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मानपुर जुआ कांड में हाई कोर्ट सेे टीआई का सस्पेंशन निरस्त: याचिका पर सुनवाई के दौरान उठे सवाल

KHULASA FIRST

संवाददाता

08 मई 2026, 6:06 pm
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मानपुर जुआ कांड में हाई कोर्ट सेे टीआई का सस्पेंशन निरस्त

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मानपुर के चर्चित फार्महाउस जुआकांड में बड़ा मोड़ आ गया है। हाईकोर्ट ने मानपुर थाना प्रभारी लोकेंद्र सिंह हिहोरे का सस्पेंशन आदेश रद्द करते हुए पुलिस विभाग की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि पूरा मामला मनमाना, दिखावटी और प्रतिशोधात्मक नजर आता है। करीब दो महीने पहले महिला आईएएस अधिकारी वंदना वैद्य के फार्महाउस पर जुए की कार्रवाई के बाद टीआई हिहोरे को सस्पेंड किया गया था।

अब हाईकोर्ट ने कहा है कि उपलब्ध रिकॉर्ड और घटनाक्रम बताते हैं कि कार्रवाई निष्पक्ष नहीं थी। टीआई लोकेंद्र सिंह हिहोरे ने कोर्ट में दायर याचिका में दावा किया था कि जुआ कार्रवाई के बाद उन पर एफआईआर से महिला आईएएस अधिकारी का नाम हटाने और घटनास्थल बदलने का दबाव बनाया गया।

जब उन्होंने ऐसा करने से इनकार किया और मूल तथ्यों के आधार पर एफआईआर दर्ज की, तो उसी दिन उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि याचिकाकर्ता के इन गंभीर आरोपों का सरकार या पुलिस अधिकारियों की ओर से स्पष्ट खंडन तक नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा कि पूरे मामले में प्रतिवादियों की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।

सिमरोल जुआकांड का भी जिक्र
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सिमरोल थाना क्षेत्र में पकड़े गए एक अन्य जुआ प्रकरण का भी उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि वहां इसी तरह की कार्रवाई के बावजूद थाना प्रभारी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अदालत ने इसे ‘पिक एंड चूज’ नीति करार देते हुए कहा कि कानून सबके लिए समान होना चाहिए।

ट्रांसफर को भी माना दबाव का हिस्सा
कोर्ट ने यह भी माना कि जब टीआई हिहोरे ने सस्पेंशन के खिलाफ याचिका दायर की, उसके बाद उनका तबादला कर बुरहानपुर अटैच कर दिया गया। अदालत ने इसे भी पूरे घटनाक्रम की कड़ी माना।

अंत में हाईकोर्ट ने 11 मार्च को जारी सस्पेंशन आदेश और उससे जुड़ी सभी कार्रवाई निरस्त कर दी। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि शासन चाहे तो कानून के अनुसार आगे उचित कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र रहेगा।

अगर कार्रवाई करने वाला ही सस्पेंड होगा, तो भविष्य में कोई भी कार्रवाई से डरेगा
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कई तीखे सवाल भी उठाए थे। अदालत ने पूछा था कि जब फार्महाउस पर कार्रवाई हुई, तो महिला आईएएस अधिकारी के बयान क्यों नहीं लिए गए? फार्महाउस पर सीसीटीवी कैमरे क्यों नहीं थे?

कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि यदि ड्यूटी कर रहे पुलिस अधिकारी को ही कार्रवाई के बाद सस्पेंड कर दिया जाएगा, तो भविष्य में कोई भी निष्पक्ष कार्रवाई करने से बचेगा।

यह था पूरा मामला
10-11 मार्च की रात मानपुर क्षेत्र स्थित एक फार्महाउस पर पुलिस ने दबिश देकर बड़े जुआ अड्डे का खुलासा किया था। कार्रवाई में 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। मौके से करीब 13.67 लाख रुपए नकद समेत कुल 28 लाख रुपए से अधिक का सामान जब्त किया गया था।

बाद में सामने आया कि फार्महाउस महिला आईएएस अधिकारी वंदना वैद्य के नाम पर दर्ज है। कार्रवाई के बाद मानपुर टीआई लोकेंद्र सिंह हिहोरे, एसआई मिथुन ओसारी और एएसआई रेशम गिरवाल को सस्पेंड किया गया था। बाद में दो पुलिसकर्मियों की बहाली हो गई।

यह कार्रवाई प्रतिशोधात्मक लगती: हाई कोर्ट जारी आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि घटनाक्रम से स्पष्ट है कि कार्रवाई उच्च स्तर के निर्देशों का पालन नहीं करने के कारण की गई प्रतीत होती है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस विभाग द्वारा पेश जांच में कोई स्वतंत्र गवाह नहीं था और पुराने मामलों का हवाला देकर कार्रवाई को सही ठहराने की कोशिश की गई।

कोर्ट ने माना कि टीआई ने गश्त के दौरान मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई की थी और जुआ पकड़ने की कार्रवाई अपराध रोकने की श्रेणी में आती है।

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