वृंदावन के प्रसिद्ध संत का भक्तों और शिष्यों के लिए भावुक संदेश: बोले- भक्त मेरी चिंता न करें, भजन और नाम जप में लगाएं मन; तबीयत बिगड़ने के बाद बंद है पदयात्रा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, वृंदावन।
वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज ने अपने भक्तों और शिष्यों के लिए भावुक संदेश जारी किया है। उन्होंने कहा कि भक्त उनकी चिंता न करें, बल्कि श्रीजी के भजन और नाम जप में मन लगाएं।
1 मिनट 19 सेकंड का वीडियो
रविवार को केली कुंज आश्रम ट्रस्ट के यूट्यूब चैनल पर जारी 1 मिनट 19 सेकंड के वीडियो में प्रेमानंद महाराज ने कहा- बिल्कुल चिंता मत करो। हम मिलें न मिलें, बोलें न बोलें, हम आप सबको बहुत प्यार करते हैं। बिना बोले भी तुम्हारे दिमाग में हम रहेंगे। उन्होंने भक्तों से कहा कि वे निश्चिंत होकर भजन करें और गुरु पर विश्वास बनाए रखें। महाराज बोले कि जो भी सेवा में जुड़ा है, वह उसी सेवा में बना रहे और निरंतर नाम जप करता रहे।
बोले- हमारा एकांतवास आपके लिए है
प्रेमानंद महाराज ने वीडियो में कहा कि उनका मौन और एकांतवास स्वयं के लिए नहीं, बल्कि भक्तों के लिए है। उन्होंने कहा कि हमारा जो कुछ होना था, वो हो गया। जो कुछ हो रहा है, वह सब आपके लिए हो रहा है। खूब भजन करो, नाम जप करो, सुखी और प्रसन्न रहो। उन्होंने यह भी कहा कि जब उनका मन होगा, तब वे फिर भक्तों से संवाद करेंगे।
17 मई से बंद है रात्रि पदयात्रा
केली कुंज आश्रम ट्रस्ट के अनुसार 17 मई से प्रेमानंद महाराज की प्रसिद्ध रात्रि पदयात्रा बंद है। उसी दिन शिष्यों ने बताया था कि महाराज की तबीयत ठीक नहीं है, इसलिए वे न तो पदयात्रा कर रहे हैं और न ही भक्तों से एकांतिक मुलाकात। बताया जाता है कि प्रेमानंद महाराज की दोनों किडनियां खराब हैं और उन्हें सप्ताह में 2 से 3 बार डायलिसिस करानी पड़ती है।
गुरु दर्शन के लिए पहुंचे थे वराह घाट
हालांकि स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद 3 दिन पहले प्रेमानंद महाराज अपने आश्रम से निकलकर वराह घाट पहुंचे थे। वहां उन्होंने अपने गुरु संत गोविंद शरण महाराज के दर्शन किए।
रोज डेढ़ किलोमीटर पैदल करते थे यात्रा
स्वास्थ्य खराब होने से पहले प्रेमानंद महाराज रोज तड़के करीब 3 बजे केली कुंज आश्रम से सौभरी वन तक पदयात्रा करते थे। करीब डेढ़ किलोमीटर की इस यात्रा के दौरान हजारों भक्त उनके दर्शन के लिए सड़क किनारे खड़े रहते थे। सामान्य दिनों में करीब 20 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते थे, जबकि वीकेंड और बड़े पर्वों पर यह संख्या लाखों तक पहुंच जाती थी।
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