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भोजशाला में ‘शुक्रवार’ को की गई वाग्देवी की महापूजा: सत्याग्रह की सफलता पर भावुक हुए श्रद्धालु; 721 साल बाद आया यह दिन

KHULASA FIRST

संवाददाता

23 मई 2026, 4:44 pm
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भोजशाला में ‘शुक्रवार’ को की गई वाग्देवी की महापूजा

खुलासा फर्स्ट, धार।
इंदौर हाई कोर्ट के फैसले के बाद पहले शुक्रवार को हिंदू समाज में जबरदस्त् उत्सा ह देखने को मिला। सूर्योदय के साथ ही लोगों के भोजशाला जाने का सिलसिला शुरू हो गया था, जो पूरे दिन जारी रहा।

शहर ही नहीं बल्कि गांव-गांव और आसपास के जिलों तक से श्रद्धालु मां वाग्दे वी के दर्शन को पहुंचे। श्रद्धालुओं ने भोजशाला आंदोलन से जुड़े स्म्रण साझा किए। लाट्ठी-डंडे पूजा का जो अधिकार मिला है, उसका बखान कर काफी भावुक हो गए।

721 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद जब भोजशाला के दरवाजे अब पूरी तरह से हिंदू समाज के लिए खुले तो दिनभर में 7 हजार से अधिक लोगों ने मां वाग्देवी के दर्शन किए और पूजा में सहभागिता कर उत्सा ह के साथ झूमते-गाते नजर आए।

दोपहर को संत मुरारी बापू पहुंचे और मां वाग्देवी के चरणों में नमन किया। उन्होंतने भी संघर्ष के दौरान बतौर अतिथि शामिल हुुए प्रसंग को स्मतरण करते हुए उस वक्त के हालात साझा किए।

इधर भोजशाला आंदोलन से जुड़े अशोक जैन ने शुक्रवार को शोभायात्रा का ऐलान किया था, लेकिन सुरक्षा कारण से अनुमति नहीं मिली। ऐसे में मोतीबाग चौक स्थित ज्योशति मंदिर पर एकत्रिकरण के बाद भोजशाला में दर्शन-पूजन का कार्यक्रम रखा गया।

इसमें भी सैकड़ों लोगों की सहभागिता रही। इधर जैन और कार्यकर्ताओं ने उन सत्याग्रहियों के परिजनों को भी आमंत्रित किया था, जिन्होंकने आंदोलन में सहभागी बनकर अपने प्राणों की आहुति दी थी।

उन्हें याद कर परिजनों का सम्माहन किया गया। सत्याग्रहियों के परिवार की मातृशक्ति का पाद पूजन कर सम्मा नित किया गया। इस दौरान जय श्रीराम और राजा भोज के जयकारों से पूरा मोतीबाग चौक गूंजायमान रहा ।

सूर्योदय से प्रारंभ हुआ पूजन
यह पहला मौका था जब शुक्रवार को हिंदू भोजशाला में प्रवेश कर रहे थे। ऐसे में सुरक्षा को लेकर खास इंतजाम थे। सूर्योदय के साथ मां वाग्देवी के दर्शन-पूजन शुरू हो गए। सुबह भोज उत्सव व समिति ने मां वाग्देेवी का प्रतिदिन अनुसार पूजन किया।

आरती कर चुनरी ओढ़ाई गई। गर्भगृह को फूलों से सजाया गया था। सुबह दिनभर बड़ी संख्या में लोगों ने भोजशाला पहुंचकर शुक्रवार को मां वाग्देवी के दर्शन का लाभ लिया। भोज उत्सव समिति के गोपाल शर्मा, महामंत्री सुमित चौधरी सहित अन्य पदाधिकारी पूरे समय व्यवस्था बनाते नजर आए।

लड़ाई बाकी: कुलदीप तिवारी
भोजशाला केस से जुड़े मुख्य याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी भी लखनऊ से पहुंचे। उन्हों ने शुक्रवार को पूजा में सहभागिता की। उनके साथ सह याचिककर्ता भी मौजूद रहे। कुलदीप तिवारी ने मीडिया से कहा लड़ाई बाकी है। भोजशाला में भगवान की मूर्तियां है, उन्हें भी सम्माीन दिलाना है।

सीढि़यों पर भगवान की प्रतिमा को उल्टाल रखा गया है, ताकि अपमान हो सके। कुछ जगहों पर मुस्लिम चिह्न है, जो बाद में लगाए गए थे। उन्हेंा भी हटाने की मांग रखी है। वहीं परिसर में जमीन के भीतर दबी भगवान हनुमान प्रतिमा को भी निकालने के प्रयास शुरू किए हैं। पहले यहां आया था तब सूचना लिखी थी शुक्रवार को हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है, आज यहां पर नमाज बंद है और दिनभर हवन और पूजा हुई।

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