बीटूबी यूपीआई भुगतान पर शुल्क से व्यापार की लागत बढ़ेगी: ग्राहक पर पड़ेगा असर
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
बिजनेस-टू-बिजनेस (बीटूबी) भुगतान में यूपीआई अथवा डिजिटल लेन-देन पर शुल्क लगाए जाने की संभावनाओं को लेकर इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय जैन ने कहा इसका सीधा असर केवल व्यापारी की जेब पर नहीं पड़ेगा, बल्कि इसकी लागत पूरी सप्लाई चेन में आगे बढ़ते हुए अंततः उपभोक्ता तक पहुंच सकती है।
उन्होंने कहा वर्तमान समय में व्यापार का बड़ा हिस्सा डिजिटल भुगतान पर निर्भर है। गारमेंट्स कारोबार में रिटेलर को नियमित रूप से सप्लायर और थोक विक्रेताओं को बड़ी राशि का भुगतान करना पड़ता है। यदि ऐसे बीटूबी डिजिटल भुगतान पर एमडीआर या अन्य शुल्क लागू होता है, तो यह व्यापारी की वास्तविक कारोबारी लागत में जुड़ जाएगा।
उत्पाद लागत बढ़ने की संभावना रहेगी: उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा यदि किसी गारमेंट व्यापारी को सप्लायर को 10 लाख का यूपीआई भुगतान करना है और उस पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगता है, तो व्यापारी को लगभग 4,000 अतिरिक्त लागत वहन करना होगी।
जिन व्यापारियों का सालाना बीटूबी डिजिटल कारोबार करोड़ों रुपए में है, उनके लिए यह राशि लाखों रुपए तक पहुंच सकती है। इसका असर एक स्तर पर नहीं रुकेगा। बैंक अथवा पेमेंट सिस्टम से बढ़ी लागत सप्लायर तक, वहां से थोक व्यापारी और फिर रिटेलर तक पहुंच सकती है। प्रत्येक स्तर पर यदि लागत का कुछ हिस्सा कीमत में शामिल किया गया तो अंततः उत्पाद की लागत बढ़ने की संभावना रहेगी।
उपभोक्ता पर बढ़ेगा आर्थिक भार: उन्होंने कहा व्यापारी अतिरिक्त लागत को हमेशा अपने मुनाफे से ही वहन नहीं कर सकता। कारोबार में मार्जिन सीमित होता है, इसलिए बढ़ी हुई डिजिटल भुगतान लागत धीरे-धीरे वस्तुओं की कीमतों में शामिल हो सकती है और इसका अंतिम भार उपभोक्ता पर पड़ सकता है।
जैन ने सरकार से आग्रह किया कि छोटे एवं मध्यम व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए बीटूबी डिजिटल भुगतान पर किसी भी प्रकार का शुल्क लगाने से पहले उसके व्यापक आर्थिक प्रभाव का अध्ययन किया जाए।
कम या शून्य लागत वाला डिजिटल भुगतान तंत्र हो
सरकार ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देकर पारदर्शिता और औपचारिक अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है। ऐसे में डिजिटल माध्यम से व्यापारिक भुगतान करने वाले कारोबारियों पर अतिरिक्त लागत डालने के बजाय कम या शून्य लागत वाले डिजिटल भुगतान तंत्र को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
डिजिटल भुगतान की सफलता का आधार उसकी सरलता, विश्वसनीयता और कम लागत है। यदि व्यापारिक लेन-देन पर शुल्क बढ़ता है, तो इसका असर केवल भुगतान करने वाले व्यापारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी सप्लाई चेन और अंततः ग्राहक की जेब पर पड़ सकता है।
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