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15 वर्ष तक तो उसे बेटी समझा: फिर हुआ चौंकाने वाला खुलासा; वो तो बेटा निकला, यह खामियाजा उठाना पड़ा

KHULASA FIRST

संवाददाता

11 मार्च 2026, 1:15 pm
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15 वर्ष तक तो उसे बेटी समझा

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्य प्रदेश के एक आदिवासी परिवार में जन्मी बच्ची को परिवार ने 15 साल तक बेटी की तरह पाला। पढ़ाई और खेलकूद में आगे रहने वाली वह बच्ची 2023 के एशियन गेम्स तक पहुंच गई। लेकिन वहां किए गए ब्लड टेस्ट ने उसकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी।

महिलाओं की तुलना में अधिक टेस्टोस्टेरोन
टेस्ट में पाया गया कि उसके शरीर में महिलाओं की तुलना में अधिक टेस्टोस्टेरोन था। आगे की जांच में क्रोमोसोम XY पाए गए और शरीर में अंडकोष मौजूद थे। यह जानकारी परिवार और बच्ची दोनों के लिए सदमे की बात थी।

नहीं मिला समाधान
परिवार ने कई जगह इलाज की कोशिशें कीं, लेकिन समाधान नहीं मिला। इसके बाद वे एम्स भोपाल पहुंचे। डॉक्टरों की टीम ने विस्तृत जांच और काउंसलिंग के बाद जटिल सर्जरी की। शरीर में मौजूद अंडकोष और अविकसित पुरुष अंग को हटाया गया। अब वह पूरी तरह महिला के रूप में सामान्य जीवन जी रही है।

जन्म के समय भी बेटी बताई गई थी
परिवार के अनुसार रश्मि (बदला हुआ नाम) का जन्म सामान्य प्रसव से हुआ था और डॉक्टरों ने भी उसे बेटी बताया था। परिवार ने उसकी परवरिश भी लड़कियों की तरह की।एशियन गेम्स में खेलते समय उसे रोक दिया गया।

विशेष ट्रांसजेंडर क्लीनिक
परिवार ने कई डॉक्टरों को दिखाया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं मिला। फिर एम्स भोपाल के विशेष ट्रांसजेंडर क्लीनिक के बारे में जानकारी मिली। विस्तृत जांच में पता चला कि बाहरी बनावट पूरी तरह महिला जैसी है, लेकिन क्रोमोसोम XY हैं। पेट के निचले हिस्से में दो छोटे अंडकोष मौजूद थे, जो टेस्टोस्टेरोन का उत्पादन कर रहे थे।

परिवार की सहमति से महिला जीवन का निर्णय
डॉक्टरों ने बच्ची और परिवार को काउंसलिंग दी। उन्हें बताया गया कि वह पुरुष या महिला, दोनों में से किसी रूप में जीवन चुन सकती है। परिवार ने महिला के रूप में जीवन जारी रखने का निर्णय लिया।

जटिल सर्जरी चार विभागों की टीम ने की
सर्जरी के लिए स्त्री रोग, मनोचिकित्सा, बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी और यूरोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों की टीम बनाई गई। पहले चरण में शरीर में विकसित छोटे पुरुष अंग को माइक्रो प्लास्टिक तकनीक से हटाया गया, संवेदनशीलता बरकरार रखी गई। दूसरे चरण में पेट में मौजूद अविकसित अंडकोष को हटाया गया। डॉक्टरों ने परिवार को स्पष्ट कर दिया कि भविष्य में मां बनने की संभावना नहीं है।

एम्स भोपाल में हर महीने 10-12 सर्जरी
एम्स के बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अभिनव सिंह के अनुसार, हर महीने 10-12 मरीजों की सर्जरी होती है। इनमें करीब 60% केस मेल से फीमेल और 40% फीमेल से मेल परिवर्तन के होते हैं। सिर्फ सर्जरी ही नहीं, बल्कि विस्तृत काउंसलिंग और हार्मोन थेरेपी भी की जाती है। सही समय पर जांच, उपचार और सामाजिक समर्थन मिलने पर मरीज सामान्य और सम्मानजनक जीवन जी सकते हैं।

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