चारधाम यात्रा में आस्था का सैलाब: पांच दिनों में 1.30 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, देहरादून।
उत्तराखंड की चार धाम यात्रा में इस बार श्रद्धा का अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिल रहा है। यात्रा शुरू होने के महज पांच दिनों के भीतर ही 1 लाख 30 हजार से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, जिससे धामों में ‘हाउसफुल’ जैसी स्थिति बन गई है। बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के पहले ही दिन 14 हजार से ज्यादा भक्तों ने दर्शन किए। वहीं, केदारनाथ धाम में सिर्फ दो दिनों में 63 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। आंकड़े इस बात का संकेत दे रहे हैं कि इस बार यात्रा नए रिकॉर्ड बना सकती है। अब तक यात्रा के लिए 21 लाख से अधिक श्रद्धालु पंजीकरण करा चुके हैं। शनिवार को भुकुंड भैरव मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही केदारनाथ धाम में नित्य पूजा-अर्चना और आरती विधिवत शुरू हो जाएगी, जिससे धार्मिक गतिविधियां और तेज होंगी।
उधर, बद्रीनाथ धाम में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवान तप्त कुंड और अलकनंदा नदी के आसपास स्वच्छता अभियान चलाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए चारों धामों में सुगम दर्शन के लिए डिजिटल टोकन सिस्टम लागू किया गया है, जिससे भीड़ प्रबंधन में मदद मिल रही है। चार धाम यात्रा के दौरान श्रद्धालु अलग-अलग धामों से विशेष प्रसाद भी साथ लाते हैं। यमुनोत्री से पके हुए चावल, गंगोत्री से गंगाजल, केदारनाथ से भस्म और रुद्राक्ष, जबकि बद्रीनाथ से तुलसी की माला प्रसाद के रूप में लाई जाती है।
बुजुर्गों से आगे बढ़े युवा, 18 किमी पैदल भी नहीं रोक पा रहा उत्साह
परंपरागत रूप से चारधाम यात्रा को मोक्ष प्राप्ति से जोड़ा जाता रहा है और इसमें अधिकतर बुजुर्ग ही शामिल होते थे। आम धारणा थी कि लोग 60 वर्ष की आयु के बाद तीर्थयात्रा पर निकलते हैं, लेकिन अब यह सोच तेजी से बदल रही है। अब युवा भी उतनी ही श्रद्धा और उत्साह के साथ बाबा केदारनाथ के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में युवा श्रद्धालु गौरीकुंड से केदारनाथ धाम तक करीब 18 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर रहे हैं। कठिन चढ़ाई और चुनौतीपूर्ण रास्ते के बावजूद उनका उत्साह कम नहीं हो रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, युवाओं खासकर ‘जेन जी’ का धार्मिक स्थलों की ओर बढ़ता रुझान आने वाले समय में सनातन परंपराओं के लिए सकारात्मक संकेत है। यह दिखाता है कि नई पीढ़ी आधुनिकता के साथ अपनी जड़ों और आस्था से भी मजबूती से जुड़ रही है।
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