विधायक के दलबदल मामले में हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित: सदस्यता रद्द करने की मांग पर हुई सुनवाई; किस बात पर उठाए अदालत ने सवाल
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, जबलपुर।
मध्य प्रदेश की राजनीति में चर्चित कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे के कथित दलबदल मामले में गुरुवार को जबलपुर स्थित मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। बीना से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग को लेकर दायर याचिका पर सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
यह याचिका नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता उमंग सिंघार द्वारा दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद निर्मला सप्रे ने भाजपा का साथ दिया, जो दल-बदल विरोधी कानून के दायरे में आता है। इसलिए उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त की जानी चाहिए।
दो साल से अधिक समय से लंबित है मामला
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने एक बार फिर इस बात पर चिंता जताई कि दलबदल से जुड़े मामलों में निर्णय के लिए 90 दिन की समय-सीमा निर्धारित होने के बावजूद इस प्रकरण में 720 दिनों से अधिक का समय बीत चुका है। अदालत ने पूर्व सुनवाई में भी इस देरी पर सवाल उठाए थे।
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कोर्ट को बताया कि विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष मामला विचाराधीन है और प्रस्तुत साक्ष्यों की जांच तथा सुनवाई की प्रक्रिया जारी है। इसलिए स्पीकर स्तर पर प्रक्रिया पूरी होने तक मामले में निर्णय लंबित है।
निर्मला सप्रे ने कहा था- मैं अब भी कांग्रेस में हूं
पिछली सुनवाई के दौरान विधायक निर्मला सप्रे ने हाईकोर्ट के समक्ष स्पष्ट रूप से कहा था कि वह अभी भी कांग्रेस की सदस्य हैं और उन्होंने औपचारिक रूप से भाजपा की सदस्यता ग्रहण नहीं की है। अदालत ने उनके इस बयान को रिकॉर्ड पर लिया था। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता उमंग सिंघार से यह साबित करने के लिए साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा था कि निर्मला सप्रे ने वास्तव में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली है या नहीं।
लोकसभा चुनाव के दौरान बढ़ा था विवाद
दरअसल, वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में निर्मला सप्रे ने सागर जिले की बीना सीट से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल की थी। लेकिन लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान 5 मई को वह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ भाजपा के एक कार्यक्रम में दिखाई दी थीं। उनकी इस उपस्थिति के बाद राजनीतिक गलियारों में उनके भाजपा में शामिल होने की चर्चाएं तेज हो गई थीं। कांग्रेस ने इसे दल-बदल का मामला बताते हुए कार्रवाई की मांग शुरू कर दी थी।
उमंग सिंघार ने स्पीकर से की थी शिकायत
मामले को लेकर 5 जुलाई 2024 को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष याचिका प्रस्तुत की थी। याचिका में संविधान की दसवीं अनुसूची यानी दल-बदल विरोधी कानून का हवाला देते हुए कहा गया था कि यदि कोई विधायक अपनी मूल पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी का समर्थन करता है या उसमें शामिल होता है, तो उसकी सदस्यता समाप्त की जा सकती है। हालांकि विधानसभा अध्यक्ष स्तर पर लंबे समय तक कोई अंतिम निर्णय नहीं होने के कारण उमंग सिंघार ने नवंबर 2024 में हाईकोर्ट की शरण ली थी।
फैसले पर टिकी राजनीतिक नजरें
निर्मला सप्रे मामले को प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण कानूनी और राजनीतिक प्रकरण माना जा रहा है। यदि हाईकोर्ट कोई महत्वपूर्ण निर्देश जारी करता है या सदस्यता को लेकर फैसला देता है, तो इसका असर भविष्य में अन्य दलबदल मामलों पर भी पड़ सकता है।
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