पूर्वी रिंग रोड और इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन के खिलाफ खोला मोर्चा: कलेक्टोरेट पर किसानों का अर्धनग्न प्रदर्शन; एक किसान की बिगड़ी तबीयत
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
पूर्वी रिंग रोड और इंदौर–मनमाड़ रेल लाइन परियोजना के खिलाफ किसानों का गुस्सा उफान पर है। गुरुवार को सैकड़ों भूस्वामी कलेक्टोरेट पहुंच गए और अर्धनग्न होकर भू-अधिग्रहण के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। साफ शब्दों में कहा अपनी उपजाऊ और सिंचित भूमि किसी कीमत पर नहीं देंगे। कई किसानों के हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर लिखा था— ‘उपजाऊ जमीन बचाओ’, ‘सरकारी बंजर भूमि पर रिंग रोड बनाओ’ और ‘किसानों का हक मत छीनो।`
उपलब्ध है सरकारी जमीन- प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया सरकार उपजाऊ एवं सिंचित भूमि अधिग्रहित कर किसानों को बर्बाद करने पर तुली है, जबकि 161 किमी के पुराने सर्वे के अनुसार शासकीय, बंजर, पथरीली और असिंचित जमीन है, जहां रिंग रोड का निर्माण किया जा सकता है।
पूर्वी क्षेत्र में पहले से चार सड़कें हैं फिर नई सड़क के नाम पर कृषि भूमि नष्ट करने की क्या आवश्यकता है? बायपास के पास रिजर्व जमीन भी है लेकिन उसे छोड़कर किसानों की जीविका पर वार किया जा रहा है।
सम्मान लौटाने की पेशकश- प्रदर्शन में दो किसान ऐसे भी शामिल थे, जिन्हें सरकार ने उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रशस्ति-पत्र दिया है। किसानों रामेश्वर और संतोष ने सरकार को सम्मान लौटाने की पेशकश की। उनका कहना था जब जमीन ही नहीं बचेगी तो सम्मान का क्या अर्थ रह जाएगा।
धूप में बिगड़ी तबीयत, एंबुलेंस बुलानी पड़ी- तेज धूप में अर्धनग्न प्रदर्शन कर रहे एक किसान की तबीयत बिगड़ गई। एसडीएम अजयभूषण शुक्ला ने तत्काल पानी पिलाया और एंबुलेंस बुलवाई।
भीषण गर्मी के कारण किसानों के साथ-साथ ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को भी प्यास से जूझना पड़ा। जिला प्रशासन को मौके पर पानी की व्यवस्था करनी पड़ी।
मुआवजा नहीं चाहिए: संतोष सोनकिया
किसान संतोष सोनकिया ने कहा सिंहस्थ के लिए पूर्वी आउटर रिंग रोड की योजना बनाई गई है, जबकि इसकी कोई वास्तविक आवश्यकता नहीं है। उनकी जैविक खेती की जमीन भी अधिग्रहित की जा रही है। हमें मुआवजा नहीं चाहिए। जमीन अधिग्रहित नहीं होने देंगे। यह लड़ाई सिर्फ मेरी नहीं, 1200 से अधिक किसानों की है। दो वर्ष से लगातार शासन-प्रशासन को आवेदन दे रहे हैं।
44 गांवों की उपजाऊ जमीन पर खतरा
किसान संघ ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की है परियोजना को या तो निरस्त किया जाए या वर्तमान बाजार भाव का कम से कम चार गुना मुआवजा दिया जाए। संघ के अनुसार 44 गांवों की अति उपजाऊ और सिंचित भूमि इस परियोजना से प्रभावित होगी, जहां साल में तीन से चार फसलें ली जाती हैं। बिना सहमति अधिग्रहण मौलिक अधिकारों का हनन किसानों का कहना है स्वीकृति के बिना भूमि अधिग्रहण उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
किसानों की प्रमुख मांगें
पूर्वी रिंग रोड निरस्त किया जाए
अलाइनमेंट 5–6 किमी दूर शासकीय या बंजर भूमि के लिए करें
अधिग्रहण जरूरी होने पर वर्तमान बाजार मूल्य से चार गुना मुआवजा मिले
सभी किसानों को समान मुआवजा मिले
कृषिभूमि की गाइडलाइन दर बाजार मूल्य के अनुरूप बढ़ाई जाए
संबंधित समाचार

वीडियो देखिये, पुलिस ने किया बड़ा खुलासा:इतने लाख की चांदी चोरी का मास्टरमाइंड नौकर निकला; दो आरोपी गिरफ्तार

स्मार्ट पुलिसिंग के डेमो में उड़ान के दौरान फायर फाइटिंग ड्रोन हुआ फेल

बिल्डर से पांच करोड़ रुपए की रंगदारी का हुआ खुलासा:लोकल गुर्गों के सहारे लॉरेंस गैंग का नेटवर्क

अस्पताल पहुंचे मंत्री और संभागायुक्त:सड़क दुर्घटना में घायल मरीजों से मिले; बेहतर उपचार का विश्वास दिलाया
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!