अधूरी फैक्ट्री में ही बन रहे थे पटाखे: कारखाना अधिनियम के तहत नहीं था लाइसेंस; 11 मजदूर लौटे बिहार, प्रशासन ने दी सहायता राशि व किराया
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, देवास।
पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट मामले में श्रम विभाग की शुरुआती जांच रिपोर्ट सामने आ गई है। इस हादसे को लेकर श्रम मंत्री प्रह्लाद पटेल ने जानकारी देते हुए बताया कि तकनीकी तौर पर दुर्घटना की मुख्य वजह मैग्नीशियम पाउडर की केमिकल रिएक्शन हो सकती है।
आशंका जताई जा रही है कि निर्माण प्रक्रिया के दौरान मैग्नीशियम पाउडर का पानी से संपर्क हो गया, जिससे यह जोरदार धमाका हुआ। इसके अलावा, एक थ्योरी यह भी है कि इस बारूद की हैंडलिंग के दौरान स्टैटिक चार्ज डेवलप हो गया, जिसने ‘सेल्फ इग्निशन’ (स्वतः आग पकड़ने) का काम किया।
फिलहाल मौके से सबूत जुटाकर बयानों के आधार पर विस्तृत जांच की जा रही है। रिपोर्ट ने प्रबंधन की उन गंभीर लापरवाहियों का भी खुलासा किया है, जो इस हादसे की नींव बनीं। रिपोर्ट के मुताबिक, यह कारखाना अभी पूरी तरह बनकर तैयार भी नहीं हुआ था।
निर्माणाधीन कारखाने में ही बेहद जल्दबाजी दिखाते हुए पटाखों का विनिर्माण काम शुरू कर दिया गया था। यानी जब बुनियादी सुरक्षा ढांचे की टेस्टिंग होनी चाहिए थी, तब वहां धड़ल्ले से बारूद का खेल चल रहा था।
कलेक्टर ने जारी किया था विस्फोटक लाइसेंस
इस यूनिट के संचालन में बड़ी चूक पाई गई है। हालांकि, प्रबंधन के पास कलेक्टर द्वारा जारी एक्सप्लोसिव (विस्फोटक) लाइसेंस तो था लेकिन कारखाना अधिनियम के तहत जो अनिवार्य लाइसेंस लिया जाना चाहिए था, उसे लेने की कार्यवाही नहीं की गई थी।
बिना फैक्ट्री एक्ट के नियमों का पालन किए और बिना पुख्ता सुरक्षा मानकों के यह खतरनाक काम किया जा रहा था। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर प्रशासन इस मामले में सख्त रुख अपनाए हुए है।
हादसे में जान गंवाने वाले पांचों मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए सरकार ने स्पष्ट किया है कि घायलों का इंदौर और देवास के अस्पतालों में बेहतर इलाज कराया जा रहा है और इस लापरवाही के दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
टोंककलां में पसरा मौत का सन्नाटा
ग्राम टोंककला स्थित पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट में पांच लोगों की जान जा चुकी है। 22 घायल हुए थे, जिनमें से 12 लोगों की जिला अस्पताल से छुट्टी कर दी गई है जबकि 10 घायल देवास और इंदौर में भर्ती है, जिनमें से तीन की स्थिति काफी नाजुक बताई जा रही है।
इस घटनाक्रम के बाद पटाखा टोंककला व आसपास सन्नाटा पसर गया है और कई सवाल खड़े हो गए हैं, जिसके जवाब न तो प्रशासन के पास है और ना ही फैक्टरी के मालिक के पास।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर जांच शुरू
मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए आदेश के बाद जांच शुरु हो गई है। शुक्रवार को फैक्ट्री में पुलिस अधिकारियों का आना-जाना लगा रहा। एफएसएल की टीम, प्रदूषण विभाग, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग की टीम भी पहुंची और हर बिंदु का बारीकी से अध्ययन किया है।
हालांकि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इस बात का खुलासा होगा कि किन कारणों व लापरवाही के चलते हादसा हुआ, जिसमें निर्दोष लोगों की जान गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जहां फैक्टरी के लाइसेंसी अनिल मालवीय और अजास खान पिता नजाम खान के खिलाफ रासुका की कार्रवाई कर तीन माह के लिए केंद्रीय जेल भेरूगढ़ भेज दिया है।
यह कार्रवाई एसपी पुनीत गेहलोद द्वारा दिए गए प्रतिवेदन पर कलेक्टर ऋतुराज सिंह द्वारा की गई है। इनके अलावा भूपेंद्र उर्फ छोटू फतेहपुर थाना नरपतगंज जिला अररिया बिहार व महेश निवासी उत्तराखंड के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।
सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 105, 110 एवं 3, 5 के साथ विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908 की धारा 3, 4, 5, 6 तथा विस्फोटक अधिनियम 1984 की धारा 5/9 (ख) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। जिला अस्पताल में भर्ती रहे घायल मजदूर शुक्रवार दोपहर 2 बजे ट्रेन से बिहार रवाना हुए।
11 कर्मचारी गृह राज्य लौटे हैं। प्रशासन की ओर से सभी मजदूरों को भोजन की व्यवस्था के साथ प्रत्येक को 10,000 की सहायता राशि दी गई और बिहार तक का रेल किराया भी उपलब्ध कराया गया।
मजदूरों को ट्रेन में रवाना करने के दौरान मौके पर तहसीलदार सपना शर्मा सहित प्रशासनिक अमला मौजूद रहा। रवाना होने से पहले कर्मचारियों ने बताया विस्फोट में उनके कई साथियों की मौत हो चुकी है।
सीएम डॉ. मोहन यादव ने घायलों से की भेंट
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को फैक्ट्री में हुए हादसे के घायलों से भेंट की व कहा राज्य सरकार प्रभावित लोगों की हरसंभव सहायता के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए अन्य कार्यक्रम निरस्त कर नई दिल्ली से इंदौर पहुंचे। एयरपोर्ट से चोइथराम हॉस्पिटल पहुंचकर देवास के हादसे के कारण घायल हुए नागरिकों से मुलाकात की और उनका उपचार कर रहे चिकित्सकों को आवश्यक निर्देश दिए।
एमवाय अस्पताल में दाखिल घायलों से भी मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य का हालचाल जाना। मुख्यमंत्री ने अमलतास अस्पताल में इलाज करवा रहे घायल नागरिकों से भी भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी घायलों के समुचित उपचार के निर्देश चिकित्सा अधिकारियों को दिए।
इस अवसर पर अन्य जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने हादसे की जानकारी प्राप्त होते ही देवास जिला प्रशासन को हादसे से प्रभावित नागरिकों की हर संभव सहायता के निर्देश दिए थे। इंदौर में उपचार करवा रहे घायलों का पूरा ध्यान रखने के निर्देश भी दिल्ली से ही दिए गए।
इन बिंदुओं पर कार्रवाई..!
कारखाने का बिना रजिस्ट्रेशन संचालन करने पर धारा 6 और 7 (नियम 4 के साथ पढ़ते हुए) का उल्लंघन पाया गया है। इसके तहत दोषी को दो साल तक की जेल या अधिकतम 1 लाख रुपए का जुर्माना (या दोनों) हो सकता है।
फैक्ट्री परिसर में आग से बचाव के पुख्ता इंतजाम न होने पर धारा 38 (नियम 72 के साथ पढ़ते हुए) के तहत मामला बनता है। इसमें भी उल्लंघन पाए जाने पर दो साल तक के कारावास या अधिकतम 1 लाख रुपए के जुर्माने का प्रावधान है।
श्रमिकों का उचित रिकॉर्ड और हाजिरी रजिस्टर न रखने पर धारा 62 (नियम 96 के साथ पढ़ते हुए) के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इस नियम के उल्लंघन पर भी अधिकतम 1 लाख रुपए का जुर्माना और दो साल तक की सजा है।
इतनी संवेदनशील और खतरनाक यूनिट होने के बावजूद धारा 41B के तहत अनिवार्य ‘ऑन-साइट इमरजेंसी प्लान’ तैयार नहीं किया गया था। यह एक बेहद गंभीर श्रेणी का अपराध है, जिसके तहत दोषी को 7 साल तक की जेल और अधिकतम 2 लाख रुपये तक के भारी जुर्माने की सजा हो सकती है।
बारूद और केमिकल जैसे खतरनाक पदार्थों के बीच काम करने वाले श्रमिकों को सुरक्षा संबंधी जरूरी जानकारियां न देने पर नियम 127 और 128 का उल्लंघन पाया गया है।
इसके तहत भी प्रबंधन को 7 साल तक के कारावास और अधिकतम 2 लाख रुपए तक के जुर्माने से दंडित किया जा सकता है।
नकली कीटनाशक फैक्ट्री पर छापा : पैकिंग सामग्री और तैयार माल बरामद
इसी बीच शुक्रवार को नाहर दरवाजा थाना क्षेत्र स्थित लक्ष्मीबाई मार्ग पर कृषि विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में नकली कीटनाशक उत्पाद बनाने का बड़ा मामला सामने आया।
उपसंचालक कृषि भूपेश पाठक को सूचना मिलने के बाद टीम ने छापा मारकर एक मकान से भारी मात्रा में नकली पैकिंग सामग्री और तैयार माल बरामद किया। मौके पर दो महिलाएं पैकिंग करते मिली।
आरोप है किसानों के साथ धोखाधड़ी के लिए कंपनियों की हूबहू पैकिंग तैयार कर उसमें कीटनाशक की जगह पुट्टी भरी जा रही थी। इससे किसानों की फसल खराब होने और कीट-रोग फैलने का बड़ा खतरा था।
कीटनाशक अधिनियम और कॉपी राइट एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है तथा नाहर दरवाजा थाने में केस दर्ज कराया जा रहा है। विभाग का कहना है यह नेटवर्क किसी चैनल के माध्यम से संचालित हो रहा था।
सूचना मिलने पर मुंबई से कंपनी के अधिकारी सुनील पांडे पहुंचे और अधिकारियों के साथ मौके पर निरीक्षण किया। उन्होंने बताया पैकिंग असली जैसी थी, केवल बारकोड स्कैन नहीं हो रहा था।
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