नामी स्कूलों में इस नशे की एंट्री का खुलासा: जानिये किस शहर में बढ़ रही चिंता; इतनी कम उम्र के बच्चे भी आ रहे गिरफ्त में
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नशे का नेटवर्क अब खतरनाक रूप से स्कूली छात्रों तक पहुंच चुका है। चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि 12 से 16 वर्ष तक के बच्चे भी एमडी ड्रग्स (मेफेड्रोन) जैसी घातक लत की गिरफ्त में आ रहे हैं। विशेषज्ञों और काउंसलर्स के पास हर महीने ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जहां अभिभावक अपने बच्चों को नशे की आदत छुड़ाने के लिए लेकर पहुंच रहे हैं।
जिज्ञासा और दोस्ती से शुरू, लत में बदल रहा जहर
मनोचिकित्सकों के अनुसार, यह लत अक्सर “सिर्फ एक बार ट्राई” या दोस्तों के दबाव से शुरू होती है। शुरुआत में बच्चे इसे फोकस बढ़ाने या तनाव कम करने का जरिया मानते हैं, लेकिन धीरे-धीरे यह गंभीर नशे की आदत में बदल जाती है। एक विशेषज्ञ के अनुसार, हर महीने 5 से 6 ऐसे केस सामने आ रहे हैं, जिनमें अधिकतर छात्र शहर के प्रतिष्ठित स्कूलों से जुड़े होते हैं।
स्कूल बैग और लंच ब्रेक तक पहुंचा ड्रग्स
जांच और काउंसलिंग में सामने आया है कि छात्र गुलाबी रंग की छोटी पुड़िया में एमडी ड्रग्स रखते हैं और कई बार स्कूल के लंच ब्रेक में भी इसका सेवन कर लेते हैं। यह ट्रेंड खासतौर पर “पार्टी कल्चर” के जरिए तेजी से फैल रहा है।
माता-पिता के लिए चेतावनी संकेत
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों में कुछ बदलाव इस खतरे की ओर इशारा कर सकते हैं। इनमें अचानक चुप रहना या व्यवहार में बदलाव, पढ़ाई और हॉबी से दूरी, आंखों का लाल होना, घर से पैसे गायब होना, नए और संदिग्ध दोस्तों का साथ और देर रात तक जागना और दिन में ज्यादा सोना।
जानिये कहां हो रहा ड्रग्स का निर्माण
जानकारी के अनुसार, एमडी ड्रग्स का निर्माण मध्यप्रदेश के मंदसौर, नीमच और आसपास के क्षेत्रों में किया जा रहा है, जबकि इसकी सप्लाई इंदौर, रतलाम, देवास और उज्जैन जैसे शहरों में फैल रही है। यह पूरी तरह केमिकल से तैयार किया जाने वाला नशा है, जो शरीर और दिमाग पर गंभीर असर डालता है।
“फोकस बढ़ाने” के नाम पर जाल
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि बच्चों को अक्सर यह कहकर ड्रग्स लेने के लिए उकसाया जाता है कि इससे पढ़ाई में ध्यान बढ़ेगा और तनाव कम होगा। यही झांसा उन्हें धीरे-धीरे लत की ओर धकेल देता है।
एजेंसियां सतर्क, कार्रवाई जारी
नारकोटिक्स और पुलिस विभाग के अधिकारी लगातार ऐसे नेटवर्क पर नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि स्कूल जाने वाले बच्चों तक ड्रग्स पहुंचाने वाले कई तस्करों को गिरफ्तार किया जा चुका है और आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव
विशेषज्ञों का मानना है कि इस खतरे से निपटने के लिए अभिभावकों और स्कूलों को मिलकर काम करना होगा। बच्चों के व्यवहार पर नजर रखें, उनमें अचानक बदलाव को नजरअंदाज न करें, इसके साथ ही उनसे खुलकर संवाद करें और जरूरत पड़ने पर तुरंत काउंसलिंग लें।
यह मामला सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि समाज और परिवार की जिम्मेदारी का भी है। समय रहते सतर्कता ही बच्चों को इस खतरनाक जाल से बचा सकती है।
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