वर्दी पे वार कब तक: कब टूटेगा सरकार, सियासत और शराब माफिया का खूनी गठजोड़
KHULASA FIRST
संवाददाता

खाकी के सीने पर माफिया का प्रहार बर्दाश्त नहीं
शहादत की आग में तपा पुलिस का संकल्प, अब खाकी ढहाएगी शराब माफिया और उनके राजनीतिक आकाओं का अवैध किला?
सत्ता की छांव में पल रहे अपराधियों का अब काल बने पुलिस
खाकी का हौसला तोड़ने की हर सफेदपोश साजिश करे बेनकाब
क्या टीआई दिलीप पुरी का बलिदान फूंकेगा पुलिस महकमे में नई जान, शराब माफ़िया के खात्मे तक जारी रहेगा महा-अभियान?
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033, खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
एक दौर वह था, जब खाकी का एक अदना-सा जवान भी अगर मोहल्ले या गांव की सड़क से गुजरता, तो अपराधियों के दिल दहल जाते थे और आम जनता के मन में सुरक्षा का एक गहरा सम्मानजनक भाव जागता था।
वर्दी का केवल दिख जाना ही कानून के इकबाल और अनुशासन की गारंटी होता था, लेकिन आज हकीकत इसके उलट है। आज पुलिस का वह पारंपरिक खौफ और धमक गायब होती जा रही है और अपराधी पुलिस की घेराबंदी तोड़कर उन पर गाड़ियां चढ़ाने से भी नहीं हिचक रहे हैं।
खाकी के इस अवसान के पीछे गहरे और चिंताजनक कारण हैं। खाकी का खौफ और सम्मान कम होने का मुख्य कारण अत्यधिक राजनीतिक हस्तक्षेप को अब माना जा रहा है। पुलिस का अपना स्वतंत्र विजन और निर्णय लेने की क्षमता लगभग समाप्त हो गई है।
जब हर छोटे-बड़े मामले, ट्रांसफर और पोस्टिंग में राजनेताओं की पर्चियां और फोन कॉल चलने लगते हैं, तो अपराधियों को यह समझ आ जाता है कि पुलिस के हाथ बंधे हुए हैं। वे पुलिस से डरने के बजाय उनके राजनीतिक आकाओं को मैनेज करना ज्यादा आसान समझने लगते हैं।
मध्य प्रदेश में शराब के कारोबार को ‘राज्याश्रय’ प्राप्त होने के आरोप गहराते जा रहे हैं। ऐसे में अब सरकार के सामने चुनौती है कि वह इन आरोपों को कैसे गलत साबित करे और पुलिस का इकबाल बुलंद करे।
मध्य प्रदेश के देवास (खातेगांव) में अवैध शराब माफिया द्वारा जांबाज थाना प्रभारी दिलीप पुरी की कुचलकर हत्या कर देना सिर्फ एक पुलिस अधिकारी की शहादत नहीं है, बल्कि यह हमारे पूरे कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक तंत्र की अस्मिता पर सीधा प्रहार है।
यह दिल दहला देने वाली वारदात एक बार फिर देश और प्रदेश के नीति-नियंताओं के सामने वही पुराना, कड़वा और यक्ष प्रश्न खड़ा करती है- आखिर कब तक देश की पुलिस राजनीतिक आकाओं और नेताओं के दबाव की बेड़ियों में जकड़ी रहेगी? खाकी को अपराधियों से लड़ने के लिए ‘फ्री हैंड’ क्यों नहीं मिलता?
यह एक खुला रहस्य है कि कोई भी माफिया, चाहे वह शराब का हो, रेत का या जमीन का, बिना राजनीतिक संरक्षण के इतना दुस्साहसी नहीं हो सकता कि वह कानून के रक्षकों को ही कुचलने का माद्दा रख ले।
जब तक अपराधियों को सफेदपोश नेताओं का वरदहस्त मिलता रहेगा, तब तक ऐसे माफियाओं की मनमानी और गुंडागर्दी आम जनता और पुलिस दोनों के सीने पर मूंग दलती रहेगी।
पुलिस सुधारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के कई ऐतिहासिक दिशा-निर्देश फाइलों में धूल खा रहे हैं, क्योंकि सत्ता में बैठे लोग पुलिस को जनता का रक्षक बनाने के बजाय अपनी सत्ता का ‘हथियार’ बनाकर रखना चाहते हैं।
आज समय आ गया है कि पुलिस को अपराधियों से निपटने के लिए न सिर्फ पूरी स्वायत्तता (फ्री हैंड) दी जाए, बल्कि उनके मन में कानून का ऐसा खौफ पैदा करने की इजाजत हो कि वे वर्दी को देखकर कांप उठें।
सभ्य समाज में पुलिस की आक्रामकता किसी तानाशाही का प्रतीक नहीं, बल्कि कानून के इकबाल को बुलंद रखने के लिए एक अनिवार्य औजार है। अगर पुलिस अपराधियों के प्रति नरम या लाचार दिखेगी, तो समाज में अराजकता का जंगलराज फैल जाएगा।
सरकार ने भले ही शहीदों के परिवारों के लिए मुआवजे और नौकरियों की घोषणाएं कर दी हों, लेकिन असली न्याय तब होगा जब इस पूरे तंत्र की गहरी सफाई होगी। नेताओं को अपनी राजनीति चमकाने के लिए माफियाओं को ढाल बनाना बंद करना होगा और पुलिस को बिना किसी फोन कॉल या राजनीतिक दबाव के काम करने की आजादी देनी होगी। यदि अब भी सिस्टम नहीं जागा, तो कल कोई भी ईमानदार अधिकारी अपराधियों के सामने खड़ा होने से पहले सौ बार सोचेगा। और वह दिन हमारे लोकतंत्र की सबसे बड़ी हार होगी।
पुलिस का इकबाल क्यों हो रहा कम, कब तक बंधे रहेंगे हाथ?
आखिर मध्य प्रदेश में पुलिस का इकबाल क्यों कम होता जा रहा है? कब तक खाकी हाथ बांधे सत्ता के समक्ष खड़ी रहेगी? टीआई की निर्मम हत्या के बाद ये सवाल हर तरफ गूंज रहे हैं। खाकी के खौफ में कमी के कई कारण हैं।
कुछ ‘काली भेड़ों’ के कारण पुलिस, प्रशासन और माफिया के बीच एक अपवित्र गठजोड़ बन जाता है। जब तक निचले स्तर से लेकर ऊपर तक हफ्ता वसूली या अवैध धंधों को मूक सहमति मिलती रहती है, तब तक अपराधी बेखौफ रहते हैं।
वे जानते हैं कि पैसा फेंककर सिस्टम को खरीदा जा सकता है। मानवाधिकारों की आड़ और कानूनी पेचीदगियां भी कम जिम्मेदार नहीं। अपराधियों के मानवाधिकारों की चिंता में कई बार पुलिस के हाथ इतने बांध दिए जाते हैं कि वह कड़े कदम उठाने से कतराने लगती है।
आत्मरक्षा या अपराधियों पर सख्ती करने पर खुद पुलिसकर्मियों पर विभागीय जांच या सस्पेंशन की तलवार लटकने लगती है, जिससे उनका मनोबल टूटता है। पुलिसिया इकबाल में कमी का एक अहम कारण संसाधनों और स्टाफ की भारी कमी भी है।
आज भी पुलिस पुराने ढर्रे और सीमित संसाधनों के सहारे आधुनिक और हाईटेक हो चुके अपराधियों से लड़ रही है। थानों में बल की भारी कमी है, जिससे पुलिस 24-24 घंटे काम करके मानसिक तनाव में रहती है और उनका रिस्पांस टाइम तथा आक्रामक प्रभाव कम हो जाता है।
संबंधित समाचार

दिवाली से पहले खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई:5 टन मावा की खेप पकड़ी; जांच के लिए भेजे सैंपल

बीना विधायक के दलबदल मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त:विधानसभा अध्यक्ष को दो महीने में फैसला करने का निर्देश

पानी और साफ-सफाई की समस्या से 900 पुलिसकर्मियों के परिजन परेशान:शिकायतों के बाद भी नहीं हो रहा निराकरण

संघ की सेवा गतिविधियों में समाज का सहयोग जरूरी:सरकार्यवाह बोले-स्वयंसेवक आगे आकर कर रहे काम

कार की पार्किंग और शादी की तैयारी के लिए आठ साल पुराने पेड़ उखाड़े:हरियाली पर चली निगम की जेसीबी; अकेली महिला सीढ़ी पर बैठी रह गई

हनीट्रैप का जाल बिछाकर कारोबारी से लाखों की वसूली:झूठे केस में फंसाने की दी धमकी; फिर मांगे इतने करोड़

ऐसे हो सकता है एमआर-11 का पूरा निर्माण:रास्ते को प्रशासन के कदम का इंतजार

ट्रैफिक पुलिस की चेकिंग में पकड़ा गया युवक:चेसिस नंबर स्कैन करते ही हुआ चौंकाने वाला खुलासा

वीडियो देखिये, केंद्रीय मंत्री ने साधा कांग्रेस पर निशाना:देश में अस्थिरता पैदा करने और चुनाव आयोग की छवि धूमिल करने का प्रयास; लोगों की रगों में प्रजातंत्र का खून दौड़ता है

वीडियो देखिये, 'लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ' पदयात्रा:मुख्यमंत्री बोले-लोकतंत्र और चुनाव आयोग का मजाक बनाने वाली कांग्रेस को जनता कभी माफ नहीं करेगी

दिव्यांग भाई-बहन की पढ़ाई में बाधा नहीं बनेगी गरीबी:कलेक्टर ने दिया भरोसा; बोले- तुम सिर्फ पढ़ाई करो, बाकी चिंता हमारी

वीडियो देखिये, अवैध शराब के खिलाफ प्रशासन का बड़ा एक्शन:जिला बदर और NSA तक की तैयारी; शहर में 34 केस दर्ज; 320 लीटर शराब जब्त

गर्मी में पानी के टैंकरों पर रहेगी CCTV कैमरों की नजर:सभी हाईड्रेंट होंगे कैमरों से लैस; टैंकरों के फेरों और पानी की सप्लाई का रहेगा हिसाब

12वीं के छात्र से बेरहमी से मारपीट:श्मशान ले जाकर बेल्ट-डंडों से पीटा; वीडियो किया वायरल

वीडियो देखिये, टीआई हत्याकांड के बाद गहन सर्च अभियान:नवागत पुलिस अधीक्षक बोले-आरोपियों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी सुनिश्चित होगी; करेंगे सख्त कार्रवाई

ट्रम्प को मिडटर्म चुनाव में बड़ा झटका:दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी हारी

नवविवाहिता ने फांसी लगाकर दी जान:प्रेम विवाह के एक साल बाद उजड़ा संसार; मायके वालों ने लगाए प्रताड़ना के आरोप

राजस्थान में रेलवे ट्रैक पर जोरदार धमाका:45 मिनट पहले गुजरी थी पैसेंजर ट्रेन; 6 ट्रेनें रद्द, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

वीडियो देखिये, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निभाया वादा:बुंदेली गायक सुनील लोधी के आंखों के उपचार की प्रक्रिया शुरू

शराब माफिया के शिकार टीआई की पत्नी का बड़ा आरोप:सेंधवा के नेता ने दी थी धमकी; कहा था- ‘पुरी को नहीं छोड़ेंगे’
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!