हर हर केदार: चारधाम यात्रा में उमड़ा आस्था का सैलाब; 13 लाख से ज्यादा श्रद्धालु कर चुके दर्शन
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, देहरादून।
देवभूमि उत्तराखंड में चल रही पवित्र चारधाम यात्रा 2026 इस समय अपने चरम पर है। 14 मई की शाम तक कुल 13,32,434 श्रद्धालु चारों धामों के दर्शन कर चुके हैं। केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में हर दिन हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। देशभर से लाखों श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए उत्तराखंड पहुंच रहे हैं। यात्रा मार्गों से लेकर धामों तक हर दिन भक्तों का उत्साह देखने लायक है। 19 अप्रैल 2026 से शुरू हुई चारधाम यात्रा में अब लगातार बढ़ रही भीड़ को देखते हुए प्रशासन भी व्यवस्थाओं को संभालने में जुटा हुआ है।
13 मई को रिकॉर्ड संख्या में पहुंचे श्रद्धालु-13 मई 2026 को यमुनोत्री धाम में 13,315 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, जबकि गंगोत्री धाम में 13,403 यात्री पहुंचे। वहीं केदारनाथ धाम में सबसे अधिक 32,427 श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन किए। बदरीनाथ धाम में भी 21,260 श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे।
यात्रा मार्गों पर बढ़ा वाहनों का दबाव-चारधाम यात्रा के साथ ही उत्तराखंड के पहाड़ी मार्गों पर वाहनों की आवाजाही भी लगातार बढ़ रही है। 14 मई 2026 तक चारों धामों में कुल 1,21,490 वाहन पहुंच चुके हैं। बदरीनाथ धाम में शुक्रवार को 2,062 वाहन पहुंचे और यहां कुल वाहनों की संख्या 43,892 हो गई।
केदारनाथ धाम में शुक्रवार को 2,360 वाहन पहुंचे, जिससे कुल संख्या बढ़कर 36,609 तक पहुंच गई। इसी तरह यमुनोत्री धाम में शुक्रवार को 1,013 वाहन पहुंचे और अब तक कुल 20,164 वाहन पहुंच चुके हैं। गंगोत्री धाम में शुक्रवार को 1,230 वाहन पहुंचे, जबकि कुल संख्या 20,825 हो गई है। शुक्रवार को चारों धामों में कुल 6,665 वाहनों की आवाजाही दर्ज की गई।
यात्रा से पहले करें पूरी तैयारी- चारधाम यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है। यात्री ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से पंजीकरण करा सकते हैं। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा पर निकलने से पहले होटल, यात्रा टिकट और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं पहले से सुनिश्चित कर लें। पीक सीजन में भारी भीड़ के चलते अंतिम समय में दिक्कतें बढ़ सकती हैं।
अब तक 45 श्रद्धालुओं की मौत, स्वास्थ्य मंत्री बोले- ‘पहलवानी दिखाने की जरूरत नहीं’
उत्तराखंड में चल रही चारधाम यात्रा 2026 में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। 19 अप्रैल से शुरू हुई इस यात्रा में अब तक 13 लाख से अधिक श्रद्धालु चारों धामों के दर्शन कर चुके हैं। हालांकि बढ़ती भीड़ के बीच यात्रियों की मौत के आंकड़ों ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग की चिंता भी बढ़ा दी है।
26 दिनों में 45 श्रद्धालुओं की मौत- उत्तराखंड राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार, 14 मई 2026 तक चारधाम यात्रा के दौरान 45 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। अधिकांश मौतें हृदय गति रुकने, हाई एल्टीट्यूड सिकनेस और अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारणों से हुई हैं। आंकड़ों के मुताबिक सबसे अधिक 24 मौतें केदारनाथ धाम यात्रा मार्ग पर दर्ज की गई हैं।
इसके अलावा बदरीनाथ धाम में 8, गंगोत्री धाम में 7 और यमुनोत्री धाम में 6 श्रद्धालुओं की जान जा चुकी है। चारधाम यात्रा के दौरान लगातार बढ़ रहे मौतों के आंकड़ों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। खासतौर पर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ऑक्सीजन की कमी, कठिन चढ़ाई और अचानक मौसम परिवर्तन श्रद्धालुओं के लिए चुनौती बन रहे हैं।
स्वास्थ्य मंत्री बोले- यात्रा में ‘पहलवानी’ न करें-चारधाम यात्रा में बढ़ती मौतों पर उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को अपनी शारीरिक क्षमता से अधिक दबाव नहीं डालना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी श्रद्धालु को चढ़ाई के दौरान थकान, सांस लेने में दिक्कत या कमजोरी महसूस हो तो तुरंत आराम करना चाहिए।
खासकर 50 से 60 वर्ष से अधिक आयु के यात्रियों में हाई एल्टीट्यूड सिकनेस का खतरा अधिक रहता है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा-यात्रा में पहलवानी दिखाने की जरूरत नहीं है। यदि शरीर संकेत दे रहा है तो थोड़ी देर रुककर आराम करें और उसके बाद ही आगे बढ़ें।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार चारधाम यात्रा मार्गों पर 47 अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को सक्रिय रखा गया है। इसके अलावा 400 से अधिक डॉक्टरों की तैनाती की गई है। इनमें से करीब 180 डॉक्टरों को हाई एल्टीट्यूड सिकनेस, हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि आपात स्थिति में उपचार मिल सके। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि प्रदेश में कार्डियोलॉजिस्ट की संख्या सीमित होने के बावजूद श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में पहली बार कैथ लैब की शुरुआत की गई है।
यात्रा से पहले स्वास्थ्य जांच जरूरी-स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी जारी कर श्रद्धालुओं से यात्रा से पहले स्वास्थ्य परीक्षण कराने की अपील की है। खासकर हार्ट, हाई ब्लड प्रेशर और शुगर के मरीजों को डॉक्टर की सलाह लेने के बाद ही यात्रा पर आने को कहा गया है।
बद्रीनाथ-केदारनाथ धाम पर वृद्ध और दिव्यांगों को दर्शन में प्राथमिकता
बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने बदरीनाथ धाम और केदारनाथ धाम में वृद्ध एवं दिव्यांग श्रद्धालुओं काे सुगम दर्शन कराने के लिए प्राथमिक दर्शन सुविधा लागू करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में मंदिर समिति ने मानक प्रचालन विधि (एसओपी) जारी कर दी है।
बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के निर्देश पर मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने इसके आदेश जारी किए। बीकेटीसी हेमंत द्विवेदी ने कहा कि दोनों धामों में बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं को सम्मानजनक, सुरक्षित और सुगम दर्शन उपलब्ध कराने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। एसओपी के तहत 50-50 श्रद्धालुओं के 15 मिनट के चार स्लॉट निर्धारित किए गए हैं, जिनमें केवल वृद्ध और दिव्यांग श्रद्धालुओं को दर्शन कराए जाएंगे।
दर्शन का समय सुबह 8 बजे से 8:15 बजे, 10 बजे से 10:15 बजे और शाम 3 बजे से 3:15 बजे और 4:45 बजे से 5 बजे तक निर्धारित किया गया है। इस व्यवस्था के तहत 70 वर्ष से अधिक आयु के श्रद्धालुओं को आधार कार्ड और पंजीकरण के आधार पर यह सुविधा दी जाएगी। दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए वास्तविक स्थिति का आकलन करने के बाद प्राथमिक दर्शन की अनुमति दी जाएगी।
बद्रीनाथ महायोजना में तेजी, मंदिर के पास 22 भवन खाली कराने की प्रक्रिया शुरू
उत्तराखंड के पवित्र बद्रीनाथ धाम में चल रही महायोजना अब अंतिम चरण में है। मंदिर के आसपास लंबे समय से अटके भवन हटाने के कार्य में प्रशासन को बड़ी सफलता मिली है। मंदिर के 75 मीटर दायरे में 22 भवनों को खाली कराने की प्रक्रिया तेज हो गई है। प्रशासन के प्रयासों के बाद भवन स्वामी मकान खाली करने के लिए तैयार हो गए हैं। इनमें से एक भवन स्वामी ने अपना भवन खाली कर प्रशासन को कब्जा भी सौंप दिया है।
74 भवन हटाने की थी योजना- बदरीनाथ महायोजना के तहत मंदिर के आसपास नारायण पर्वत की ओर सौंदर्यीकरण और यात्री सुविधाओं के विस्तार का कार्य किया जाना है। इसके लिए कुल 74 भवनों को हटाने की योजना बनाई गई थी। इनमें से 52 भवनों को पहले ही हटाया जा चुका है।
भवन स्वामियों को मुआवजा देकर प्रशासन ने पहले चरण का कार्य पूरा कर लिया था, लेकिन 22 भवन स्वामी मुआवजे से जुड़े विवाद के कारण भवन खाली नहीं कर रहे थे। इसी वजह से परियोजना का काम प्रभावित हो रहा था और निर्माण एजेंसी आगे का कार्य शुरू नहीं कर पा रही थी।
प्रशासन के प्रयासों से बनी सहमति- प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की लगातार वार्ता के बाद अब शेष भवन स्वामी भी भवन खाली करने को राजी हो गए हैं।
बताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में बाकी भवन भी खाली करा दिए जाएंगे। इसके बाद निर्माण एजेंसी यहां से मलबा हटाने और सौंदर्यीकरण से जुड़े कार्यों को तेज करेगी।
रिवर फ्रंट और ईवी ट्रैक निर्माण में तेजी- बदरीनाथ महायोजना के तहत अलकनंदा नदी के किनारे रिवर फ्रंट और ईवी ट्रैक निर्माण का काम भी तेजी से चल रहा है।
बद्रीनाथ-केदारनाथ धाम पर वृद्ध और दिव्यांगों को दर्शन में प्राथमिकता
बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने बदरीनाथ धाम और केदारनाथ धाम में वृद्ध एवं दिव्यांग श्रद्धालुओं काे सुगम दर्शन कराने के लिए प्राथमिक दर्शन सुविधा लागू करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में मंदिर समिति ने मानक प्रचालन विधि (एसओपी) जारी कर दी है।
बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के निर्देश पर मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने इसके आदेश जारी किए। बीकेटीसी हेमंत द्विवेदी ने कहा कि दोनों धामों में बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं को सम्मानजनक, सुरक्षित और सुगम दर्शन उपलब्ध कराने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।
एसओपी के तहत 50-50 श्रद्धालुओं के 15 मिनट के चार स्लॉट निर्धारित किए गए हैं, जिनमें केवल वृद्ध और दिव्यांग श्रद्धालुओं को दर्शन कराए जाएंगे।
दर्शन का समय सुबह 8 बजे से 8:15 बजे, 10 बजे से 10:15 बजे और शाम 3 बजे से 3:15 बजे और 4:45 बजे से 5 बजे तक निर्धारित किया गया है। इस व्यवस्था के तहत 70 वर्ष से अधिक आयु के श्रद्धालुओं को आधार कार्ड और पंजीकरण के आधार पर यह सुविधा दी जाएगी। दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए वास्तविक स्थिति का आकलन करने के बाद प्राथमिक दर्शन की अनुमति दी जाएगी।
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