जर्जर हुए लाइट हाउस प्रोजेक्ट के फ्लैट: 2 साल में ही रहने लायक नहीं बचे; लीकेज, दीवारों में दरारें और करंट की समस्याएं, हाई कोर्ट ने जारी किया नोटिस
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत बने लाइट हाउस प्रोजेक्ट की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। वर्ष 2023 में शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट अब विवादों में है, क्योंकि महज दो साल के भीतर ही कई फ्लैट रहने लायक नहीं बचे हैं।
2 साल में जर्जर हुए फ्लैट
रहवासियों का आरोप है कि इन फ्लैटों में लगातार लीकेज, दीवारों में दरारें और यहां तक कि घरों में करंट फैलने जैसी खतरनाक समस्याएं सामने आ रही हैं। लोहे के स्ट्रक्चर पर बने इन मकानों में जंग लगने लगी है, जिससे सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
केंद्र सरकार व निर्माण कंपनी को नोटिस जारी
मामले को लेकर 1024 फ्लैटों के रहवासियों ने मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। शुक्रवार को इस पर सुनवाई करते हुए डिवीजन बेंच जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी ने मामले को गंभीर माना और केंद्र सरकार व निर्माण कंपनी को नोटिस जारी किए।
करंट फैलने की घटनाएं सामने आई
याचिका में बताया गया है कि फ्लैटों की दीवारों में दरारें हैं, बाथरूम और कमरों में पानी रिस रहा है, और कई जगह बिजली का करंट फैलने की घटनाएं सामने आई हैं, जो रहवासियों के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं।
समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं
कोर्ट ने इंदौर नगर निगम के आयुक्त को निर्देश दिए हैं कि रहवासियों की शिकायतों के समाधान के लिए तुरंत और प्रभावी कदम उठाए जाएं।
कई बार कर चुके शिकायत
रहवासियों का कहना है कि वे कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब उन्होंने मांग की है कि उन्हें सुरक्षित और टिकाऊ सीमेंट-कंक्रीट से बने वैकल्पिक फ्लैट दिए जाएं।
राहत मिलने की उम्मीद
याचिकाकर्ता नरेंद्र गोस्वामी की ओर से एडवोकेट अनुराग जैन ने कोर्ट में पक्ष रखा। मामला अब हाईकोर्ट की निगरानी में है, जिससे उम्मीद की जा रही है कि प्रभावित परिवारों को राहत मिल सकेगी।
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