गंगोत्री में मनाया गंगा जन्मोत्सव: तीर्थयात्री अब कर सकेंगे मां गंगा के शृंगार दर्शन
KHULASA FIRST
संवाददाता

मंदिर समिति का फैसला; गंगोत्री में दर्शन से पहले गैर-हिंदुओं को पीना होगा पंचगव्य
वास्तविक श्रद्धालुओं को अनुमति सुनिश्चित करने के लिए उठाया बढ़ा कदम
खुलासा फर्स्ट, उत्तरकाशी।
गंगा के जन्मोत्सव गंगा सप्तमी पर्व पर गंगोत्री धाम और मार्कण्डेय पुरी मुखबा गांव में धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान गंगोत्री धाम में मां गंगा की विशेष पूजा-अर्चना के साथ मां गंगा की मूर्ति का शृंगार किया गया।
इसके बाद अब दिवाली लक्ष्मी पूजन तक गंगोत्री में श्रद्धालु मां गंगा के शृंगार दर्शन कर सकेंगे। वहीं मार्कण्डेय पुरी मुखबा में दीपदान, विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान के साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
गंगा सप्तमी पर गंगोत्री धाम मंदिर में सुबह से ही मां गांगा की विशेष पूजा अर्चना शुरू हो गई थी। ब्रह्म मुहूर्त पर गंगा के निर्वाण दर्शन करने के बाद तीर्थ पुरोहितों ने दुग्धाभिषेक, जलाभिषेक, फल, शृंगार चढ़ाने के बाद गंगा स्तुति, सहस्रनाम पाठ, गंगा लहरी पाठ व श्री शुक्त पाठ के बाद मंगल आरती की। इसके बाद धाम में मौजूद सभी तीर्थ पुरोहितों ने मां गंगा के शृंगार दर्शन किए।
मंदिर में शृंगार दर्शन के बाद तीर्थ पुरोहितों, गंगा सभा व मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने मां गंगा से देश की खुशहाली की कामना की। गंगोत्री धाम के तीर्थ पुरोहित राजेश सेमवाल ने बताया कि अक्षय तृतीय से पहले मां गंगा के निर्वाण दर्शन हुए थे लेकिन गंगा सप्तमी से लक्ष्मी पूजन तक शृंगार दर्शन होंगे।
वहीं, मार्कण्डेय पुरी मखबा गांव में श्री गंगाजी सेवा ट्रस्ट की ओर से 11 हजार दीपदान किया गया। साथ ही धराली आपदा में दिव्यंगत लोगों व विश्व शांति के लिए हवन यज्ञ किया गया। वहीं, टकनौर क्षेत्र की महिला मंगल दल के साथ ही विभिन्न सांस्कृतिक दलों की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी गई।
इस दौरान समाज में विभिन्न उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित किया गया। इस मौके पर अशोक सेमवाल, लोकेंद्र बिष्ट, हर्ष रावत, सीओ रविकांत सेमवाल आदि मौजूद रहे।
उत्तराखंड में अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर चार धाम यात्रा का औपचारिक आगाज हो चुका है, लेकिन इस बार तीर्थस्थलों की पवित्रता और परंपराओं को लेकर नियमों में कड़ाई बरती जा रही है। गंगोत्री मंदिर समिति ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित करते हुए स्पष्ट किया है कि मंदिर परिसर में गैर-हिंदुओं को प्रवेश तभी दिया जाएगा, जब वे ‘पंचगव्य’ का सेवन करेंगे। समिति का तर्क है कि इससे सनातन धर्म के प्रति आगंतुक की निष्ठा और श्रद्धा की पुष्टि हो सकेगी।
गंगोत्री में ‘पंचगव्य’ और शुद्धिकरण की परंपरा
गंगोत्री मंदिर समिति के अनुसार, मंदिर में प्रवेश के इच्छुक गैर-हिंदू तीर्थयात्रियों को गाय के दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर के मिश्रण यानी ‘पंचगव्य’ का सेवन करना होगा। यमुनोत्री मंदिर समिति के प्रवक्ता पुरुषोत्तम उनियाल ने इस परंपरा का समर्थन करते हुए कहा कि सनातन धर्म में किसी भी अनुष्ठान की पूर्णता पंचगव्य के बिना नहीं मानी जाती।
उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में मंदिर में ऐसे लोगों की भीड़ बढ़ी है जिनका जुड़ाव सनातन परंपराओं से नहीं है, इसलिए यह कदम केवल वास्तविक श्रद्धालुओं को अनुमति सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
यमुनोत्री ने अपनाया ‘अतिथि देवो भव’ का मार्ग
एक ओर जहाँ गंगोत्री और बद्रीनाथ-केदारनाथ में नियमों को सख्त किया गया है, वहीं यमुनोत्री मंदिर समिति ने अलग रुख अपनाया है। यमुनोत्री समिति ने स्पष्ट किया है कि वे ‘अतिथि देवो भव’ की परंपरा का पालन करेंगे। यहाँ जाति या धर्म के आधार पर भेदभाव किए बिना सभी भक्तों का स्वागत करने का निर्णय लिया गया है। समिति का मानना है कि धाम के दर्शन के लिए आने वाले हर व्यक्ति का स्वागत होना चाहिए।
बद्रीनाथ और केदारनाथ में देना होगा शपथ-पत्र
श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने भी सुरक्षा और धार्मिक मर्यादा के मद्देनजर कड़े रुख के संकेत दिए हैं। समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी की अध्यक्षता में हुई बजट बैठक में एक प्रस्ताव पारित किया गया, जिसके तहत गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर औपचारिक पाबंदियां लागू की गई हैं।
यहाँ आने वाले गैर-हिंदू आगंतुकों से उनकी आस्था की पुष्टि करने वाला एक शपथ-पत्र मांगा जा रहा है। द्विवेदी के अनुसार, देवभूमि के पवित्र स्थलों की प्राचीन मर्यादा को बनाए रखने के लिए इन नियमों को औपचारिक रूप देना समय की मांग है।
संबंधित समाचार

चर्चित अभि तोमर हत्याकांड की आग भिंड तक जा पहुंची:इंदौर की गैंगवार का बदला लेने चली गोलियां

शौक पूरे करने के लिए करता था चोरी:दो ऑटो किए बरामद; रात के अंधेरे में उड़ाता था वाहन, पुलिस ने किया गिरफ्तार

सिंहस्थ की जमीन से हटाया अतिक्रमण:20 अवैध मकान ध्वस्त 3 हेक्टेयर जमीन को कब्जा मुक्त; पुलिस बल की मौजूदगी में अभियान चलाया

इस अधिकारी ने बढ़ाया देवी अहिल्या की नगरी का गौरव:ओडिशा के राज्यपाल की एडीसी बनी; ऐसा करने वाली पहली महिला ऑफिसर भी
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!