निगम अपर आयुक्त की प्रताड़ना से तंग आकर कर्मचारी ने पीया कीटनाशक: करणी सेना आज करेगी उग्र प्रदर्शन; निगम आयुक्त पर प्रकरण दर्ज करने की मांग
KHULASA FIRST
संवाददाता
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नगर निगम से भेदभाव कर से नौकरी से हटाने से आहत होकर 28 वर्षीय कर्मचारी ने कीटनाशक पीकर आत्महत्या का प्रयास किया। आईसीयू में भर्ती है।
इससे आक्रोशित करणी सेना परिवार आज रीगल चौराहा स्थित पुलिस कंट्रोल रूप पर प्रदर्शन कर अपर आयुक्त प्रखर सिंह पर एफआईआर की मांग करेगी।
करणी सेना परिवार के ऋषिराजसिंह चौहान, कुलदीप सिंह, किशोर सिकरवार, पंकज सिंह राठौड़ और देवेंद्र सिंह सहित बड़ी संख्या में समाजजन कमिश्नर क्षितिज सिंघल के विरुद्ध भी प्रकरण दर्ज करने की मांग करेंगे।
खजराना थाना क्षेत्र में रोबोट चौराहे के पास निवासी महेंद्रसिंह चौहान ने गुरुवार को जहरीली दवा पी ली। अचेत अवस्था में दोस्त उन्हें तत्काल लोटस अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टर के अनुसार अस्पताल लाते समय मुंह से झाग निकल रहा था और स्थिति बेहद नाजुक थी।
तत्काल प्राथमिक उपचार देकर आईसीयू में शिफ्ट किया और खजराना व एमआईजी थाना पुलिस को सूचना दी गई। चौहान ने एक सुसाइड नोट भी लिखा है।
इसमें प्रखर सिंह का नाम स्पष्ट रूप से लेते हुए उन पर प्रताड़ना, घोर भेदभाव कर नौकरी से हटाने का सीधा आरोप लगाया है। परिजन के अनुसार वे नगर निगम के जोन कार्यालय में पदस्थ थे।
बिना पूर्व सूचना या सुनवाई का मौका दिए प्रखर सिंह द्वारा नौकरी से हटाने से गहरे तनाव में थे। परिवार में 11 वर्षीय बेटा, 5 वर्षीय बेटी, पत्नी और वृद्ध माता-पिता हैँ।
उनकी नौकरी जाने से परिवार आर्थिक और मानसिक संकट में आ गया, जिसके चलते उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया।
बहन ने लगाए गंभीर आरोप: बहन उमा चौहान ने नगर निगम अपर आयुक्त प्रखर सिंह पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। मीडिया और पुलिस के सामने कहा भाई ने प्रखर सिंह की घोर प्रताड़ना और पक्षपातपूर्ण रवैये से प्रताड़ित होकर ही आत्महत्या के प्रयास का खौफनाक कदम उठाया।
साफ शब्दों में चेतावनी दी भाई को कुछ होता है, तो उसकी पूरी जवाबदारी प्रखर सिंह की रहेगी। परिजनों का कहना है यह प्रशासनिक हत्या का प्रयास है, जिसके पुख्ता प्रमाण मौजूद हैं।
हमेशा के लिए नहीं हटाया था: प्रखर सिंह
अपर आयुक्त सिंह का कहना है महेंद्र सिंह चौहान के उपचार में निगम सहयोग कर रहा है। स्वयं लोटस हॉस्पिटल गया था। प्रशासन की प्राथमिकता चौहान को बेहतर इलाज मुहैया कराना है। प्रताड़ना और भेदभाव के आरोपों पर कहा यह व्यक्तिगत या प्रताड़ित करने वाली कार्रवाई नहीं थी, बल्कि रूटीन प्रक्रिया थी।
इस प्रकार की कार्रवाई के बाद कर्मचारी अक्सर वापस काम पर लौट आते हैं और उन्हें दोबारा सेवा में ले लिया जाता है, इसलिए नौकरी से हमेशा के लिए निकाले जाने की बात सही नहीं है।
नियमित कर्मचारियों को संरक्षण, गरीब मस्टरकर्मी की बलि
नगर निगम में स्वच्छता के नाम पर चल रहा दोहरा खेल और गंभीर भेदभाव का पूरी तरह खुलासा हो चुका है। प्रखर सिंह द्वारा जारी आदेश और पत्र प्रमाण हैं किस तरह निगम प्रशासन में पद देखकर नियम बदले जाते हैं।
इन दस्तावेजों ने साफ कर दिया है नियमित कर्मचारियों को बचाने और निचले स्तर के मस्टरकर्मियों को प्रताड़ित करने का एकतरफा ढर्रा चल रहा है, जिससे तंग आकर आखिरकार एक कर्मचारी को आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा।
पत्र क्रमांक 286/एसबीएम/2026 दिनांक 14.05.2026 से प्रखर सिंह ने मस्टर कर्मचारी के खिलाफ क्रूर और भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया। निरीक्षण में लापरवाही का मनगढ़ंत हवाला देकर जोन-06 के प्रभारी सहायक मुख्य स्वच्छता निरीक्षक मस्टर कर्मचारी महेंद्रसिंह चौहान को बिना नोटिस या स्पष्टीकरण नौकरी से हटा देने से का तुगलकी फरमान जारी कर दिया।
पारिश्रमिक भुगतान पर तत्काल रोक लगा दी। इसके विपरीत, उन्हीं तारीखों में उसी तरह के निरीक्षणों के दौरान अन्य जोन और वार्डों में बड़ी संख्या में गंदगी, फ्लाईओवर के नीचे कचरे के ढेर और यहां तक कि बायपास पर टाटा मोटर्स के सामने सरेआम कचरा जलने जैसी गंभीर लापरवाही सामने आई, तो प्रखर सिंह का रवैया पूरी तरह नरम हो गया।
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार पत्र क्रमांक 2841/SBM/2026, 2831/SBM/2026, 2953/SBM/2026 व 2963/SBM/2026 के तहत दोषी नियमित कर्मचारियों को महज 'नो वर्क नो पे' का सांकेतिक नोटिस देकर छोड़ दिया गया।
इन प्रमाणों के मुताबिक, अन्य कर्मचारियों पर सिर्फ एक से दो दिन की मामूली वेतन कटौती की ढीली कार्रवाई की गई। इन नियमित और प्रभावशाली कर्मचारियों के कार्यक्षेत्रों में घोर लापरवाही के बावजूद इनकी नौकरी सुरक्षित रही।
यह सबूत गवाही दे रहे हैं प्रखर सिंह की कार्यप्रणाली में अनुशासन का पैमाना कसूर नहीं, पद देखकर तय होता है। इसी प्रशासनिक प्रताड़ना, खुले भेदभाव और भेदभाव पूर्ण रूप से नौकरी से हटा देने से के सदमे के कारण 28 वर्षीय मस्टर कर्मचारी महेंद्रसिंह चौहान मानसिक रूप से टूट गए।
महेंद्रसिंह चौहान के मामले में विभागीय जांच, कारण बताओ नोटिस या स्पष्टीकरण प्रक्रिया को जरूरी नहीं समझा गया। पत्र क्रमांक 286 के जरिए उन्हें सीधे बर्खास्त कर दिया गया। यह कदम न केवल न्याय के प्राकृतिक सिद्धांतों का उल्लंघन है, बल्कि एक गरीब कर्मचारी के परिवार को भुखमरी की कगार पर धकेलने की क्रूर कोशिश भी।
परिजनों का बुरा हाल है और अस्पताल के बाहर नाराज नागरिकों का जमावड़ा लगा है। महेंद्रसिंह चौहान परिवार में कमाने वाले अकेले सदस्य हैं।
दोषी अिधकािरयों को तुरंत हटाकर जेल भेजे
इस गंभीर मामले को लेकर करणी सेना परिवार आज मैदान में उतर रहा है। चेतावनी दी है जिम्मेदार उच्च अधिकारियों पर तत्काल मुकदमा दर्ज नहीं किया तो आंदोलन तीव्र किया जाएगा।
प्रदर्शनकारियों और सामाजिक संगठनों का कहना है शहर को स्वच्छता में नंबर वन बनाने का सेहरा तो बड़े अधिकारी अपने सिर बांधते हैं और वाहवाही लूटते हैं, लेकिन जब जमीन पर कमियां सामने आती हैं, तो सारा ठीकरा इन छोटे मस्टर कर्मियों पर फोड़ दिया जाता है।
करणी सेना परिवार द्वारा पुलिस को सौंपे जाने वाले ज्ञापन में मांग की गई है मामले की निष्पक्ष व उच्च स्तरीय जांच की जाए और दोषी अधिकारियों को तुरंत हटाकर जेल भेजा जाए।
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