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सोने की वजह से सरकार परेशान: पहले भी 4 बार जनता से गोल्ड न खरीदने को कहा गया था; जानिए भारत का इतिहास

KHULASA FIRST

संवाददाता

12 मई 2026, 6:29 pm
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सोने की वजह से सरकार परेशान

खुलासा फर्स्ट, नई दिल्ली।
देश की आर्थिक स्थिति और अंतरराष्ट्रीय हालात को लेकर एक बार फिर सोने की खरीद को लेकर बहस तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील, जिसमें उन्होंने लोगों से अगले एक वर्ष तक सोने की खरीद कम करने और ईंधन की बचत करने का आग्रह किया है, इसके बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है।

विदेशी मुद्रा पर दबाव कम होगा
प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे विदेशी मुद्रा पर दबाव कम होगा और देश की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलेगी। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच सरकार को आर्थिक मोर्चे पर सतर्क माना जा रहा है।

विपक्ष का हमला, सरकार पर जिम्मेदारी डालने का आरोप
इस मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को घेरने की कोशिश की है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि सरकार हर बार आर्थिक दबाव की जिम्मेदारी जनता पर डाल देती है। हालांकि, आर्थिक इतिहास पर नजर डालें तो ऐसे उदाहरण पहले भी सामने आते रहे हैं, जब सोने की खरीद पर नियंत्रण की अपील की गई।

1962 युद्ध के बाद दान और अपील
1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान देश आर्थिक और सैन्य दबाव में था। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने राष्ट्रीय रक्षा कोष में योगदान की अपील की थी। इसी दौरान इंदिरा गांधी ने भी अपने सोने के आभूषण दान किए थे। उस समय लोगों ने भी बड़े पैमाने पर योगदान दिया था।

1967 में सोना खरीदने से बचने की अपील
1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध और सूखे के बाद आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई थी। विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ने के बाद 1967 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देशवासियों से सोना खरीदने से बचने की अपील की थी। इसे उस समय “राष्ट्रीय अनुशासन” की जरूरत बताया गया था।

1991 का आर्थिक संकट और सोना गिरवी रखना
भारत के आर्थिक इतिहास का सबसे गंभीर दौर 1991 का माना जाता है। उस समय विदेशी मुद्रा भंडार बेहद कम हो गया था और आयात के लिए भी संसाधन नहीं बचे थे। ऐसी स्थिति में भारतीय रिजर्व बैंक के स्वर्ण भंडार को विदेश भेजकर गिरवी रखना पड़ा। इसके बदले प्राप्त राशि से तत्काल भुगतान किया गया और देश को आर्थिक संकट से बाहर निकाला गया।

2013 में भी सोने पर नियंत्रण की कोशिश
2013 में चालू खाते के घाटे में वृद्धि के चलते सोने के आयात पर चिंता बढ़ी थी। उस समय तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने लोगों से सोना खरीदने में संयम बरतने की अपील की थी और आयात शुल्क भी बढ़ाया गया था।

क्यों हर बार सोने पर नजर जाती है?
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना आयातक देशों में शामिल है। अधिक सोना खरीदने से विदेशी मुद्रा बाहर जाती है, जिससे चालू खाते का घाटा बढ़ता है। जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं या डॉलर मजबूत होता है, तब यह दबाव और बढ़ जाता है।

इसी कारण संकट के समय सरकारें अक्सर सोने की खरीद कम करने की अपील करती रही हैं, ताकि आर्थिक संतुलन बनाए रखा जा सके।

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