UCC का बढ़ा विरोध: यहां मुस्लिम महिलाओं का प्रदर्शन; इस शहर में मुफ्ती की तीखी टिप्पणी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल/जबलपुर।
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर मध्यप्रदेश में मुस्लिम समाज के एक वर्ग ने विरोध जताया है। जबलपुर में मुस्लिम महिलाओं ने प्रदर्शन कर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
वहीं भोपाल में एक धार्मिक तकरीर के दौरान मुफ्ती मोहम्मद गुफरान खान नदवी ने UCC को लेकर तीखी आपत्ति दर्ज कराई। दोनों जगह प्रदर्शन और बयानबाजी का केंद्र धार्मिक स्वतंत्रता और मुस्लिम पर्सनल लॉ रहा।
जबलपुर में सड़कों पर उतरीं मुस्लिम महिलाएं
जबलपुर में जमात-ए-इस्लामी हिंद महिला विंग की सदस्यों ने UCC के विरोध में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने इसे मुस्लिम पर्सनल लॉ और शरीयत से जुड़े प्रावधानों में हस्तक्षेप बताया।
महिलाओं ने सरकार के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए UCC को वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि संविधान उन्हें अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता देता है, इसलिए उनके धार्मिक और व्यक्तिगत मामलों में ऐसी व्यवस्था नहीं होनी चाहिए, जिसे वे अपने धार्मिक कानूनों के विपरीत मानती हैं।
प्रदर्शन के दौरान नाजिया बानो ने कहा कि UCC के तहत बनाए जा रहे प्रावधानों का वे विरोध करती हैं।
उनका कहना था कि संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन और धार्मिक गतिविधियां करने की आजादी देता है। इसी आधार पर उन्होंने मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़े अधिकारों की रक्षा की मांग की।
वहीं तैय्यबा अंबर ने कहा कि मुस्लिम समाज अपनी शरीयत से जुड़े मामलों में किसी तरह का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करना चाहता।
उन्होंने कहा कि देश में सभी धर्मों के लोग रहते हैं और संविधान के अनुसार मुस्लिम समाज को भी अपने धार्मिक मामलों का पालन करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।
भोपाल में मुफ्ती गुफरान ने उठाए सवाल
इसी मुद्दे को लेकर भोपाल के मंगलवार चौराहा स्थित रुस्तम हम्माल मस्जिद में तकरीर के दौरान मुफ्ती मोहम्मद गुफरान खान नदवी ने UCC पर अपनी राय रखी।
उन्होंने कहा कि ऐसा कोई कानून, जो कुरान और शरीयत के प्रावधानों से टकराता हो, उसे मुस्लिम समाज स्वीकार नहीं कर सकता।
उन्होंने विशेष रूप से निकाह, तलाक और विरासत जैसे व्यक्तिगत कानूनों का जिक्र किया और कहा कि इन मामलों में शरीयत के प्रावधानों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
मुफ्ती गुफरान ने कहा कि मुस्लिम समाज ने देश के संविधान और आपराधिक कानूनों को स्वीकार किया है, लेकिन धार्मिक और व्यक्तिगत मामलों में शरीयत के प्रावधानों से टकराव की स्थिति होने पर समाज अपनी आपत्ति दर्ज कराने के लिए स्वतंत्र है।
शहर काजी और धार्मिक जिम्मेदारों की भूमिका पर सवाल
तकरीर के दौरान मुफ्ती गुफरान ने शहर काजी, शहर मुफ्ती, मसाजिद कमेटी और औकाफ से जुड़े जिम्मेदारों की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
उनका कहना था कि धार्मिक मामलों में मार्गदर्शन करने वाले लोगों को UCC जैसे मुद्दों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई कानून शरीयत के प्रावधानों के विपरीत माना जा रहा है तो मुस्लिम समाज के धार्मिक जिम्मेदारों को इस पर खुलकर अपनी राय रखनी चाहिए। उन्होंने धार्मिक संस्थाओं से जुड़े लोगों की चुप्पी पर भी आपत्ति जताई।
‘UCC समर्थकों को कार्यक्रमों में बुलाना कैसे उचित?’
मुफ्ती गुफरान ने उन धार्मिक और सामाजिक जिम्मेदारों पर भी सवाल उठाए, जो UCC का समर्थन करने वाले नेताओं के साथ मंच साझा करते हैं या उन्हें कार्यक्रमों में आमंत्रित करते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति ऐसे कानून का समर्थन करता है, जिसे मुस्लिम समाज का एक वर्ग शरीयत के खिलाफ मानता है, तो धार्मिक संस्थाओं के जिम्मेदारों द्वारा ऐसे लोगों को सम्मानित करने या कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि बनाने को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का दिया हवाला
दोनों जगह हुए विरोध में प्रदर्शनकारियों और वक्ता ने संविधान में दिए धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का हवाला दिया।
उनका तर्क है कि देश के सभी नागरिकों को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता है और मुस्लिम समाज अपने व्यक्तिगत मामलों में शरीयत के अनुसार आचरण की आजादी चाहता है।
मुफ्ती गुफरान ने कहा कि मुस्लिम समाज को संविधान और देश की कानूनी व्यवस्था का सम्मान करते हुए अपने धार्मिक मामलों में स्पष्ट रुख रखना चाहिए।
उनके मुताबिक, जिन कानूनों से शरीयत का टकराव नहीं है, उन्हें स्वीकार करने में आपत्ति नहीं है, लेकिन धार्मिक प्रावधानों के विपरीत माने जाने वाले कानूनों का विरोध किया जाएगा।
विरोध के बीच UCC पर बहस तेज
जबलपुर में महिलाओं का प्रदर्शन और भोपाल में मुफ्ती की तकरीर बताती है कि UCC को लेकर मुस्लिम समाज के एक वर्ग में विरोध और चिंता बनी हुई है।
एक तरफ प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के माध्यम से अपनी आपत्ति सरकार तक पहुंचाई, वहीं भोपाल में धार्मिक मंच से इस मुद्दे पर समुदाय के जिम्मेदार लोगों से स्पष्ट रुख अपनाने की अपील की गई।
हालांकि, UCC को लेकर देश में व्यापक कानूनी और राजनीतिक बहस जारी है और अलग-अलग समुदायों तथा संगठनों की इसके प्रावधानों को लेकर अलग-अलग राय है।
ऐसे में इन बयानों और प्रदर्शनों को संबंधित वक्ताओं और प्रदर्शनकारियों के व्यक्तिगत/संगठनात्मक मत के रूप में देखा जाना चाहिए।
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