देखिये वीडियो, नेपाल में बाढ़ ने मचाई भारी तबाही: 17 की मौत; 300 से ज्यादा लोग लापता, इनमें 105 भारतीय पर्यटक भी शामिल
KHULASA FIRST
संवाददाता
खुलासा फर्स्ट, काठमांडू।
तिब्बत से अचानक आई बाढ़ ने नेपाल के रसुवा जिले में भारी तबाही मचा दी है। भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से टिमुरे और स्याब्रुबेसी इलाके में कई घर और अन्य संपत्तियां क्षतिग्रस्त हुई हैं। बाढ़ की चपेट में एक हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट भी आ गया और तेज बहाव में बह गया।
जानकारी के मुताबिक, हादसे में अब तक 17 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। वहीं बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
384 लोग लापता, 105 भारतीय भी शामिल
नेपाल के पर्यटन विभाग के अनुसार बाढ़ के बाद 384 लोगों का पता नहीं चल रहा है। इनमें 291 विदेशी पर्यटक शामिल हैं। लापता विदेशी नागरिकों में 105 भारतीय बताए गए हैं। प्रभावित क्षेत्र में अचानक पानी बढ़ने और भूस्खलन के कारण राहत एवं बचाव कार्य में भी मुश्किलें आ रही हैं। प्रशासन लापता लोगों की तलाश में जुटा है और नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
हिमस्खलन से नदी का रास्ता रुकने का अनुमान
बाढ़ की वजह को लेकर शुरुआती आकलन में सामने आया है कि नेपाल की ओर से आया एक बर्फीला हिमस्खलन ल्हेंदे नदी में गिर गया। इससे नदी का प्रवाह बाधित हुआ और पानी जमा होने लगा।
बाद में अचानक पानी नीचे की ओर बह निकला, जिसका असर भोटेकोशी नदी के पूरे सिस्टम पर पड़ा। इसी दौरान तिब्बत क्षेत्र में भूकंप आने की जानकारी भी सामने आई है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, सुबह 8:37 बजे 4.4 तीव्रता का भूकंप आया था। इसका केंद्र गोसाइंकुंड से करीब 47 किलोमीटर उत्तर में बताया गया है।
ग्लेशियल झील फटने की आशंका
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए अधिकारियों को ग्लेशियल झील के अचानक फटने यानी GLOF की आशंका भी है। इसकी वजह यह है कि रसुवा में पिछले 24 घंटे में 7 मिमी से ज्यादा बारिश दर्ज नहीं हुई थी। ऐसे में स्थानीय बारिश को अचानक आई बाढ़ की मुख्य वजह नहीं माना जा रहा है।
ICIMOD-UNDP की 2020 की स्टडी के अनुसार भोटेकोशी बेसिन में 122 ग्लेशियल झीलें मौजूद हैं। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इनमें से किसी झील के फटने से बाढ़ आई या नहीं।
सैटेलाइट तस्वीरों से स्रोत तलाश रहे विशेषज्ञ
अधिकारियों और विशेषज्ञों की टीमें बाढ़ के वास्तविक स्रोत का पता लगाने में जुटी हैं। इसके लिए सैटेलाइट इमेज और तकनीकी आंकड़ों का अध्ययन किया जा रहा है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि बाढ़ हिमस्खलन, ग्लेशियल झील फटने या किसी अन्य प्राकृतिक घटना के कारण आई।
टिमुरे और स्याब्रुबेसी में भारी नुकसान
बाढ़ से टिमुरे और स्याब्रुबेसी क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं। कई घरों और दूसरी संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है। टिमुरे में बाढ़ और भूस्खलन से बड़े पैमाने पर नुकसान की आशंका है।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालना और नुकसान का वास्तविक आकलन करना है। मृतकों और लापता लोगों का आंकड़ा राहत अभियान आगे बढ़ने के साथ बदल सकता है।
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