तेंदुए का खौफ: कनाड़िया से श्रीजी वैली तक दहशत; वन विभाग की रेस्क्यू टीम 72 घंटे बाद भी खाली हाथ
KHULASA FIRST
संवाददाता

बाथरूम की घेराबंदी टूटने के बाद से सुराग तलाशने में नाकाम रहा अमला
रिहाइशी इलाकों के बाहरी रास्तों पर बढ़ा खतरा
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
बिचौली मर्दाना और कनाड़िया क्षेत्र में मंगलवार रात घुसे तेंदुए को पकड़ने में वन विभाग की नाकामी के बाद अब पूरे क्षेत्र में असुरक्षा और भय का माहौल गहरा गया है। बीते मंगलवार रात को एक बाइक सवार डिलीवरी बॉय पर जानलेवा हमला करने के बाद जब तेंदुआ खुद एक मकान के बाथरूम में घुसकर बैठ गया था, तब विभाग के पास उसे आसानी से काबू करने का सबसे सटीक मौका था।
इसके बावजूद, घंटों तक चली लचर और कछुआ चाल की घेराबंदी का फायदा उठाकर तेंदुआ मुन्नीबाई के घर के बाथरूम की दीवार लांघकर भाग निकला। इस बड़ी विफलता के बाद से लेकर आज तक वन विभाग की रेस्क्यू टीम पूरी तरह खाली हाथ है। हिंसक वन्यजीव की मौजूदगी बरकरार होने और तीन दिन बाद भी कोई सुराग न मिलने से हजारों की आबादी खौफ के साए में जीने को मजबूर है।
पेशेवर तैयारियों, फील्ड ट्रेनिंग और आपातकालीन दावों का खुलासा- यह पूरा मामला वन विभाग की पेशेवर तैयारियों, फील्ड ट्रेनिंग और आपातकालीन दावों का खुलासा करता है। मंगलवार रात करीब आठ बजे जब तेंदुए ने सड़क पर दौड़ते हुए बाइक सवार युवक को अपना निशाना बनाया, तो उसकी लाइव तस्वीरें सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई थीं।
इस जानलेवा हमले के बाद जब ग्रामीणों ने शोर मचाया, तो अपनी जान बचाने के लिए तेंदुआ सीधे एक रहवासी मकान के खुले बाथरूम में जा छिपा था। कायदे से वन विभाग की टीम को तत्काल मौके पर पहुंचकर त्वरित और सटीक कार्रवाई करनी थी, लेकिन मैदानी स्तर पर टीम के पास न तो कोई स्पष्ट रणनीति दिखी और न ही वन्यजीव को रोकने का कोई ठोस बंदोबस्त नजर आया। नतीजा यह हुआ कि पिंजरा लगाने और जाल बिछाने की कागजी खानापूर्ति के बीच तेंदुआ आसानी से चकमा देकर रफूचक्कर हो गया और तब से आज तक वन अमला सिर्फ खाक छान रहा है।
पूरे इलाके में हाई अलर्ट जैसी स्थिति
मुन्नीबाई के घर के बाथरूम से निकलने के बाद वन्यजीव की नई लोकेशन अब सीधे श्रीजी वैली कॉलोनी की तरफ मिलने से पूरे इलाके में हाई अलर्ट जैसी स्थिति बनी हुई है। वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीमें इस नए इनपुट के बाद श्रीजी वैली से लेकर देवगुराड़िया की पहाड़ियों तक फैले पूरे रास्ते पर लगातार सर्चिंग कर रही हैं, ताकि आबादी के बीच मंडरा रहे इस संभावित खतरे को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सके।
72 घंटों में फ्रेश फुटप्रिंट या पुख्ता सुराग हाथ नहीं लगा
इस बीच, वन विभाग की विशेष टीम ने कनाड़िया और बिचौली मर्दाना के सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा घेरा और मजबूत करने का दावा किया है, लेकिन धरातल पर सर्चिंग टीम को पिछले 72 घंटों में तेंदुए का कोई भी फ्रेश फुटप्रिंट या पुख्ता सुराग हाथ नहीं लगा है, जिससे मैदानी अमले की कार्यक्षमता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीण और किसान बेहद डरे
तेंदुए के पकड़े न जाने और वन विभाग के खाली हाथ होने के कारण क्षेत्र के ग्रामीण और किसान बेहद डरे हुए हैं। किसानों ने साफ कर दिया है कि जब तक तेंदुए को दोबारा लोकेट करके सुरक्षित पकड़ा नहीं जाता, तब तक वे खेतों में जाने से पूरी तरह परहेज करेंगे। सुरक्षा के नाम पर केवल एक खाली पिंजरा रख देने से लोगों का डर कम होने के बजाय और बढ़ गया है।
डंडे और टॉर्च के साए में कट रही ग्रामीणों की रातें
वन विभाग के रेस्क्यू प्रभारी और रालामंडल अभयारण्य रेंजर योगेश यादव के नेतृत्व में टीमें लगातार मैदानी स्तर पर मुस्तैद होने का दावा कर रही हैं। अब मुख्य फोकस देवगुराड़िया की पहाड़ियों और उससे जुड़े जंगली रास्तों पर शिफ्ट कर दिया गया है।
वन विभाग का अमला संयुक्त रूप से थर्मल ड्रोन और आधुनिक पिंजरों के साथ झाड़ियों और घने रास्तों पर तेंदुए के पग-मार्क खंगालने की बात कह रहा है। चूंकि मुख्य घटनास्थल से वन क्षेत्र की दूरी मात्र आधा किलोमीटर है, इसलिए आशंका जताई जा रही है कि वन्यजीव रिहाइशी इलाकों के बाहरी रास्तों से होते हुए वापस पहाड़ियों की तरफ रुख कर चुका है या फिर आसपास के घने खेतों में ही कहीं छिपकर बैठा हुआ है।
सुस्त रेस्क्यू प्रणाली से बढ़ा खतरा, शाम ढलते ही घरों में कैद हो रहे लोग
इस पूरे घटनाक्रम ने इंसानों और वन्य जीवों के बीच बढ़ते संघर्ष को लेकर वन विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली का खुलासा कर दिया है। रालामंडल अभयारण्य और देवगुराड़िया की पहाड़ियों से लगातार हिंसक जीवों का आबादी में आना जारी है, मगर विभाग का मैदानी अमला और रेस्क्यू दस्ता स्थिति को समय रहते संभालने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है।
विभाग के पास थर्मल ड्रोन, कैमरे और आधुनिक पिंजरे होने का ढिंढोरा तो पीटा जाता है, लेकिन जब वास्तविक फील्ड ऑपरेशन में एक हिंसक जानवर को काबू करने की बात आती है, तो पूरी टीम असहाय नजर आती है।
रहवासियों को सतर्क रहने की सलाह
श्रीजी वैली और आसपास के रहवासियों को वन विभाग द्वारा सतर्क रहने की सलाह दी गई है, वहीं स्थानीय लोगों ने वन्यजीवों की आबादी में आवाजाही को स्थाई रूप से रोकने के लिए सीमावर्ती रिहाइशी इलाके में फेंसिंग, गश्त और वन कर्मियों की मुस्तैदी स्थाई रूप से बढ़ाने की पुरजोर मांग की है।
लोग शाम ढलते ही अपने घरों में कैद होने को मजबूर
यदि मंगलवार रात को ही बाथरूम के रास्तों को मजबूत जाल से ब्लॉक कर त्वरित कार्रवाई होती, तो शहर की एक बड़ी आबादी को खौफ में न जीना पड़ता। पूरा कनाड़िया और श्रीजी वैली क्षेत्र इस समय दहशत में है। वन अमला लगातार ग्रामीणों के संपर्क में होने और थर्मल कैमरों की मदद से हर संदिग्ध हलचल पर नजर रखने की बात कह रहा है, लेकिन धरातल पर परिणाम शून्य है।
जंगल सिमटे तो आबादी तक पहुंचा शिकारी- मध्यप्रदेश को देश का ‘लेपर्ड स्टेट’ बनने का गौरव तो मिल गया है, लेकिन तेंदुओं की बढ़ती संख्या अब शहरों के लिए नई चुनौती बनती जा रही है। इंदौर वनमंडल में 110 से अधिक तेंदुओं की मौजूदगी दर्ज होने के बाद जंगल से सटी कॉलोनियों, टाउनशिप और बायपास क्षेत्र में उनकी आवाजाही लगातार बढ़ रही है। हाल ही में बिचौली मर्दाना में एक डिलीवरी बॉय पर हुए हमले ने इस खतरे का फिर खुलासा कर दिया है।
पहला संकेत देते हैं कुत्ते
विशेषज्ञों का कहना है कि तेंदुए की मौजूदगी का सबसे पहला संकेत अक्सर कुत्ते ही देते हैं। उनकी सूंघने और सुनने की क्षमता इतनी तेज होती है कि वे दूर से ही तेंदुए की आहट पहचान लेते हैं। ऐसी स्थिति में कुत्ते लगातार एक दिशा में भौंकते हैं, गुर्राते हैं और पूरे झुंड को सतर्क कर देते हैं। वन विभाग का कहना है कि यदि किसी क्षेत्र में रात के समय कुत्तों का असामान्य व्यवहार दिखाई दे तो लोगों को सतर्क हो जाना चाहिए।
एक वर्ष में 35 से अधिक मवेशियों को बनाया शिकार
इंदौर वनमंडल के आंकड़ों के अनुसार चोरल क्षेत्र में 40 से अधिक, महू-मानपुर में करीब 30 और इंदौर रेंज में लगभग 20 तेंदुओं की मौजूदगी है। बीते एक वर्ष में तेंदुओं ने 35 से अधिक मवेशियों को अपना शिकार बनाया है। वहीं शहर से सटी कॉलोनियों में एक दर्जन से अधिक बार तेंदुए देखे जाने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। कुछ मामलों में वन विभाग ने सफल रेस्क्यू किया, जबकि अधिकांश तेंदुए स्वयं जंगल लौट गए।
यहां भी गतिविधियां तेज
20 मार्च 2025 को मांगलिया क्षेत्र की एक टाउनशिप, नवंबर 2023 में सिल्वर स्प्रिंग फेस-2, दिसंबर 2025 में सहारा सिटी, इसके अलावा आईआईटी इंदौर और आरआरकैट परिसर में भी तेंदुओं की गतिविधियां दर्ज की जा चुकी हैं। लगातार सामने आ रही घटनाओं ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है।
डीएफओ लाल सुधाकर सिंह का कहना है कि तेंदुओं की संख्या बढ़ रही है, जबकि सड़क, हाईवे और रेल परियोजनाओं के कारण जंगलों का दायरा लगातार घट रहा है। प्राकृतिक आवास सिकुड़ने से तेंदुए आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसे में लोगों को घबराने के बजाय सतर्क रहने, रात में सुनसान स्थानों पर अकेले नहीं जाने और तेंदुआ दिखाई देने पर तुरंत वन विभाग को सूचना देने की सलाह दी गई है।
तीन दिनों से लगातार बदल रही लोकेशन
बाथरूम के भीतर तेंदुए की मौजूदगी की सटीक लोकेशन मिलने के बावजूद रालामंडल रेस्क्यू टीम और वन परिक्षेत्र का संयुक्त अमला घंटों तक केवल कशमकश में ही जुटा रहा। मौके पर ट्रैंक्विलाइजर गन भी पहुंच चुकी थी, लेकिन एक्सपर्ट शूटर और डॉक्टरों की टीम समय रहते कोई भी त्वरित निर्णय नहीं ले सकी। वनकर्मी सिर्फ दूर से निगरानी करते रहे और जब रात करीब साढ़े बारह बजे तक बाथरूम के भीतर कोई हलचल नहीं हुई, तब जाकर खिड़की और दरवाजों की जांच की गई।
सिर्फ पिंजरा छोड़कर कर ली इतिश्री
जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ कि तेंदुआ वन विभाग के जाल तानने की ढीली व्यवस्था को धता बताकर पहले ही किसी अन्य रास्ते या दीवार फांदकर घने अंधेरे में गायब हो चुका था। इसके बाद अपनी नाकामी को छिपाने के लिए टीम मौके पर सिर्फ एक खाली पिंजरा छोड़कर चुपचाप वापस लौट गई, जो आज तक खाली ही पड़ा है।
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