इंदौर विकास प्राधिकरण में फर्जी एनओसी का विस्फोट: बिजलपुर जमीन कांड में अफसरों के नाम पर जाली दस्तावेज
KHULASA FIRST
संवाददाता

फर्जी साइन से क्लियर हुआ प्लॉट, अंदरूनी साठगांठ की शंका के चलते पुलिस में शिकायत
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) के नाम पर फर्जी एनओसी जारी कर भूखंड पास कराने का खुलासा हुआ है। नकली हस्ताक्षर, जाली दस्तावेज और अंदरूनी मिलीभगत की आशंका ने सिस्टम को हिला दिया है। शिकायत होते ही पुलिस हरकत में आई और अब पूरे नेटवर्क के खुलासे की तैयारी है।
घोटाले की जड़ 97 पार्ट-4 बिजलपुर की उस जमीन से जुड़ी है, जो आईडीए की योजना में शामिल है। जमीन मालिक की ओर से टीएनसीपी को ले-आउट स्वीकृति का आवेदन दिया गया था, लेकिन जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ।
आईडीए से जारी एनओसी और असली दस्तावेजों के साइन में साफ अंतर मिला। प्लानिंग और भू-अर्जन विभाग के नाम पर पेश दस्तावेज पूरी तरह संदिग्ध पाए गए।
विधि विभाग के कर्मचारी पर शंका, मोबाइल बंद कर गायब
आईडीए के भू-अर्जन अधिकारी सुदीप मीणा और मुख्य नगर नियोजक ने थाना तुकोगंज को पत्र लिखकर साफ कहा है उनके नाम और हस्ताक्षर का फर्जी इस्तेमाल कर एनओसी तैयार की गई। सुदीप मीणा ने माना उनके नकली साइन कर दस्तावेज बनाए गए हैं।
वहीं एडि. डीसीपी रामसनेही मिश्रा ने पुष्टि की है खातीवाला टैंक निवासी जगजीत सिंह ने कथित तौर पर कूटरचित दस्तावेजों के जरिए प्लॉट की अनुमति हासिल की। आईडीए की शिकायत में बड़ा शक विधि विभाग के कर्मचारी शिवम श्रीवास्तव पर जताया गया है।
बताया गया है वे बिना सूचना कई दिनों से गायब है, मोबाइल बंद है और एक वायरल वीडियो में उसकी संदिग्ध भूमिका भी सामने आई है। इससे पूरे मामले में अंदरूनी मिलीभगत और बाहरी नेटवर्क के कनेक्शन की आशंका गहरा गई है।
हर एंगल से होगी पड़ताल
आईडीए ने पुलिस को पत्र में लिखा है प्रस्तुत दस्तावेज फर्जी हैं और विभागीय रिकॉर्ड में नहीं हैं। भू-अर्जन अधिकारी और मुख्य नगर नियोजक के हस्ताक्षर भी कूटरचित पाए गए हैं। पुलिस ने सभी दस्तावेज जब्त कर जांच शुरू कर दी है।
अधिकारियों का कहना है हर एंगल से पड़ताल की जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह मामला सिर्फ फर्जी एनओसी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम में सेंध लगाने वाले बड़े गिरोह की ओर इशारा कर रहा है।
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