सोनोग्राफी का संदिग्ध खेल या घोर लापरवाही: श्रीकृष्ण डायग्नोस्टिक सेंटर पर सील ठोंकने की मांग
KHULASA FIRST
संवाददाता

24 घंटे में रिपोर्ट का बदला मिजाज: 3 अक्टूबर को 13.9 मिमी पथरी की रिपोर्ट नार्मल, अगले दिन 13 मिमी दर्शाई
परिजनों ने कहा- जान से खिलवाड़ करने वाला सेंटर तुरंत सील करे प्रशासन
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
जब कोई लाचार मरीज वेदना से तड़पते किसी चिकित्सा केंद्र या पैथोलॉजी का रुख करता है, तो वहां की रिपोर्ट को वेद-वाक्य की तरह सत्य मानता है। उसी पर डॉक्टर सर्जिकल ब्लेड चलाता है और मरीज की जिंदगी या मौत का फैसला होता है।
कोई डायग्नोस्टिक सेंटर सोनोग्राफी की रिपोर्टों को खेल बना दे, 13.9 मिलीमीटर जानलेवा पथरी को एक दिन अस्तित्वहीन बताए और अगले ही दिन दर्ज कर दे, तो इसे महज 'तकनीकी भूल' कहकर खारिज नहीं किया जा सकता। यह सीधे-सीधे मरीज को मौत के मुंह में ढकेलने और स्वास्थ्य के नाम पर खुली डकैती जैसा गंभीर कृत्य है।
पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर से इलाज की आस लेकर आई अमिता कर्मकार के मामले ने इंदौर के स्वास्थ्य महकमे की कलई खोल दी है। विजय नगर स्थित श्रीकृष्ण डायग्नोस्टिक सेंटर की कारगुजारियों ने न केवल उन्हें दिनभर असहनीय दर्द से तड़पने पर मजबूर किया, बल्कि सवाल भी खड़ा कर दिया क्या इंदौर में जांच के नाम पर खिलवाड़ हो रहा है? आक्रोशित परिजनों ने साफ चेतावनी दी है मरीजों से खिलवाड़ करने वाले सेंटर को सील कर जिम्मेदार रेडियोलॉजिस्ट का लाइसेंस निरस्त किया जाए।
24 घंटे में बदला सच-सोनोग्राफी का हैरान करने वाला फर्जीवाड़ा?... मामले के दस्तावेजी तथ्य इतने चौंकाने वाले हैं कि किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएं। 24 सितंबर को दुर्गापुर के प्रसिद्ध लैब में हुई सोनोग्राफी में अमिता कर्मकार के पित्ताशय में 13.9 मिलीमीटर की बड़ी गोलाकार पथरी पाई गई थी।
वहां के चिकित्सकों ने तुरंत ऑपरेशन की हिदायत दी थी। परिजन बेहतर और उच्चस्तरीय इलाज की आस में मरीज को इंदौर लाए। डॉक्टरी सलाह पर 3 अक्टूबर को मरीज को विजय नगर स्थित श्रीकृष्ण डायग्नोस्टिक सेंटर ले जाया गया। वहां से जो रिपोर्ट आई, उसने परिजनों के पैरों तले जमीन खिसका दी।
रेडियोलॉजिस्ट डॉ. निर्मल फुलवानी के दस्तखत से जारी रिपोर्ट में लिखा गया पित्ताशय पूरी तरह सामान्य है और उसमें कोई पथरी नहीं है! 3 अक्टूबर की इस 'कागजी जादूगरी' का नतीजा हुआ डॉक्टरों ने ऑपरेशन टाल दिया।
उधर, पथरी आंतरिक अंगों को छीलती रही और वह महिला रातभर असहनीय पीड़ा से तड़पती रही। जब दर्द किसी भी दवा से नियंत्रित नहीं हुआ, तो 4 अक्टूबर को परिजनों ने उसी सेंटर में फिर सोनोग्राफी कराई।
इस बार जो रिपोर्ट सामने आई, उसने केंद्र के काले कारनामों का कच्चा चिट्ठा खोल दिया। पहले जिस पथरी को पूरी तरह 'गायब' बता दिया गया था, महज 24 घंटे बाद वही 13 मिलीमीटर की पथरी दर्ज कर दी गई।
आखिर किसके शह पर चल रहा यह खिलवाड़?... पीड़िता के पति पिंटू कर्मकार ने आक्रोश व्यक्त कर कहा है पथरी थी और 4 अक्टूबर को भी वही स्थिति निकली, तो 3 अक्टूबर की रिपोर्ट नार्मल कैसे आई?
क्या श्रीकृष्ण डायग्नोस्टिक सेंटर में घटिया और कबाड़ हो चुकी मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है? रेडियोलॉजिस्ट आंखें मूंदकर फर्जी रिपोर्ट पर दस्तखत कर रहे हैं? या फिर यह मरीजों को बार-बार जांच के नाम पर लूटने और उन्हें गुमराह करने का कोई सिंडिकेट है?
परिजन किसी लीपापोती के मूड में नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है 3 और 4 अक्टूबर की मूल डिजिटल इमेजेस जब्त कर स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड से जांच कराई जाए और सेंटर के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर उसे तत्काल सील किया जाए।
मरीज तड़पती रही दर्द से, परिवार झेलता रहा मानसिक प्रताड़ना... गलत रिपोर्टिंग का खामियाजा किसी नेता या अफसर को नहीं, बल्कि उस गरीब मरीज और उसके परिवार को भुगतना पड़ा।
3 अक्टूबर की रिपोर्ट में पथरी न होने के कारण डॉक्टर भ्रमित हुए और समय पर सर्जरी न हो सकी। परिणामस्वरूप अमिता कर्मकार जानलेवा दर्द से बिलखती रहीं।
एक तरफ मरीज जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहा था, तो दूसरी तरफ परिवार इस भ्रम में पिस रहा था आखिर किस डॉक्टर और किस रिपोर्ट पर भरोसा करें। जांच के नाम पर यह लापरवाही किसी की जान ले सकती थी। अगर पित्ताशय की पथरी फट जाती और संक्रमण फैलता तो भरपाई कौन करता?
जांच का ढोंग या कमिशनखोरी का खेल? ... यह मामला सिर्फ एक डायग्नोस्टिक सेंटर की लापरवाही तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर में फैले उस जांच-सिंडिकेट की तरफ इशारा करता है जहां मरीजों को केवल एक 'ग्राहक' समझा जाता है।
अक्सर चर्चा होती है कुछ जांच केंद्रों और बिचौलियों के बीच मोटे कमीशन का खेल चलता है, जहां मरीज की सेहत से ज्यादा प्राथमिकता कट-मनी को दी जाती है।
यद्यपि लेन-देन का कानूनी प्रमाण जांच के बाद ही साफ होगा, लेकिन जिस तरह गंभीर मरीजों को जांच के नाम पर भ्रमित किया जा रहा है, उसने पूरे सिस्टम की साख पर कालिख पोत दी है। जनता को जानने का पूरा हक है उन्हें जिस लैब में भेजा जा रहा है, वह जांच के लिए है या जेबें तराशने के लिए!
न्याय से कम कुछ मंजूर नहीं
अमिता कर्मकार का मामला इंदौर की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए खुली चुनौती है। रिपोर्टों में भयानक की वास्तविक वजह सामने आना ही चाहिए। सेंटर को भी सार्वजनिक रूप से जवाब देना होगा 3 अक्टूबर पथरी क्यों छिपाई और 4 अक्टूबर को दोबारा कैसे प्रकट हुई?
कलेक्टर शिवम वर्मा और सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी को बिना किसी दबाव निष्पक्ष और कठोर कदम उठाकर साबित करना होगा इंदौर में मरीजों से खिलवाड़ करने वालों के लिए कोई जगह नहीं है..चाहे वह कितना ही बड़ा सेंटर क्यों न हो!
रेडियोलॉजिस्ट गायब
रेडियोलॉजिस्ट डॉ. निर्मलकुमार फुलवानी का पक्ष जानने के लिए जब श्री कृष्णा डायग्नोस्टिक सेंटर के आधिकारिक नंबरों 9111910600, 9111910800 पर संपर्क किया गया, तो फुलवानी मीडिया के सामने आने और मोबाइल फोन पर अपना पक्ष रखने से साफ कतराते नजर आए।
रिसेप्शनिस्ट सचिन खुद ही रेडियोलॉजिस्ट की तरफ से सफाई देने लगा। कहा डॉ. निर्मल फुलवानी उपलब्ध नहीं हैं और उनकी डॉक्टर साहब से बात हुई थी, जिसमें उन्होंने बताया रिपोर्ट बनाते समय टाइपिस्ट चूक हुई। सचिन के अनुसार यह महज टाइपिस्ट की त्रुटि है।
जांच समिति गठित कर रहे हैं
24 घंटे के भीतर दो सोनोग्राफी रिपोर्टों में इतना बड़ा विरोधाभास बेहद गंभीर मामला है। जांच समिति का गठित की जा रही है। वह श्रीकृष्ण डायग्नोस्टिक सेंटर पहुंचकर 3 और 4 अक्टूबर की मूल सोनोग्राफी इमेजेस, मशीन लॉग और तकनीकी डेटा को तुरंत कब्जे में लेगी।
जांच में रिपोर्टिंग में लापरवाही, मानवीय भूल या मशीनी खराबी की पुष्टि होती है, तो संबंधित डायग्नोस्टिक सेंटर और दोषी रेडियोलॉजिस्ट के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई होगी। - डॉ. माधव हसानी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी
कलेक्टर शिवम वर्मा और सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी के सामने खड़े तीखे सवाल
अब गेंद प्रशासन और स्वास्थ्य महकमे के पाले में है। संवेदनशील कलेक्टर शिवम वर्मा तथा सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी से तीखे सवाल पूछे जा रहे हैं:
सेंटर सील क्यों नहीं? क्या 24 घंटे में परस्पर विरोधी रिपोर्ट जारी कर जान जोखिम में डालने वाले श्रीकृष्ण डायग्नोस्टिक सेंटर पर तत्काल प्रभाव से ताला ठोका जाएगा?
रिकॉर्ड जब्ती कब होगी? क्या डॉ. माधव हसानी तुरंत टीम भेजकर श्रीकृष्ण डायग्नोस्टिक सेंटर की मशीनों, सॉफ्टवेयर लॉग्स और 3 व 4 अक्टूबर की मूल सोनोग्राफी इमेजेस जब्त करेंगे?
रेडियोलॉजिस्ट पर कार्रवाई: गलत और भ्रामक रिपोर्ट जारी करने वाले संबंधित रेडियोलॉजिस्ट का मेडिकल रजिस्ट्रेशन निरस्त करने के लिए मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल को सिफारिश भेजी जाएगी?
क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट लागू होगा? क्या स्वास्थ्य विभाग जांच करेगा उक्त सेंटर में मानक उपकरण हैं या मरीजों के साथ खिलवाड़ करने वाली खटारा मशीनें?
कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई की दरकार
परिजनों एक ही साफ मांग है मामले को कागजी जांच और औपचारिकता में न दबाया जाए। इसे केवल ‘टाइपोग्राफिकल एरर’ या ‘सामान्य तकनीकी अंतर’ बताकर श्रीकृष्ण डायग्नोस्टिक सेंटर को बचाने की कोशिश कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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