फिर लड़कों से आगे बेटियां: महिला स्पर्धाओं में 10 गोल्ड; पुरुषों में 8, हॉकी ने दिलाया ओलिंपिक टिकट
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, नई दिल्ली।
जापान के आइची-नागोया में हुए एशियन गेम्स 2026 में भारत का अभियान 85 पदकों के साथ समाप्त हुआ। भारत ने 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य सहित कुल 85 पदक जीते और पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया।
भारत के लिए यह प्रदर्शन 2022 हांगझोऊ के 106 पदकों से कम रहा, लेकिन कई ऐतिहासिक उपलब्धियां इस अभियान की बड़ी खासियत रहीं।
सबसे खास बात यह रही कि इस बार महिला खिलाड़ियों ने स्वर्ण पदकों में पुरुषों से बेहतर प्रदर्शन किया। भारत के 21 स्वर्ण में 10 महिला स्पर्धाओं, 8 पुरुष स्पर्धाओं और 3 मिश्रित स्पर्धाओं से आए।
यानी 2002 के बुसान एशियन गेम्स के बाद पहली बार महिला स्पर्धाओं से पुरुष स्पर्धाओं से ज्यादा स्वर्ण मिले। 2002 में भारतीय महिलाओं ने 6 स्वर्ण जीतकर पुरुषों से ज्यादा स्वर्ण हासिल किए थे।
1. 24 साल बाद फिर महिला खिलाड़ियों का दबदबा
2026 में महिला स्पर्धाओं में भारत के 10 स्वर्ण आए। इनमें महिला क्रिकेट, महिला कबड्डी, महिला हॉकी, महिला 4×400 मीटर रिले, महिला ट्रैप शूटिंग, तीरंदाजी की महिला टीम और व्यक्तिगत स्पर्धाएं तथा मुक्केबाजी के दो स्वर्ण शामिल हैं। पुरुषों के खाते में 8 स्वर्ण रहे, जबकि तीन स्वर्ण मिश्रित स्पर्धाओं से आए।
इस उपलब्धि को 2002 के बुसान खेलों से जोड़कर देखा जा रहा है। तब भारत ने कुल 11 स्वर्ण जीते थे, जिनमें महिलाओं ने 6 स्वर्ण अपने नाम किए थे।
महिला खिलाड़ियों के प्रदर्शन में कुमकुम मोहोड़, नीरू ढांडा, लवलीना बोरगोहेन, परवीन हुड्डा और महिला हॉकी टीम जैसी उपलब्धियां खास रहीं। कुमकुम मोहोड़ एशियन गेम्स में व्यक्तिगत रिकर्व स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।
2. मुक्केबाजी और कुश्ती में वापसी, निशानेबाजी और एथलेटिक्स में कमी
भारत ने 2022 की तुलना में कई खेलों में अपना प्रदर्शन बदला। सबसे बड़ा सुधार मुक्केबाजी और कुश्ती में दिखा। 2022 में इन दोनों खेलों में भारत को एक भी स्वर्ण नहीं मिला था, जबकि 2026 में मुक्केबाजी में 3 और कुश्ती में 2 स्वर्ण आए।
इसके उलट निशानेबाजी और एथलेटिक्स से स्वर्ण की संख्या काफी कम रही। पिछली बार शूटिंग से 7 और एथलेटिक्स से 6 स्वर्ण आए थे, जबकि इस बार शूटिंग में 3 स्वर्ण मिले और एथलेटिक्स में केवल महिला 4×400 मीटर रिले का स्वर्ण आया।
यानी व्यक्तिगत मुकाबलों में नए खिलाड़ियों का उभार हुआ, लेकिन भारत के कुछ पारंपरिक मजबूत क्षेत्रों में अपेक्षित स्वर्ण नहीं आए। यही वजह रही कि कुल पदकों के मामले में भारत 2022 के प्रदर्शन को दोहरा नहीं सका।
3. टीम स्पर्धाओं में धाक कायम, हॉकी ने दिलाया ओलिंपिक टिकट
टीम स्पर्धाएं भारत की सबसे बड़ी ताकत रहीं। क्रिकेट, कबड्डी और हॉकी में पुरुष और महिला दोनों टीमों ने स्वर्ण जीता।
हॉकी का स्वर्ण सबसे महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि एशियन गेम्स का चैंपियन सीधे 2028 लॉस एंजिलिस ओलिंपिक के लिए क्वालिफाई करता है।
भारत की पुरुष टीम ने फाइनल में मलेशिया को 5-1 से हराकर खिताब बरकरार रखा और ओलिंपिक टिकट हासिल किया। महिला टीम ने भी स्वर्ण जीतकर लॉस एंजिलिस के लिए सीधे क्वालिफिकेशन हासिल किया। इस तरह पहली बार एक ही एशियन गेम्स में भारत की पुरुष और महिला दोनों हॉकी टीमों ने स्वर्ण जीतते हुए ओलिंपिक क्वालिफिकेशन हासिल किया।
4. चीन की बादशाहत अब भी कायम
एशियन गेम्स में चीन का दबदबा एक बार फिर बरकरार रहा। चीन ने 169 स्वर्ण सहित 300 से ज्यादा पदक जीते और लगातार शीर्ष पर रहा। चीन 1982 के बाद से हर एशियन गेम्स में पदक तालिका में पहले स्थान पर रहा है।
भारत चौथे स्थान पर रहा। 2022 की तुलना में भारत के पदकों में 21 की कमी आई, लेकिन इसके बावजूद चौथा स्थान बरकरार रहा। यह दिखाता है कि भारत शीर्ष एशियाई खेल शक्तियों के बीच अपनी स्थिति बनाए हुए है।
5. रिकॉर्ड की बारिश, कुमकुम-नीरू के नाम ऐतिहासिक उपलब्धियां
आइची-नागोया खेलों में कई नए रिकॉर्ड बने और टूटे। भारतीय खिलाड़ियों के लिए भी यह संस्करण कई मायनों में खास रहा।कुमकुम मोहोड़ ने महिला व्यक्तिगत रिकर्व में स्वर्ण जीतकर इतिहास बनाया। महिला रिकर्व टीम ने भी पहली बार स्वर्ण जीता।
नीरू ढांडा ने महिला ट्रैप में स्वर्ण जीतकर भारत को इस स्पर्धा में ऐतिहासिक सफलता दिलाई। मिश्रित ट्रैप टीम में भी नीरू ने स्वर्ण जीता।
मुक्केबाजी में भारत ने तीन स्वर्ण जीते, जबकि कुश्ती में सुजीत और अमन सहरावत ने स्वर्ण जीतकर पिछले संस्करण की निराशा को पीछे छोड़ा।
भारत का एशियन गेम्स 2026 रिपोर्ट कार्ड
कुल पदक: 85
स्वर्ण: 21
रजत: 27
कांस्य: 37
पदक तालिका: चौथा स्थान
2022 हांगझोऊ: 106 पदक
2026 आइची-नागोया: 85 पदक
यानी कुल पदकों में कमी जरूर आई, लेकिन महिला खिलाड़ियों की बढ़त, हॉकी में दो स्वर्ण, ओलिंपिक क्वालिफिकेशन, तीरंदाजी-मुक्केबाजी-कुश्ती में ऐतिहासिक प्रदर्शन और नए खिलाड़ियों के उभार ने 2026 के अभियान को खास बना दिया।
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