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ईंधन के बढ़ते रेट के बीच सरकार का बड़ा प्लान: पेट्रोल में अब इतने प्रतिशत तक एथेनॉल मिलाने की तैयारी

KHULASA FIRST

संवाददाता

19 मई 2026, 6:33 pm
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ईंधन के बढ़ते रेट के बीच सरकार का बड़ा प्लान

खुलासा फर्स्ट, नई दिल्ली।
भारत अब ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाते हुए पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा और बढ़ाने की तैयारी में जुट गया है। केंद्र सरकार ने मौजूदा E20 योजना से आगे बढ़ते हुए E22, E25, E27 और E30 फ्यूल ब्लेंड के लिए तकनीकी मानक तैयार करना शुरू कर दिया है।

30 प्रतिशत तक एथेनॉल मिलाया जा सकेगा
आने वाले समय में पेट्रोल में 22 से 30 प्रतिशत तक एथेनॉल मिलाया जा सकेगा। सरकार के इस कदम को विदेशी कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

वैकल्पिक ईंधन की दिशा में तेजी से काम कर रही
हाल के वर्षों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव ने भारत जैसे आयात-निर्भर देशों की चिंता बढ़ाई है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। इसी पृष्ठभूमि में भारत सरकार अब वैकल्पिक ईंधन की दिशा में तेजी से काम कर रही है।

वर्तमान में देशभर में E20 फ्यूल लागू किया जा रहा
18 मई को जारी अधिसूचना में Bureau of Indian Standards ने नए एथेनॉल मिश्रित ईंधनों के लिए तकनीकी मानक जारी किए हैं, जो 15 मई 2026 से लागू हो चुके हैं। वर्तमान में देशभर में E20 फ्यूल लागू किया जा रहा है, जिसमें पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाता है। अब सरकार भविष्य की जरूरतों को देखते हुए अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के लिए भी इंजन और वाहन तकनीक तैयार करना चाहती है।

टिकाऊ और बेहतर प्रदर्शन देने वाले हों
नए मानकों में फ्यूल की गुणवत्ता, ऑक्टेन लेवल, सल्फर सीमा, पानी की मात्रा, वाष्प दबाव, जंग से सुरक्षा और ईंधन की स्थिरता जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल किया गया है। इन नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में फ्लेक्स-फ्यूल और हाई एथेनॉल सपोर्ट करने वाले वाहन सुरक्षित, टिकाऊ और बेहतर प्रदर्शन देने वाले हों।

सरकार के इस फैसले का स्वागत किया
एथेनॉल उद्योग से जुड़े संगठनों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे देश में बढ़ते एथेनॉल उत्पादन का बेहतर उपयोग हो सकेगा और स्वच्छ ईंधन आधारित परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।

एथेनॉल उत्पादन क्षमता करीब 2 अरब लीटर
उद्योग के अनुसार भारत की एथेनॉल उत्पादन क्षमता करीब 2 अरब लीटर तक पहुंच चुकी है, लेकिन तेल कंपनियों की खरीद अभी लगभग 1 अरब लीटर तक सीमित है। ऐसे में नए ब्लेंड लागू होने से एथेनॉल की मांग और निवेश दोनों बढ़ने की संभावना है।

किसानों और चीनी उद्योग को भी बड़ा लाभ मिलेगा
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन को सफलतापूर्वक लागू कर लेता है, तो इससे पेट्रोल आयात बिल में कमी आने के साथ किसानों और चीनी उद्योग को भी बड़ा लाभ मिलेगा। गन्ने और अन्य कृषि आधारित उत्पादों से बनने वाले एथेनॉल की मांग बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।

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