आईडीए पर किसानों का रातभर धरना: अहिल्या पथ रद्द करने की मांग
KHULASA FIRST
संवाददाता

भोजन पकाने से रोका तो होटल से मंगवाया खाना, अधिकारी पहुंचे तो बिखरे आंदोलनकारी
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
विकास प्राधिकरण कार्यालय के बाहर अहिल्या पथ योजना के विरोध में प्रभावित किसानों का अनिश्चितकालीन आंदोलन लगातार जारी है। भारतीय किसान एवं मजदूर सेना तथा अहिल्या पथ योजना संघर्ष समिति के बैनर तले एकत्रित हुए किसानों ने प्राधिकरण परिसर को ही अपना नया ठिकाना बना लिया है।
दोपहर से शुरू हुआ प्रदर्शन देर रात तक चलता रहा, जहां सैकड़ों किसान जमीन पर ही डटे रहे। विरोध प्रदर्शन के दौरान उस समय तनाव की स्थिति निर्मित हो गई, जब धरना स्थल पर ही भोजन बनाने की तैयारी कर रहे किसानों को पुलिस प्रशासन ने रोक दिया।
तुकोगंज थाना प्रभारी जितेंद्र चौहान और पुलिस बल के साथ पहुंचे एसीपी विनोद दीक्षित ने परिसर में दाल-बाटी पकाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। इस कार्रवाई से आक्रोशित किसान देर रात तक भूखे पेट ही जमीन पर बैठे रहे। अंततः देर रात होटल से भोजन मंगवाकर किसानों ने सामूहिक रूप से खाया और अपना विरोध दर्ज कराया।
किसानों का आरोप है कि प्रशासन उनके शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन कर रहा है और मौलिक व्यवस्थाओं को भी बाधित करने का प्रयास कर रहा है। आधी रात को गतिरोध सुलझाने के उद्देश्य से भारतीय जनता पार्टी ग्रामीण अध्यक्ष श्रवण सिंह चावड़ा आईडीए कार्यालय पहुंचे। उन्होंने आंदोलनकारियों से चर्चा कर धरना समाप्त करने का अनुरोध किया, लेकिन किसान अपनी मांगों पर अड़े रहे और वार्ता बेनतीजा रही।
किसान बोले...हम कोई उग्रवादी नहीं: इसके बाद इंदौर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉ. परीक्षित झाड़े जब भारी पुलिस बल की सुरक्षा में किसानों से बात करने आए, तो स्थिति और बिगड़ गई।
अधिकारियों को पुलिस घेरे में देखकर किसान भड़क उठे। किसानों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे कोई उग्रवादी नहीं हैं, जो पुलिस बल के साये में बात की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वार्ता करनी है तो पुलिस अधिकारियों को पीछे हटाना होगा।
किसानों ने अधिकारियों को कोई भी नया ज्ञापन सौंपने से साफ इनकार कर दिया है। संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों का कहना है कि वे पूर्व में अपनी समस्याएं शासन-प्रशासन के समक्ष दर्ज करा चुके हैं और अब केवल खोखले आश्वासनों के बजाय ठोस लिखित निर्णय चाहते हैं।
आंदोलनकारियों ने सीधे तौर पर चेतावनी दी है कि सरकार या तो अहिल्या पथ योजना को पूरी तरह रद्द करे, अन्यथा वर्ष 2028 के आगामी चुनावों में इसके गंभीर राजनीतिक परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहे। किसानों की मुख्य मांग अहिल्या पथ योजना को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की है।
इसके साथ ही योजना के नाम पर किसानों की जमीनों के क्रय-विक्रय, डायवर्जन और अन्य वैधानिक अधिकारों पर लगाए गए सभी प्रशासनिक प्रतिबंधों को हटाने की मांग की जा रही है। प्रभावित भू-स्वामियों का कहना है कि लंबे समय से उनकी संपत्तियों पर रोक लगे होने के कारण उनका आजीविका संकट गहरा गया है।
भारतीय किसान एवं मजदूर सेना ने घोषणा की है कि जब तक योजना निरस्त करने का आधिकारिक आदेश जारी नहीं होता, तब तक इंदौर विकास प्राधिकरण कार्यालय के समक्ष यह अनिश्चितकालीन धरना इसी प्रकार जारी रहेगा।
किसानों की मांग..योजना को तत्काल प्रभाव से निरस्त करें
भारतीय किसान एवं मजदूर सेना का प्रदेश अध्यक्ष बबलू जादौन ने कहा कि दो साल पहले लागू की गई यह योजना पूरी तरह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। हम कल दोपहर 12 बजे से यहां धरने पर बैठे हैं और आईडीए के सीईओ झाड़े से भी चर्चा हुई है, लेकिन हर बार केवल ज्ञापन देने की बात कही जाती है।
अब ज्ञापन और निवेदन का समय निकल चुका है, सभी किसान आर-पार के मूड में हैं और अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। एक तरफ सरकार प्रदेश में ‘किसान कल्याण वर्ष' मना रही है, वहीं दूसरी तरफ किसानों की हालत यह है कि वे दिनभर से भूखे-प्यासे बैठे हैं और यहां भोजन तक नहीं बनाने दिया जा रहा। आगामी दौरे पर आ रहे मुख्यमंत्री से यही मांग है कि वे मंच से अहिल्या पथ योजना को तत्काल निरस्त करने की घोषणा करें।
10 हजार कृषक परेशान
बड़ा बांगड़दा के किसान संतोष सुनेर ने कहा कि अहिल्यापथ योजना निरस्त होनी चाहिए। ढाई साल से प्राधिकरण और प्रशासन के पास हमारी समस्या का कोई समाधान नहीं है। 8-10 गांवों के करीब 10 हजार किसान परेशान हैं, क्योंकि एक ही गांव में बार-बार जमीन अधिग्रहित करके नई-नई स्कीम डाली जा रही हैं।
हम कल दोपहर 12 बजे से यहां धरने पर बैठे हैं। रात 9 बजे भोजन बनाने की कोशिश की तो पुलिस ने मना कर दिया और कार्रवाई की धमकी दी। हम मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, मुख्यमंत्री और कलेक्टर तक को ज्ञापन दे चुके हैं।
आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। 3 साल में कागज तक आगे नहीं बढ़ा। हमारे पास 4-5 बीघा ही जमीन है, कोई 100-200 बीघा नहीं, जो सब दे दें। जब तक मांग पूरी नहीं होती, हम शंभू और अटारी बॉर्डर की तर्ज पर यहां लंबे समय तक डटे रहेंगे।
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