दिव्यांग बच्चों का कार्यक्रम किया नहीं और 85 हजार रुपए डकारे: सांवेर ब्लॉक के बीआरसी मुकेश पटेल का एक और कारनामा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भ्रष्ट कारनामों से जिलेभर में कुख्यात हो चुके सांवेर ब्लॉक के बीआरसी मुकेश पटेल ने दिव्यांग बच्चों को भी नहीं छोड़ा और उनके लिए आए 85 हजार रुपए डकार लिए। दिव्यांगों के लिए कार्यक्रम आयोजित कर उपकरण वितरित करना थे, लेकिन कार्यक्रम औपचारिक रूप से हो गया और इसमें आए बच्चों को न तो आने-जाने का खर्च मिला और खाना दिया गया, जबकि इसके लिए शासन ने पैसा दिया था।
इसे लेकर शंका जताई जा रही है कि उक्त पैसा या तो लेप्स हो गया या फिर बीआरसी पटेल ने अपने पास रख लिया।
दरअसल, राज्य शिक्षा केंद्र, भोपाल द्वारा दिव्यांग बच्चों (सीडब्लूएसएन) के कल्याण हेतु हर वर्ष कार्यक्रम आयोजित करने का निर्देश हैं। सांवेर ब्लॉक के करीब 250 दिव्यांग बच्चों को चिह्नित कर उपकरण देने के निर्देश थे, जिसके लिए बच्चों को बुलाया जाना था। कार्यक्रम में बच्चों को भोजन और आने-जाने का खर्च भी दिया जाना था, लेकिन बीआरसी मुकेश पटेल की मनमानी से कार्यक्रम हुआ ही नहीं।
यह पहला मौका है, जब दिव्यांग बच्चों के लिए शासन के निर्देश के बावजूद कोई कार्यक्रम नहीं हुआ। बाद में 18 मार्च को औपचारिक रूप से महज रस्म अदायगी के तौर पर कार्यक्रम आयोजित कर दिव्यांग बच्चों को उपकरण वितरित कर दिए गए।
न तो उन्हें खाना दिया गया और न ही आने-जाने का खर्च। नतीजा ये कि दिव्यांग छात्र-छात्राओं को भूखे ही लौटना पड़ा। इस तरह बीआरसी पटेल की मनमानी के कारण सांवेर ब्लॉक के 250 से ज्यादा दिव्यांग बच्चे शासन की योजना का लाभ लेने से वंचित रह गए।
ये उठ रहे सवाल- सरकारी राशि का उपयोग न होना, बच्चों को लाभ न मिलना और वित्तीय अनियमितता हो जाने का मतलब सीधे-सीधे भ्रष्टाचार है। बीआरसी पटेल की भ्रष्ट कार्यप्रणाली और जिम्मेदारियों के प्रति बरती गई लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं। आखिर आवंटित 85 हजार रुपए की राशि कहां गई? दिव्यांग बच्चों और उनके पालकों ने पटेल के कामकाज की जांच की मांग की है।
सवाल सुन सकपकाए पटेल- इधर, इस मामले में जब पटेल को उनके मोबाइल नंबर 99812-69238 पर कॉल कर इस संबंध में सवाल पूछने पर पहले तो वे सकपकाए, फिर फोन काट दिया। इसके बाद कॉल रिसीव ही नहीं किया।
यह है पूरा मामला
राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के अंतर्गत दिव्यांग बच्चों के लिए निर्देश जारी किए थे कि दिव्यांग बच्चों का चिकित्सीय मूल्यांकन शिविर आयोजित किया जाए और उन्हें उपकरण देने के लिए मेडिकल कैंप लगाए जाएं। इसके लिए प्रति ब्लॉक 55 हजार रुपए स्वीकृत किए गए।
निर्देश ये भी थे कि विश्व दिव्यांग दिवस पर खेलकूद और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, जिनमें दिव्यांग बच्चों की भागीदारी हो और उनकी प्रतिभा निखारी जा सके। इसके लिए अलग से 30 हजार रुपए का बजट दिया गया।
कुल मिलाकर 85 हजार रुपए का बजट निर्धारित किया गया था, लेकिन बीआरसी पटेल ने न तो दिव्यांग बच्चों के उपकरण के लिए मेडिकल कैंप लगा और न ही उनकी खेलकूद व सांस्कृतिक गतिविधियों पर केंद्रित कार्यक्रम आयोजित हुआ।
सूत्रों ने बताया राशि और दिव्यांगों के उपकरण आ गए थे, लेकिन बीआरसी मुकेश पटेल कार्यक्रम का आयोजन करने के लिए तैयार नहीं थे। नतीजा ये कि 18 मार्च को औपचारिक कार्यक्रम आयोजित कर बिना किसी तामझाम के दिव्यांग बच्चों को उपकरण दे दिए गए, जबकि उनके आने-जाने और खाने का खर्च पटेल ने नहीं दिया।
कार्यक्रमों के आयोजन की पूरी जिम्मेदारी बीआरसी मुकेश पटेल के पास है। जो शासनादेश था उसके अनुसार, उन्हें समय-सीमा में दिव्यांग बच्चों के शिविरों और कार्यक्रमों को आयोजित करना था।
साथ ही कार्यक्रम के बाद की रिपोर्ट, फोटोग्राफ और उपयोगिता प्रमाण-पत्र राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल को भेजना थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
संबंधित समाचार

चर्चित अभि तोमर हत्याकांड की आग भिंड तक जा पहुंची:इंदौर की गैंगवार का बदला लेने चली गोलियां

शौक पूरे करने के लिए करता था चोरी:दो ऑटो किए बरामद; रात के अंधेरे में उड़ाता था वाहन, पुलिस ने किया गिरफ्तार

सिंहस्थ की जमीन से हटाया अतिक्रमण:20 अवैध मकान ध्वस्त 3 हेक्टेयर जमीन को कब्जा मुक्त; पुलिस बल की मौजूदगी में अभियान चलाया

इस अधिकारी ने बढ़ाया देवी अहिल्या की नगरी का गौरव:ओडिशा के राज्यपाल की एडीसी बनी; ऐसा करने वाली पहली महिला ऑफिसर भी
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!