मस्जिद के नाम पर एमवाय परिसर में अतिक्रमण: अब चलेगा बुलडोजर; कलेक्टर की अनापत्ति के बाद निगम ने दी निर्माण की अनुमति
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
प्रदेश के सबसे बड़े एमवाय अस्पताल परिसर में धर्म विशेष के लोगो द्वारा सरकारी जमीन पर धार्मिक स्थल के नाम पर अवैध अतिक्रमण कर लिया है। पार्षद ने निगमायुक्त व कलेक्टर से चिकित्सा सुविधाएं बढ़ाने में बाधक अतिक्रमण को हटाने की मांग की है। इससे सरकारी जमीन पर किए गए अतिक्रमण पर प्रशासन ने सख्त रुख दिखाते हुए कार्रवाई की चेतावनी दी है।
एमवाय अस्पताल और एमजीएम मेडीकल कॉलेज के पास सरकारी जमीन पर धर्म विशेष के लोगों ने मस्जिद के नाम पर बाउण्ड्रीवाल बनाकर अन्य निर्माण कर अतिक्रमण किया है। इसको लेकर वार्ड 55 की पार्षद पंखुड़ी जैन डोसी ने निगमायुक्त व कलेक्टर को पत्र लिखकर अस्पताल परिसर में किए गए अतिक्रमण को हटाने की मांग की है।
पार्षद ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने एमवाय अस्पताल में चिकित्सा सुविधा बढ़ाने के लिए 773 करोड़ रुपए से अधिक मंजूर किए है। लेकिन अस्पताल परिसर की सरकारी जमीन पर धर्म विशेष के लोगो ने अवैध अतिक्रमण कर लिया है। इससे विकास कार्य में अड़चन आ सकती है।
इसके चलते इस अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई की जाए। पार्षद की मांग पर कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा है कि आंवटित जमीन के अलावा किए गए अन्य निर्माण व अतिक्रमण मामले की जांच कराई गई, जिसमें कई तरह की गड़बड़ी मिली है। इसके चलते अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
यह है मामला: पार्षद पंखुड़ी जैन डोसी ने बताया कि एमवाय अस्पताल परिसर में कलेक्टर की अनुमति से धर्म विशेष के लोगो को 300 वर्गफीट में निर्माण की अनुमति दी गई थी। कलेक्टर की अनुमति के बाद नगर निगम ने भी निर्माण के लिए मंजूरी दे दी थी। लेकिन बाद में धर्मविशेष के कर्ताधर्ताओं ने करीब 30 हजार वर्गफीट जमीन पर अतिक्रमण करते हुए बाउण्ड्रीवाल व अन्य निर्माण कर लिए।
इसकी शिकायत बीते दिनों तहसीलदार कोर्ट में की गई। जहां सुनवाई के बाद तहसीलदार कोर्ट ने माना कि वर्ष 1985 में जिस मस्जिद को अनुमति दी गई थी, उसका क्षेत्रफल 300 वर्गफीट था। बाद में करीब 30 हजार वर्ग फीट सरकारी जमीन पर अन्य निर्माण कर लिया गया।
तहसीलदार कमलेश कुशवाह ने आदेश में कहा कि अनसर्वेड रेसीडेंसी एरिया के ब्लॉक 11 और 12 में मस्जिद और मुसाफिरखाने के अलावा किया गया निर्माण अनधिकृत कब्जा है। मस्जिद की मूल संरचना को छोड़ बाउंड्रीवाल और अन्य अवैध निर्माण तीन दिन में स्वयं हटाएं। नहीं हटाए जाने पर आरआई और पटवारी को बेदखली कराने के निर्देश दिए हैं।
नजूल की जमीन: बताया जाता है कि जूनी इंदौर तहसील क्षेत्र के ब्लॉक नंबर 12 (नए सर्वे में ब्लॉक नंबर 38) में यह जमीन 0.70 एकड़ क्षेत्रफल की है। यह नजूल रिकॉर्ड में शासकीय भूमि के रूप में दर्ज है। तहसीलदार ने नगर निगम से इस संबंध में जानकारी ली तो खुलासा हुआ कि 9 सितंबर 1985 को 300 वर्गफीट पर निर्माण की अनुमति दी गई थी।
इसके बाद तहसीलदार कोर्ट ने निगम, पटवारी रिपोर्ट व उपलब्ध दस्तावेजों की जांच कराई। इसमें खुलासा हुआ कि 9 सितंबर 1985 को दी गई अनुमति में मस्जिद का निर्माण 300 वर्ग फीट क्षेत्र में स्वीकृत था। गूगल सैटेलाइट इमेज से भी पुष्टि होती है कि प्रारंभिक निर्माण छोटा था। बाद में प्रस्तुत दस्तावेज (पी-2) में ‘सीआरपी लाइन’ शब्द अलग हैंडराइटिंग से जोड़ा गया। इससे भूमि स्वामित्व का कोई अधिकार उत्पन्न नहीं होता।
सरकारी जमीन: पार्षद पंखुड़ी जैन डोसी ने बताया कि तहसीलदार कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि मूल मस्जिद की आड़ में बाउंड्रीवाल और विस्तार कर जो निर्माण किया गया, वह बिना अनुमति शासकीय भूमि पर किया गया है। मुसाफिरखाने के निर्माण की अनुमति नगर निगम के भवन अधिकारी द्वारा पूर्व में कलेक्टर की अनापत्ति के आधार पर दी गई थी।
इस मामले में अनावेदक सैयद शाहिर अली (मस्जिद अध्यक्ष, सदर अंजुमन इस्ला-उल-मुस्लेमिन) और वक्फ बोर्ड ने दावा किया कि जमीन वर्ष 1967 से मस्जिद और इंदौर वक्फ बोर्ड के नाम दर्ज है। कलेक्टर ने 1994 में इस भूमि पर अनापत्ति दी थी। मस्जिद का क्षेत्रफल 40 हजार वर्ग फीट है। मस्जिद के नाम पर 80 लाख रुपए का लोन भी लिया गया है।
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