मालवा का रंगोत्सव: रंग बरसाती गेरों के संग आई रे; इंदौर की रंगपंचमी
KHULASA FIRST
संवाददाता

रंग बरसाती निकलेंगी पुराने इंदौर में तीन रंगीली गेर, एक गेर फिर निरस्त
अहिल्या नगरी ही नहीं, प्रदेश का सबसे बड़ा रंगोत्सव कल, प्रशासनिक तैयारियां शुरू
राधा कृष्ण फाग यात्रा में उड़ेंगे ग़ुलाल व सूखे रंग, टेसू के फूूलों से तैयार हुआ गीला रंग भी बरसेगा
इंदौर के सबसे बड़े रंग उत्सव की कलेक्टर-संभागायुक्त ने संभाली कमान, मेयर भी उतरे मैदान में
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
बस..कुछ पल शेष हैं। महज चंद घण्टे। फ़िर वो दृश्य इस शहर की धरा पर उपस्थित होगा, जिसे देख देश ही नहीं, दुनिया भी हर बरस चमत्कृत हो उठती है। ऐसा उत्सव अहिल्या नगरी में जीवंत हो उठेगा, जिसे देखने, जीने और मस्ताने के लिए हर मन सालभर बड़ी बेसब्री से बाट जोहता है।
इंतज़ार के ये पल-क्षण अब बस थमने ही वाले हैं और वो नज़ारा उपस्थित होगा कि लाखोलाख नयन हतप्रभ रह जाएंगे। देश- विदेश के लोगों की आंखें विस्मय से चोड़ी हो जाएंगी। हजारोहज़ार कदम थिरकने को मजबूर हो जाएंगे। पलभर में ही धरती से अंबर तक रंग बिछौना बिछ जाएगा।
रंगों की इस जाजम पर मन मयूर नृत्य कर उठेगा। पूरा शहर रंगों की बौछार से तरबतर हो उठेगा। ग़ुलाल के ऐसे ग़ुबार उड़ेंगे कि आसमान पर दमकता दिनकर भी रंगों के बादल में दुबकने को मजबूर हो जाएगा। सब तरफ लालम-लाल।
नीला, पीला, हरा, गुलाबी रंग छा जाएगा। इंदौर वालों की रंगरंगीली रंगपंचमी जो आ गई है। रंग बरसाती रंगारंग गेर का सालाना उत्सव जो आ गया। मालवा-निमाड़ अंचल ही नहीं, न प्रदेश बल्कि देश का सबसे बड़ा रंगोत्सव जो आ गया है।
जी हां, इंदौर वालो का सबसे अनूठा पर्व ने दस्तक दे दी हैं। जैसी रंगपंचमी इंदौर में मनती हैं, वैसी इस प्रदेश तो क्या देश में भी कहीं नहीं मनाई जाती हैं? इंदौर की रँगपंचमी ने तो बृज मंडल के उन रंगों को भी पीछे छोड़ दिया हैं, जो जगत प्रसिद्ध हैं।
एक दिन के लिए इंदौर भी बृज भूमि में तब्दील हो जाता हैं। और वह दिन होता हैं होली के बाद आने वाली रँगपंचमी का। देखते ही देखते शहर की रँगपंचमी कब देश दुनिया के मानस पटल पर छा गई, कुछ पता नही।
हमारे पुरखों ने तो रंग बरसाती गेर से इस पर्व की शुरुआत की थी। ऐसी गेर, जिसमे कोई भी ‘गैर' नही। सब अपने। यानी शुद्ध भातृत्व भाव, जो होली त्योहार की पहचान भी हैं। सब एक। न कोई छोटा, न बड़ा। न ऊंच, न नीच। न कोई अमीर, न गरीब।
सब एक साथ। वही बन्धु बांधव भाव से। ऐसी अनूठी रंगपंचमी का साक्षी एक बार फ़िर इंदौर बनने जा रहा हैं। 8 मार्च को जब शहर की सड़कों पर रंग बरसाती रंगारंग गेर निकलेगी तो समूचा शहर रंगों की इस बारात में शामिल होगा।
शहर रंगपंचमी के लिए तैयार हो गया हैं। हुरियारों ने ही नही, शहर के ह्रदय स्थल राजवाड़ा ने भी रंगों की अगवानी की तैयारी की हैं। राजवाड़ा स्वयम तो शाल-दुशाले यानी तिरपाल के पीछे छुप गया हैं, ताज़ा ताजा नया नवेला रूप-स्वरूप जो मिला हैं लेकिन अपना आंगन हुरियारों के लिए खोल दिया हैं।
ऐसी ही तैयारियां गेर मार्ग के मकान दुकानों ने भी की हैं। वे सब भी तिरपाल के पीछे दुबक गए हैं। रंग ही इतने बरसेंगे कि अगर दुबके नही तो सालभर फ़िर ये ही रंग मुंह चिड़ाएंगे। सराफा की तंग गली तो पलक पांवड़े बिछाए बैठी है कि कब रंगे पुते, कुर्राटे मारते हुरियारे आये और कम रंग की धमाल मचे।
जिला-पुलिस प्रशासन मुस्तैद, निगम ने किए विशेष बंदोबस्त
मेयर व कलेक्टर की अगुवाई में अफ़सरों ने गेर व फ़ाग यात्रा मार्ग का दौरा कर रंगोत्सव से जुड़े तमाम बंदोबस्त दुरुस्त करने पर जोर दिया। सभी की कोशिश है कि इस बार की रँगपंचमी को एक नया स्वरूप दिया जाए और इस उत्सव को पूर्णतः पारिवारिक किया जाए। यानी न सिर्फ़ फ़ाग यात्रा, बल्कि गेर में भी मातृशक्ति की सहभागिता हो।
गेर से आमतौर पर महिल्ला वर्ग दूर रहता है और सिर्फ दर्शक की भूमिका निभाता है। कारण सिर्फ इतना सा कि गेर में जमकर धींगामस्ती होती है, जो होली के मौसम का मानवीय मिज़ाज होता हैं। इस बार इसी मिज़ाज पर लगाम लगाने की अपील जारी हो रही है ताकि मातृशक्ति भी गेर का आनंद ले सके। वे भी ओटले, अटारी से उतरकर सड़क पर रंग बरसाती गेर का हिस्सा बने।
इस वर्ष भी नहीं निकलेगी रसिया कॉर्नर की गेर
ओल्ड राज मोहल्ला से निकलने वाली इंदौर की प्रतिष्ठित रसिया कॉर्नर की गैर का यह 53 वां वर्ष था लेक़िन गेर आयोजक पंडित राजपाल जोशी का स्वास्थ्य अचानक ख़राब होने से ये गेर निरस्त कर दी गईं। बीते साल भी गेर नही निकली थी। तब जोशी के पिताजी और गेर के प्रमुख संरक्षक पंडित क्रांति सागर जोशी का निधन हो गया था।
पंडित राजपाल जोशी ने बताया कि बीते साल तो पिताजी के चले जाने का दुख हम सभी के दिलों में था। लिहाज़ा इस बार बड़े जोरशोर से इस बार रसिया कॉर्नर परिवार ने गेर की तैयारी की थी। सब इंतजाम भी मुक्कमल हो गए थे लेकिन हरि इच्छा के समक्ष इस बरस भी हम सब नतमस्तक है।
छतों पर बैठ सकेंगे देशी विदेशी सैलानी
इस रंग उत्सव को विश्व धरोहर में शामिल करने के बीते साल से चल रहे प्रयासों को जिला प्रशासन ने नए आयाम दिए हैं। इसके तहत गेर मार्ग से जुड़े मकान, दुकान, ऑफ़िस की छत मातृशक्ति व देशी विदेशी मेहमानों के लिए आरक्षित की जा सकेगी।
जिला प्रशासन ने ऐसी छतों को चिह्नित भी किया है जहां देशी विदेशी सैलानी बैठकर इंदौर के इस अनूठे रंगोत्सव का लुत्फ ले सके। फ़ोन नम्बर भी जारी होगा जिसके जरिये छत की बुकिंग की जा सकेगी।
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