मेन रोड पर बिना अनुमति पंडाल लगाने पर हाईकोर्ट सख्त: डीसीपी को किया तलब; अदालत ने पूछा- जब मंजूरी नहीं ली तो सड़क कैसे ब्लॉक हुई?
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
गांधीनगर की मेन रोड पर पंडाल लगाकर रास्ता रोकने के मामले में इंदौर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। रहवासी आशीष जैन की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने पूछा कि जब पंडाल लगाने की अनुमति नहीं ली गई, तो सड़क कैसे ब्लॉक हो गई?
मामले में जवाब देने के लिए डीसीपी नरेंद्र सिंह रावत को अदालत में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। दो दिन तक सुनवाई के बाद अब यह मामला गुरुवार को लगातार तीसरे दिन भी सूचीबद्ध किया गया है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि गांधीनगर की मुख्य सड़क पर बिना अनुमति पंडाल लगाया गया है। इससे क्षेत्र के हजारों लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता चर्चित शास्त्री ने अदालत में अपनी दलीलें रखने के साथ मौके की तस्वीरें भी पेश कीं।
हाईकोर्ट ने पूछा- किसकी अनुमति से लगा पंडाल?
मामले की सुनवाई जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की खंडपीठ में हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने शासन से पूछा कि पंडाल लगाने के लिए अनुमति ली गई थी या नहीं। क्या किसी सक्षम प्राधिकारी ने इसकी मंजूरी दी थी?
अगली सुनवाई में शासन की ओर से बताया गया कि पंडाल लगाने के लिए किसी से अनुमति नहीं ली गई थी। इस पर अदालत ने सवाल उठाया कि जब मंजूरी नहीं ली गई, तो पंडाल कैसे लगाया गया और मुख्य सड़क कैसे ब्लॉक हो गई। इसके बाद अदालत ने मामले में जवाब के लिए डीसीपी नरेंद्र सिंह रावत को तलब किया।
50 फीट लंबा पंडाल, हजारों परिवारों को परेशानी का दावा
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि सड़क पर करीब 50 बाय 8 फीट का पंडाल लगाया गया है।
अधिवक्ता चर्चित शास्त्री ने दावा किया कि इससे हजारों परिवारों को रोजाना आवागमन में परेशानी हो रही है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि पंडाल लगाने की अनुमति नहीं ली गई, तो उसे हटाने के लिए कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
याचिकाकर्ता की सहमति पर भी उठे सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता आशीष जैन ने पंडाल लगाने पर सहमति दी थी। इस पर उनके अधिवक्ता चर्चित शास्त्री ने आपत्ति जताते हुए सवाल किया कि क्या किसी व्यक्ति की सहमति से बिना अनुमति लगाए गए पंडाल को वैध माना जा सकता है।
याचिकाकर्ता की ओर से सड़क पर पंडाल लगाने की अनुमति और उससे आम लोगों को हो रही परेशानी का मुद्दा उठाया गया। अब अदालत में होने वाली अगली सुनवाई में इस मामले पर शासन और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने की उम्मीद है।
शहर की यातायात व्यवस्था पर पहले भी जताई जा चुकी नाराजगी
इंदौर में यातायात की बदहाल स्थिति को लेकर हाईकोर्ट पहले भी शासन, प्रशासन और पुलिस से सवाल कर चुका है। पिछली सुनवाई में अदालत ने टिप्पणी की थी कि अधिकारियों को छोड़कर बाकी सभी को शहर की खराब यातायात व्यवस्था दिखाई दे रही है।
सुनवाई में बताया गया था कि शहर के 92 ट्रैफिक सिग्नलों में से केवल 28 इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम से जुड़े हैं।
वहीं, स्वीकृत 881 यातायात पुलिसकर्मियों के पदों के मुकाबले 660 पुलिसकर्मी कार्यरत हैं और 221 पद खाली हैं। नगर निगम के शिकायत संबंधी ऐप पर भी शिकायतों के समाधान को लेकर सवाल उठाए गए थे।
गांधीनगर मेन रोड पर पंडाल लगाने का मामला भी अब इसी व्यापक यातायात समस्या और सार्वजनिक सड़क के उपयोग से जुड़े सवालों के बीच हाईकोर्ट के सामने है।
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