क्या आपने कभी बच्चों का स्कूल बैग चेक किया: छुपा नया नशा; क्लासरूम से गली के कॉर्नर तक धुएं के छल्ले उड़ाते प्रतिष्ठित स्कूलों के छात्र-छात्राएं
KHULASA FIRST
संवाददाता

मुकेश मुवाल 98934-39951 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर में छात्र जीवन अब किताबों से ज्यादा धुएं के छल्लों में उलझ रहा है। ई-सिगरेट का खतरनाक ट्रेंड स्कूलों तक पहुंच चुका है, जहां बच्चे इसे स्टाइल और मजे के नाम पर अपना रहे हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि प्रतिष्ठित स्कूलों में भी बैग चेकिंग जैसी निगरानी तक नहीं हो रही, जिससे यह नया नशा बेखौफ बच्चों के बीच फैल रहा है।
साथ ही सूखे नशे का जहर चोरी-छिपे बिक रहा है व बच्चे इसके आदी हो रहे हैं। माता-पिता भी बच्चों के व्यवहार परिवर्तन सेे बेखबर हैं। सोशल मीडिया पर कुछ लोग स्कूली बच्चों में बढ़ते ई-सिगरेट के चलन को लेकर चिंतित हैं। उनके सवाल उठाने पर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
इसके मुताबिक कई पान की दुकानों, एव्हरफ्रेश व कर्णावत जैसे ब्रांड की दुकानों पर ई-सिगरेट मिल रही है। बच्चे इसे उसी सहजता से इस्तेमाल कर रहे हैं, जैसे पुराने समय में स्कूली बच्चों द्वारा कोल्ड ड्रिंक पी जाती थी। सबसे खतरनाक बात यह है कि इससे मुंह से बदबू नहीं आती, जिससे बच्चों में इसकी लत गहराती जाती है।
ऐसा नहीं है कि बच्चे सिर्फ सिगरेट तक ही सीमित है। ये आजकल सूखा नशा जिनमें गांजा, एमडी, ब्राउन शुगर और कोकिन तक ले रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता इस बात पर जताई जा रही है कि ये नशा आर्डर पर भी चोरी छिपे उपलब्ध हो रहा है।
दिनचर्या पर पड़ रहा बुरा असर... सोशल मीडिया पर जानकार बता रहे हैं कि इस लत का असर बच्चों की दिनचर्या पर दिखाई देने लगा है। देर रात तक जागना और दोपहर तक सोना पढ़ाई से दूरी बनाना और परिवार से बातचीत कम होना आम होता जा रहा है।
माता-पिता की ढीली मॉनीटरिंग इस खतरे को और बढ़ा रही है, जबकि बच्चों के नियमित बैग चेक नहीं करते हुए डेली कॉलेज, शिशुकुंज, एमरॉल्ड हाईट्स, डीपीएस, एडवांस एकेडमी, स्कूल प्रबंधन भी जिम्मेदारी से बचता नजर आता है। इन स्कूलों के बच्चे ज्यादा नशा कर रहे हैं।
स्टेटस सिंबल या गर्त की ओर बढ़ते कदम...जानकारों का कहना है कि देखने में आ रहा है कि स्कूलों से निकलने के बाद ये बच्चे अपने साथियों के साथ स्कूल ड्रेस में सड़क किनारे खड़े नजर आ जाते हैं। पान की दुकानों से सिगरेट लेकर उसे कभी बेखौफ तो कभी चोरी छिपे फूंकते नजर आ जाते हैं।
इसे वे स्टेटस सिंबल मानते हैं। हालांकि उन्हें ये नहीं पता कि सिगरेट का हर कश उन्हें गर्त में ले जा रहा है। ऐसे में पुलिस को चाहिए कि वह भी ऐसे बच्चों की नियमित चेकिंग करे और पान व एव्हरफ्रेश की दुकानों की भी नियमित या सरप्राइज जांच हो।
क्या कहता है कानून...
कानूनी तौर पर ई-सिगरेट का निर्माण, बिक्री, स्टोरेज और विज्ञापन पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। प्रोहीबिशन ऑफ इलेक्ट्रिक सिगरेट एक्ट 2019 के तहत इसका व्यापार गैरकानूनी है। उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।
पहली बार दोषी पाए जाने पर जुर्माना और जेल दोनों हो सकते हैं, जबकि बार-बार उल्लंघन करने पर सजा और कड़ी हो जाती है। इसके अलावा स्कूलों के 100 मीटर के दायरे में तंबाकू या संबंधित उत्पादों की बिक्री पहले से ही प्रतिबंधित है, लेकिन जमीनी हकीकत में इन नियमों का पालन बेहद कमजोर दिखाई देता है। यही वजह है कि बच्चों के हाथों तक यह जहर चोरी छिपे बड़ी ही आसानी से पहुंच रहा है और उनका भविष्य धुएं में उड़ता जा रहा है।
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