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पहली कृषि कैबिनेट बैठक संपन्न: सिंचाई परियोजना को मिली मंजूरी; इन फैसलों पर भी लगी मुहर

KHULASA FIRST

संवाददाता

02 मार्च 2026, 2:07 pm
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पहली कृषि कैबिनेट बैठक संपन्न

खुलासा फर्स्ट, सेंधवा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मध्यप्रदेश की पहली कृषि कैबिनेट बैठक सोमवार को बड़वानी जिले के नागलवाड़ी स्थित शिखरधाम में आयोजित की गई। प्रदेश सरकार की यह छठी डेस्टिनेशन कैबिनेट बैठक रही, जिसमें कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को केंद्र में रखा गया।

8 एकड़ का गार्डन बना अस्थायी मंत्रालय
भीलटदेव मंदिर की तलहटी में बने करीब 8 एकड़ के गार्डन को अस्थायी मंत्रालय का रूप दिया गया। विशेष कैबिनेट बैठक में लगभग 25 मंत्री शामिल हुए। हालांकि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल बैठक में उपस्थित नहीं रहे।

निमाड़ अंचल पर विशेष फोकस
मुख्यमंत्री ने 24 फरवरी को विधानसभा सत्र के दौरान कृषि कैबिनेट की घोषणा की थी। बैठक में निमाड़ अंचल के सात जिलों-खंडवा, खरगोन, बड़वानी, बुरहानपुर, धार, झाबुआ और आलीराजपुर के कृषि, सिंचाई और ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बाबा भीलटदेव के दर्शन, जनजातीय संवाद
बैठक से पहले मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के सदस्यों ने शिखरधाम पहुंचकर बाबा भीलटदेव के दर्शन किए। बैठक के बाद मुख्यमंत्री जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों से संवाद करेंगे और जुलवानिया के भगोरिया हाट में भी शामिल होंगे।

कृषि कैबिनेट के प्रमुख फैसले
किसानों के कल्याण के लिए 6 विभागों की 16 योजनाओं को मंजूरी। इन पर सरकार को 27,746 करोड़ रुपए का वित्तीय भार आएगा।

वरला–पानसेमल माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना को स्वीकृति।

सरसों फसल को भावांतर भुगतान योजना में शामिल करने का निर्णय।

बड़वानी में आधुनिक नवीन कृषि उपज मंडी की स्थापना।

खेतिया कृषि उपज मंडी को आदर्श मंडी के रूप में विकसित किया जाएगा।

नई मत्स्य पालन नीति लागू करने का फैसला, जिससे मछली उत्पादन और उससे जुड़े कारोबार को बढ़ावा मिलेगा। नई मत्स्य नीति के तहत कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर, मार्केटिंग स्ट्रक्चर, रेफ्रिजरेटेड वैन, फीड प्लांट पर निवेश करने वाले मछली उत्पादकों को सब्सिडी दी जाएगी।

इसके अलावा महाविद्यालयों में एग्रीकल्चर विषय पढ़ाने की तैयारी भी की जा रही है।

यह कृषि कैबिनेट बैठक निमाड़ क्षेत्र के किसानों, जनजातीय समुदाय और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के लिए बड़े नीतिगत बदलावों का संकेत मानी जा रही है।

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