रबर के महंगे उपकरण की जगह सस्ते और कमजोर वाल्व लगा दिए: नर्मदा-मालवा गंभीर लिंक परियोजना में लाखों के भ्रष्टाचार की बाढ़
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नर्मदा-मालवा गंभीर लिंक परियोजना के पंप हाउस और पाइप लाइन सिस्टम में लगे महत्वपूर्ण उपकरणों को हटाकर उनके स्थान पर कथित तौर पर घटिया एवं अस्थायी सामग्री लगाए जाने का मामला सामने आया है।
संबंधित विभागीय दस्तावेजों के आधार पर इस मामले की शिकायत करने वालों के आरोप हैं कि परियोजना में मूल रूप से लगाए गए महंगे धातु उपकरणों को हटाकर कम गुणवत्ता वाले उपकरणों से काम चलाया गया, जिससे लाखों रुपए का नुकसान होने की आशंका है।
कहा जा रहा है कि पीतल के उपकरण की जगह लोहे की हलकी सामग्री वाली प्लेट लगा दी गई। यहां तक कहा जा रहा है कि पीतल के उपकरणों को बाजार में बेच दिया गया।
उपलब्ध तस्वीरों में गेट वाल्व हटाकर प्लेट लगाए जाने, पाइप लाइन के हिस्सों में बदलाव तथा अन्य उपकरणों की स्थिति दिखाई गई है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जिन स्थानों पर निर्धारित गुणवत्ता और तकनीकी मानकों के उपकरण लगाए जाना थे, वहां बाद में सस्ती सामग्री का इस्तेमाल किया।
सरकार को इतने गंभीर मामले की जांच के लिए इसकी पुष्टि वर्क ऑर्डर, तकनीकी स्वीकृति, खरीद बिल और साइट रिकॉर्ड से होना जरूरी है।
एनवीडीए की निगरानी पर भी सवाल... मामला इसलिए गंभीर है, क्योंकि नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (एनवीडीए) की परियोजना में कार्यरत एजेंसी/मेंटेनेंस कंपनी की ओर से किए गए ऐसे किसी भी बदलाव की तकनीकी स्वीकृति और निरीक्षण संबंधित विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है।
यदि स्वीकृत डिजाइन के विपरीत उपकरण हटाए या बदले गए हैं, तो यह केवल सामग्री की गुणवत्ता का मामला नहीं, बल्कि सरकारी संपत्ति और भुगतान का भी है।
पंप हाउस की स्थिति को लेकर कई गंभीर आपत्तियां भी दर्ज हैं। तस्वीरों में पंप हाउस भवन की जर्जर स्थिति और सुरक्षा संबंधी सवाल उठाए गए हैं। वहीं एक अन्य फोटो में बटरफ्लाई एंड पंप शाफ्ट को नुकसान पहुंचने का उल्लेख किया गया है। इससे परियोजना के संचालन और रखरखाव की गुणवत्ता पर सवाल खड़े होते हैं।
श्रम विभाग की कार्रवाई से भी बढ़ी गंभीरता... मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि श्रम पदाधिकारी, जिला खरगोन के 13 फरवरी 2026 के पत्र में पॉवर लिंकर कंपनी, चैन्नई के संबंध में श्रमिकों के वेतन भुगतान को लेकर शिकायत का उल्लेख है।
पत्र में नवंबर 2025 से जनवरी 2026 तक तीन माह के वेतन एवं अधिसमय कार्य के भुगतान की शिकायत पर तीन दिवस में भुगतान कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
एक अन्य विभागीय पत्र में परियोजना में 50 से अधिक श्रमिकों के कार्यरत होने तथा संविदा श्रमिक अधिनियम के तहत अनुज्ञप्ति नहीं होने की बात भी दर्ज है। इससे परियोजना के संचालन और ठेका व्यवस्था की निगरानी को लेकर अलग सवाल खड़े होते हैं।
मूल उपकरण हटाने या बदलने की अनुमति किस अधिकारी ने दी? उपकरण की गुणवत्ता की जांच हुई या नहीं? हटाए गए महंगे उपकरण कहां गए और उनकी जगह लगाए गए उपकरणों का भुगतान किस दर से किया गया?
यदि जांच में यह साबित होता है कि महंगे मूल उपकरण निकालकर कम कीमत अथवा घटिया सामग्री लगाई गई और उसके बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में मूल गुणवत्ता का भुगतान किया गया, तो इससे सरकारी खजाने को लाखों रुपए की आर्थिक क्षति का मामला बन सकता है। जिस पॉवर लिंकर कंपनी को इस परियोजना का ठेका मिला है, वह अधिकारियों के साथ मिलकर मनमानी कर रही है।
पंप हाउस में भी कोई मेंटेनेंस नहीं किया जाता, जिससे पूरी परियोजना की हालत बहुत खराब स्थिति में है। विभाग द्वारा अप्रूवल ड्राइंग के साथ छेड़छाड़ कर बटर फ्लाई वाल्व लगाए गए। पावर लिंकर पूरी परियोजना को बहुत नुकसान पहुंचा रही है।
एनवीडीए के कार्यपालन यंत्री को भी इसकी सूचना दी गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस परियोजना में घटिया सामग्री के इस्तेमाल की हालत यह है कि उच्च क्वालिटी गैस किट की जगह रबर गैस इस्तेमाल किया जा रहा है।
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