सबके जीवन में खुशियों के इन रंगों के साथ होली का त्योहार जो आ गया है। रंग-रंगीला पर्व, जिसमें न कोई छोटा, न बड़ा। न अमीर, न गरीब। न शोषित, न वंचित। सब रंगों से सिंचित। एक जैसे रंगों में सब समरस। अहिल्या नगरी की फिजा में फाल्गुनी रंगों की खुमारी भी छा गई है। होली आ गई।
संध्याकाल होते ही माहौल पूरी तरह होलीमय हो जाएगा। जगह-जगह होलिका दहन के आयोजन होंगे। सुंदर साज-सज्जा के संग होलिका दहन स्थल सजाए जाएंगे। होलिका को माता का स्वरूप देकर सजाया जाएगा। डांडा, भक्त प्रह्लाद के रूप में शान से खड़ा होगा और उसके इर्द-गिर्द होलिका सजेगी।
कहीं कंडों के रूप में आकार लेगी तो कहीं लकड़ी के ढेर के रूप में सामने आएगी। इस बार ‘गो-काष्ठ' का शोर मचा है। मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने गो-काष्ठ से होली जलाने वालों के लिए इनाम भी रखा है। होलिका की चंवरी फेरों की साज-सज्जा के संग उन्हें चुनरी भी धारण करवाई जाएगी। हार, फूल, मालाओं से सजाया जाएगा और फिर शुभ मुहूर्त में होगा होलिका दहन।
शुरुआत शहर की आन-बान-शान राजवाड़ा से होगी। यहां होलकरयुगीन होलिका का सबसे पहले दहन होगा। ये "सरकारी होली’ दिन ढलते ही, यानी गोधूलि बेला के समय प्रज्ज्वलित होगी। उसके बाद शहरभर में होलिका दहन होगा। होलकरयुगीन होली की परंपरा मुहूर्त के फेर से दूर रही है।
लिहाजा यहां शाम 7.15 बजे होलिका दहन होगा। ग्रहण के कारण होलिका दहन प्रदोषकाल में, यानी शाम 6.30 से 8.54 तक हो सकता है। ये समय मुहूर्त के हिसाब से दहन करने वालों के लिए है। शेष अधिकांश जगह परंपरा के तहत रात्रि 11.30 बजे पश्चात होलिका दहन होगा।
मल्हारगंज-छावनी में आज शाम निकलेगा रंगारंग बाना... आज शाम जहां एक तरफ होली का त्योहार चरम पर होगा, वहीं पुराने इंदौर के उत्सवप्रिय इलाके मल्हारगंज व शहर के पूर्वी हिस्से की पुरानी बसाहट छावनी क्षेत्र से रंगारंग बाना भी निकलेगा। ये बाना बरसों से निकलता है।
सैकड़ों क्विंटल रंग-गुलाल उड़ाता संस्था मातृभूमि व भाजपा नेता जयदीप जैन का ये रंगारंग बाना मल्हारगंज की गलियों से शुरू होकर गोपाल निवास चौराहा से टोरी कॉर्नर, गौराकुंड होते हुए राजवाड़ा तक आएगा। उधर, छावनी का बाना पारसी मोहल्ला, संयोगितागंज की गलियों में घूमता हुआ जीपीओ कॉर्नर आएगा। बाने में फिल्म व क्रिकेट जगत की हस्तियों के स्वांग के संग जूनियर कलाकर तो होंगे ही, रंग बरसाती झांकियां भी रहेंगी। माहौल मस्ती व हंसी-ठिठोली का होगा।
कल निकलेगी सामाजिक गेर... मंगलवार को को रंग खेले जाएंगे। धुलेंडी की अहमियत सबसे ज्यादा सामाजिक ताने-बाने से जुड़ी हुई है। विभिन्न समाज की सामूहिक गेरें निकलेंगी। ये गेरें समाज के हर उस घर जाएंगी, जहां इस बरस गमी हुई है। अपने प्रियजन, परिजन को खोने के बाद बेरंग हुई जिंदगी में ये सामाजिक गेर रंग लेकर पहुंचती है और गमजदा जीवन में फिर से रंग घोल देती हैं।
सुबह से शहर के हर हिस्से में ये सामाजिक गेरें नजर आएंगी। अब शहर में धुलेंडी पर वैसी होली की धूम नहीं मचती, जैसी कभी हुआ करती थी। अब रंगों की धींगामस्ती का ये सारा जोर रंगपंचमी के हवाले हो गया है।
"रंगों का यह त्योहार आपके जीवन को मंगलमय-प्रभुमय करे। जीवन हर्ष व उल्लास के इंद्रधनुषी रंग से सराबोर हो...। होली की हार्दिक शुभकामनाएं!
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