बेटे की आखिरी जिद याद कर बिलख उठे पिता: क्रूज हादसे में उजड़ गया परिवार; पत्नी की भी चली गई जान
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, जबलपुर।
बरगी डैम में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे में शनिवार को रेस्क्यू टीमों ने दो और बच्चों के शव बरामद किए। मृतकों में 5 वर्षीय श्रीतमिल (पिता कामराज) और 5 वर्षीय विराज सोनी शामिल हैं। सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें बोट और गोताखोरों की मदद से लगातार सर्च ऑपरेशन में जुटी रहीं। हालांकि दोपहर बाद अचानक मौसम खराब हो गया। तेज आंधी, बारिश और ऊंची लहरों के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन को कई बार रोकना पड़ा।
“जैसा भी मिला… हमारा बच्चा अमृत है”
विराज सोनी का शव शनिवार शाम करीब 6 बजे घटनास्थल के पास मिला। उसे पोस्टमॉर्टम के लिए मेडिकल कॉलेज भेजा गया। बेटे का शव देखते ही पिता कृष्णा सोनी फूट-फूटकर रो पड़े। परिवार के एक सदस्य ने भावुक होकर कहा, “जैसा भी मिला, हमारे लिए हमारा बच्चा अमृत है… ईश्वर का शुक्र है कि मिल गया।” इस हादसे में विराज की मां नीतू सोनी की भी पहले ही मौत हो चुकी है, जिनका अंतिम संस्कार एक दिन पहले किया गया था। पिता विराज की आखिरी जिद याद करते हुए फफक उठे।
डूबने के बाद सतह पर आए शव
रेस्क्यू टीम के अनुसार, बच्चों के शव पानी में डूबने के बाद फूलकर सतह पर आ गए थे, जिसके बाद उन्हें बाहर निकाला गया। घटनास्थल के आसपास लगातार तलाशी जारी है, ताकि बाकी लापता लोगों का भी पता लगाया जा सके।
तमिलनाडु भेजे जा रहे शव
हादसे में जान गंवाने वाले तमिलनाडु के पर्यटकों के शवों को जबलपुर के डुमना एयरपोर्ट से कार्गो विमान के जरिए त्रिचि भेजा जा रहा है। शुरुआती तकनीकी दिक्कतों के बाद दूसरे विमान से शव रवाना किए गए। प्रशासन अन्य शवों को भी चरणबद्ध तरीके से उनके गृह राज्यों तक पहुंचा रहा है।
हादसे की भयावह तस्वीर
गौरतलब है कि गुरुवार शाम करीब 5 बजे एमपी टूरिज्म का क्रूज बरगी डैम में डूब गया था। क्रूज में करीब 47 लोग सवार थे, जबकि टिकट केवल 29 लोगों के ही जारी हुए थे। हादसा किनारे से लगभग 300 मीटर दूर हुआ, उस समय हवा की रफ्तार करीब 74 किमी प्रति घंटा थी। तेज हवाओं, अंधेरे और खराब मौसम के कारण राहत कार्य प्रभावित हुआ, हालांकि एसडीआरएफ ने कई लोगों की जान बचाई।
सवालों के घेरे में सुरक्षा व्यवस्था
इस हादसे ने एक बार फिर सुरक्षा मानकों, ओवरलोडिंग और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच जारी है, लेकिन परिजनों के लिए यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि अपनों को खोने का असहनीय दर्द बन चुका है।
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