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भ्रष्ट बीआरसी पर डीपीसी की मेहरबानी का खुलासा: जब कार्रवाई का सवाल पूछा तो बोले संजय मिश्रा "क्या फांसी लगवा दें

KHULASA FIRST

संवाददाता

30 अप्रैल 2026, 7:16 pm
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भ्रष्ट बीआरसी पर डीपीसी की मेहरबानी का खुलासा

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शिक्षा विभाग में ‘भ्रष्टों को संरक्षण' देने का खुला खेल चल रहा है। जनपद शिक्षा केंद्र सांवेर के विवादित विकासखंड स्रोत समन्वयक (बीआरसी) मुकेश पटेल के खिलाफ भ्रष्टाचार और अमानवीय व्यवहार की शिकायतों का अंबार लगा है, लेकिन जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) संजय कुमार मिश्रा उन पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें पद पर बनाए रखने के लिए मेहरबान दिखाई दे रहे हैं।

इस प्रशासनिक मिलीभगत का सबसे शर्मनाक खुलासा तब हुआ, जब मुकेश पटेल के खिलाफ कार्रवाई को लेकर डीपीसी संजय मिश्रा से सवाल किया गया। उन्होंने प्रशासनिक मर्यादाओं को ताक पर रखते हुए झल्लाकर प्रतिप्रश्न किया कि "क्या मुकेश पटेल को फांसी लगवा दें?

एक जिम्मेदार पद पर बैठकर किसी दागी अधिकारी के बचाव में इस तरह के कुतर्क देना यह साफ करता है कि विभाग के भीतर जांच के नाम पर केवल समय काटने का तमाशा किया जा रहा है। सांवेर बीआरसी मुकेश पटेल पर निजी स्कूलों की मान्यताओं और नवीनीकरण के नाम पर लाखों रुपए की अवैध वसूली के गंभीर आरोप हैं।

इसके साथ ही उन पर शासकीय राशि का दुरुपयोग कर कूलर, पंखे और कंप्यूटर जैसे उपकरणों के अवैध हस्तांतरण के भी आरोप लगे, जिन्हें मीडिया में मामला उछलने के बाद आनन-फानन में दफ्तर वापस लाया गया। कार्यालय की महिला कर्मचारियों के साथ अभद्रता और गाली-गलौज के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद भी जिला शिक्षा केंद्र के आला अधिकारियों का मौन रहना कई सवाल खड़े करता है।

संवेदनहीनता का आलम तो यह है कि जर्जर स्कूल भवनों में बच्चों की सुरक्षा के मुद्दे पर मुकेश पटेल ने पूर्व में कहा था कि "जिसको मरना है वह मरेगा», जिसके लिए उन्हें 11 सितंबर 2025 को नोटिस भी दिया गया था, लेकिन मजाल है कि उन पर कोई आंच आई हो।

प्रशासनिक स्तर पर भी पटेल को बचाने के लिए जांचों का मखौल उड़ाया जा रहा है। 18 अप्रैल 2026 को जारी आदेश संख्या 1091 के तहत मध्याह्न भोजन में धांधली और अन्य अनियमितताओं की जांच के लिए तीन दिन का समय दिया गया था, लेकिन आज हफ्तों बीत जाने के बाद भी जांच रिपोर्ट का कहीं अता-पता नहीं है।

जब डीपीसी मिश्रा से इस देरी के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने जांच चल रही है जैसा रटा-रटाया जुमला बोलकर पल्ला झाड़ लिया। हालांकि, जब उन्हें कैमरे के सामने फांसी लगवाने वाला बयान दोहराने को बोला गया, तो उनके सुर तुरंत बदल गए।

जिले में यह चर्चा आम है कि बीआरसी द्वारा की गई कथित वसूली और भ्रटाचार का हिस्सा ऊपर तक जा रहा है, इसीलिए निष्पक्ष जांच के बजाय रक्षण का खेल खेला जा रहा है। पटेल स्वयं अपनी बिगड़ती मानसिक स्थिति का हवाला देकर कई बार पद से मुक्त होने की लिखित इच्छा जता चुके हैं, बावजूद इसके अधिकारियों का उन्हें कुर्सी पर बनाए रखना उनके निजी स्वार्थों की ओर इशारा करता है।

यदि तत्काल प्रभाव से ऐसे कलंकित अधिकारी को पदमुक्त कर निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि इंदौर का शिक्षा विभाग भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है, जहां कायदे-कानून सिर्फ कागजों तक सीमित हैं।

इस संबंध में फिलहाल मुझे कोई जानकारी नहीं
उपरोक्त प्रकरण के संबंध में वस्तुस्थिति यह है कि इस पूरे मामले को जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) संजय मिश्रा ही देख रहे हैं। संबंधित मामले में जांच की प्रगति और कार्रवाई के संबंध में मिश्रा ही जानकारी दे पाएंगे, मुझे इस संबंध में वर्तमान में कोई संज्ञान नहीं है। -शांता स्वामी भार्गव, जिला शिक्षा अधिकारी, इंदौर

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